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पेयजल भंडारण टैंकों की क्लोरिनेशन करें विभाग : एसडीएम
Updated Thu, 22 Mar 2018 10:15 PM IST
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सोलन। सरकारी महकमों और निजी संस्थानों को अपने स्तर पर पेयजल भंडारण टैंकों की क्लोरिनेशन करनी होगी। पानी के सैंपल भरने पर अगर वह फेल पाए जाते हैं तो विभागों के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने पीलिया की रोकथाम को लेकर यह आदेश जारी किए हैं। सोलन में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता एसडीएम आशुतोष गर्ग ने की। उन्होंने कहा कि यह निर्देश पीलिया और डेंगू की रोकथाम को लेकर जारी किए हैं। क्लोरिनेशन के लिए लोग आईपीएच से भी मदद ले सकते हैं।
उन्होंने ढाबा संचालकों और होटल वालों तथा लोगों को निर्देश दिए हैं कि वह अपने आसपास पानी न खड़ा होने दें। किसी भी व्यक्ति के घर के आसपास पानी खड़ा मिला तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। खड़े पानी में मच्छरों के पनपने से डेंगू तथा मलेरिया जैसे रोग फैलते हैं। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे विभिन्न संस्थानों में मौजूद पेयजल भंडारण टैंकों की क्लोरिनेशन को सुनिश्चित बनाएं।
उन्होंने कहा कि यह इंतजाम डेंगू, पीलिया, जठरांत्रशोथ (गेस्ट्रोएनट्राइटिस), अतिसार तथा हैजे जैसे रोगों से निपटने के लिए जा रहे हैं। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों को भी निर्देश दिए कि होटल मालिकों, ढाबा मालिकों और उद्योगों द्वारा निकास किए जा रहे दूषित जल को पेयजल स्रोतों से जाने से रोकें। गर्मियों के दौरान टैंकरों के माध्यम से उपलब्ध करवाए जाने वाले पेयजल की पूरी तरह क्लोरिनेशन तथा परीक्षण के बाद ही वितरण करें। सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि पंचायत स्तर पर ब्लीचिंग पाउडर की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करें। राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर चल रहे रेहड़ी-फड़ी वालों के पंजीकरण करने तथा उनके द्वारा परोसे जा रहे खाद्य पदार्थों की भी समय-समय पर जांच की जाए। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरके दरोच ने कहा कि जिले के सभी चिकित्सा संस्थानों में क्लोरीन और ओआरएस का भंडारण पर्याप्त मात्रा में कर लिया है। इन दवाओं को खंड चिकित्सा अधिकारी कार्यालयों, पंचायतों, आंगनबाड़ी केंद्रों व तथा शिक्षण संस्थानों के माध्यम से घर-घर तक पहुंचा जाएगा। बैठक में एसडीएम कंडाघाट संजीव शर्मा, एमओएच डॉ. एनके गुप्ता, जिला कार्यक्रम अधिकारी वंदना चौहान, पुलिस उप अधीक्षक अमित ठाकुर, अधिशासी अभियंता सुमित सूद, एसएमओ डॉ. राजन उप्पल, नालागढ़, धर्मपुर, अर्की, चंडी और सायरी चिकित्सा खंड के खंड चिकित्सा अधिकारी मौजूद रहे।
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पेयजल स्रोतों की जाएगी जांच
एसडीएम आशुतोष गर्ग ने कहा कि शहर और गांवों के सभी पेयजल प्राकृतिक जल स्रोतों तथा बावड़ियों की जांच करें। जांच कर यह सुनिश्चित करें की पेयजल स्रोतों का पानी पीने योग्य है या नहीं। अगर पानी पीने योग्य नहीं है तो पेयजल स्रोत पर सूचना लगाई जाए। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे केवल उन्हीं प्राकृतिक जल स्रोतों तथा बावड़ियों का पानी प्रयोग में लाएं जो सुरक्षित है। पानी को कम से कम 20 मिनट तक उबालकर ही प्रयोग में लाएं।
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उन्होंने ढाबा संचालकों और होटल वालों तथा लोगों को निर्देश दिए हैं कि वह अपने आसपास पानी न खड़ा होने दें। किसी भी व्यक्ति के घर के आसपास पानी खड़ा मिला तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। खड़े पानी में मच्छरों के पनपने से डेंगू तथा मलेरिया जैसे रोग फैलते हैं। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे विभिन्न संस्थानों में मौजूद पेयजल भंडारण टैंकों की क्लोरिनेशन को सुनिश्चित बनाएं।
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उन्होंने कहा कि यह इंतजाम डेंगू, पीलिया, जठरांत्रशोथ (गेस्ट्रोएनट्राइटिस), अतिसार तथा हैजे जैसे रोगों से निपटने के लिए जा रहे हैं। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों को भी निर्देश दिए कि होटल मालिकों, ढाबा मालिकों और उद्योगों द्वारा निकास किए जा रहे दूषित जल को पेयजल स्रोतों से जाने से रोकें। गर्मियों के दौरान टैंकरों के माध्यम से उपलब्ध करवाए जाने वाले पेयजल की पूरी तरह क्लोरिनेशन तथा परीक्षण के बाद ही वितरण करें। सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि पंचायत स्तर पर ब्लीचिंग पाउडर की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करें। राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर चल रहे रेहड़ी-फड़ी वालों के पंजीकरण करने तथा उनके द्वारा परोसे जा रहे खाद्य पदार्थों की भी समय-समय पर जांच की जाए। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरके दरोच ने कहा कि जिले के सभी चिकित्सा संस्थानों में क्लोरीन और ओआरएस का भंडारण पर्याप्त मात्रा में कर लिया है। इन दवाओं को खंड चिकित्सा अधिकारी कार्यालयों, पंचायतों, आंगनबाड़ी केंद्रों व तथा शिक्षण संस्थानों के माध्यम से घर-घर तक पहुंचा जाएगा। बैठक में एसडीएम कंडाघाट संजीव शर्मा, एमओएच डॉ. एनके गुप्ता, जिला कार्यक्रम अधिकारी वंदना चौहान, पुलिस उप अधीक्षक अमित ठाकुर, अधिशासी अभियंता सुमित सूद, एसएमओ डॉ. राजन उप्पल, नालागढ़, धर्मपुर, अर्की, चंडी और सायरी चिकित्सा खंड के खंड चिकित्सा अधिकारी मौजूद रहे।
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पेयजल स्रोतों की जाएगी जांच
एसडीएम आशुतोष गर्ग ने कहा कि शहर और गांवों के सभी पेयजल प्राकृतिक जल स्रोतों तथा बावड़ियों की जांच करें। जांच कर यह सुनिश्चित करें की पेयजल स्रोतों का पानी पीने योग्य है या नहीं। अगर पानी पीने योग्य नहीं है तो पेयजल स्रोत पर सूचना लगाई जाए। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे केवल उन्हीं प्राकृतिक जल स्रोतों तथा बावड़ियों का पानी प्रयोग में लाएं जो सुरक्षित है। पानी को कम से कम 20 मिनट तक उबालकर ही प्रयोग में लाएं।