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चार हजार लोगों को नहीं मिल रहा पीने का पानी
Updated Wed, 15 Nov 2017 10:35 PM IST
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दाड़लाघाट (सोलन)। हनुमान बड़ोग पंचायत में लोग लंबे समय से पेयजल किल्लत झेलने को मजबूर हैं। लोग इस समस्या को कई बार विभाग के समक्ष उठा चुके हैं लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। लोगों का कहना है कि सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग की उठाऊ पेयजल योजना अछु डाबर हनुमान बड़ोग डमलाना में लगी मशीनरी कम क्षमता की है। पेयजल योजना काफी पुरानी होने से वर्तमान आबादी की मांग को यह पूरा नहीं कर पा रही। जगह-जगह से हो रही लीकेज के कारण भी पेयजल सप्लाई प्रभावित हो रही है। पानी पहुंचे या नहीं पर विभाग बिल भेजना नहीं भूलता है। सबसे बुरे हालात डमलाना घाटी, डगेच, मानन मदोती, नावां,रनो सासन और रणो खालसा गांवों में हैं। यहां पर लोगों को पीने का साफ पानी नहीं मिल रहा।
लोगों को इसके लिए दूर-दूर तक भटकना पड़ता है। ग्रामीण पीने के साफ पानी के लिए बावड़ियों पर निर्भर हैं। इनमें पीने के पानी के लिए दिनभर भीड़ लगी रहती। किसानों को अपने और मवेशियों के लिए पानी का जुगाड़ करना आसान नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग द्वारा योजना की रिमॉडलिंग का प्रस्ताव बना कर उपयुक्त कार्यालय को मंजूरी को भेजा जो एक साल से वहा धूल फांक रहा है। इसे अभी तक स्वीकृति नहीं मिल पाई है।
पंचायत प्रधान कृष्ण सिंह कंवर, बाबू राम, केशव राम, धन्ना राम, परस राम, धर्म पाल, काशी राम,परसा, हेमा वती, नजरू राम और ब्रिज मोहन ने कहा कि पंचायत की 4000 से अधिक आबादी के लिए चार की जगह एक वाटर गार्ड नियुक्त है। इसके कंधों पर ही इतने लोगों के लिए पानी की सप्लाई का जिम्मा है। पुराने पड़ चुके पंप बार-बार खराब हो जाते हैं। उन्होंने अधिकारियों पर सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विद्या स्टोक्स तक के आदेशों की अवहेलना करने के आरोप भी लगाए। बताया कि प्रतिनिधिमंडल इस समस्या के संदर्भ में मंत्री से मिला था। उन्होंने विभाग को तुरंत पंचायत में चार वाटर गार्ड नियुक्त करने व पेयजल योजना की रिमॉडलिंग करने में आदेश दिए थे लेकिन विभाग ने इन आदेशों की भी कोई परवाह नहीं की।
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स्वीकृति के लिए भेजा है प्रोजेक्ट : शर्मा
सहायक अभियंता सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग उपमंडल दाड़लाघाट आरके शर्मा ने बताया कि पेयजल योजना की रिमॉडलिंग का प्रस्ताव बनाकर स्वीकृति के लिए भेजा है। स्वीकृति मिलते ही काम शुरू करेंगे। इसके बाद लोगों को बड़ी राहत मिल जाएगी।
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लोगों को इसके लिए दूर-दूर तक भटकना पड़ता है। ग्रामीण पीने के साफ पानी के लिए बावड़ियों पर निर्भर हैं। इनमें पीने के पानी के लिए दिनभर भीड़ लगी रहती। किसानों को अपने और मवेशियों के लिए पानी का जुगाड़ करना आसान नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग द्वारा योजना की रिमॉडलिंग का प्रस्ताव बना कर उपयुक्त कार्यालय को मंजूरी को भेजा जो एक साल से वहा धूल फांक रहा है। इसे अभी तक स्वीकृति नहीं मिल पाई है।
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पंचायत प्रधान कृष्ण सिंह कंवर, बाबू राम, केशव राम, धन्ना राम, परस राम, धर्म पाल, काशी राम,परसा, हेमा वती, नजरू राम और ब्रिज मोहन ने कहा कि पंचायत की 4000 से अधिक आबादी के लिए चार की जगह एक वाटर गार्ड नियुक्त है। इसके कंधों पर ही इतने लोगों के लिए पानी की सप्लाई का जिम्मा है। पुराने पड़ चुके पंप बार-बार खराब हो जाते हैं। उन्होंने अधिकारियों पर सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विद्या स्टोक्स तक के आदेशों की अवहेलना करने के आरोप भी लगाए। बताया कि प्रतिनिधिमंडल इस समस्या के संदर्भ में मंत्री से मिला था। उन्होंने विभाग को तुरंत पंचायत में चार वाटर गार्ड नियुक्त करने व पेयजल योजना की रिमॉडलिंग करने में आदेश दिए थे लेकिन विभाग ने इन आदेशों की भी कोई परवाह नहीं की।
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स्वीकृति के लिए भेजा है प्रोजेक्ट : शर्मा
सहायक अभियंता सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग उपमंडल दाड़लाघाट आरके शर्मा ने बताया कि पेयजल योजना की रिमॉडलिंग का प्रस्ताव बनाकर स्वीकृति के लिए भेजा है। स्वीकृति मिलते ही काम शुरू करेंगे। इसके बाद लोगों को बड़ी राहत मिल जाएगी।