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चंबाघाट में मोटर मार्केट पर चली जेसीबी
Updated Thu, 29 Mar 2018 10:33 PM IST
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कालका-शिमला फोरलेन की जद में अाए चंबाघाट क्षेत्र में भवनों को उखाड़ता प्रशासन।
- फोटो : अमर उजाला
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सोलन। फोरलेन निर्माण के लिए कब्जों को हटाने का काम वीरवार से शुरू हो गया है। एनएचएआई प्रबंधन और प्रशासन ने जेसीबी की मदद से चंबाघाट में कब्जे हटाने की मुहिम शुरू कर दी। यह मुहिम मोटर मार्केट से शुरू हुई। अब अब तक चंबाघाट से कैंथलीघाट तक मोटर मार्केट को ही सबसे सुरक्षित माना जा रहा था। इसकी वजह से मोटर मार्केट का काफी बड़ा हिस्सा खाली नहीं हुआ था।
जेसीबी शुरू होते ही यहां कारोबार चला रहे लोगों को सामान समेटने का भी वक्त नहीं मिला। हालांकि कुछ लोगों ने प्रशासन और एनएचएआई प्रबंधन के आगे मोहलत के लिए हाथ भी जोड़े लेकिन उनकी बात को अनसुना कर दिया गया। चंबाघाट में जेसीबी लगने के साथ ही अब कैंथलीघाट तक के कब्जाधारकों में खौफ बढ़ गया है।
प्रशासन ने इस मार्ग पर करीब 258 कब्जाधारकों को नोटिस जारी किए थे। इन सभी कब्जाधारकों को जमीन के बाजारी मूल्य से दोगुना और ब्याज सहित मुआवजा राशि का भुगतान किया है। चंबाघाट में एक-एक परिवार को करीब 19 हजार रुपये प्रति वर्ग के हिसाब से भुगतान हुआ है। भुगतान के बाद प्रशासन की ओर से सभी को 24 मार्च तक कब्जे छोड़ने के आदेश जारी किए थे। लेकिन ज्यादातर ने मुआवजा लेने के बाद भी कब्जे नहीं छोड़े थे और प्रशासन से लगातार राहत की मांग कर रहे थे। सबसे ज्यादा मुद्दा मोटर मार्केट में बैठे कारीगरों और कारोबारियों ने उठाया था। यह सभी ट्रांसपोर्ट नगर के लिए भूमि चयन और उन्हें वैकल्पिक तौर पर वहां बसाने की मांग पर अड़े थे। इस वजह से प्रशासन की मुहिम निर्धारित समय 24 मार्च के बाद सीधे शुरू नहीं हो पाई। फिलहाल, प्रशासन ने कब्जे हटाने का अभियान छेड़ दिया है और जल्द ही फोरलेन के लिए चयनित भूमि को खाली करवा लेने की बात कही है।
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258 भवन मालिकों को 395 करोड़ मुआवजा
सोलन से कैंथलीघाट तक 258 भवनों के लिए मुआवजा राशि तय हुई है। प्रशासन की ओर से इन भवन मालिकों को करीब 395 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाना था। इसमें से अब तक 318.64 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि बांटी जा चुकी है। अन्य मामले लंबित चल रहे हैं। एनएचएआई ने फोरलेन के द्वितीय चरण में 534.17 बीघा जमीन का अधिग्रहण किया है। परवाणू से चंबाघाट तक 351 भवन और जमीन मालिकों से 494 बीघा जमीन के एवज में 310 करोड़ 62 लाख रुपये वितरित किए हैं।
खाली करनी पड़ेगी जमीन : एसडीएम
एसडीएम आशुतोष गर्ग ने कहा कि सिर्फ उन्हीं लोगों को मुआवजा नहीं मिल पाया है जिनकी जमीन या घर विवादित हैं। अन्य सभी का निपटारा कर दिया है। ऐसे में भवन मालिकों को अपने कब्जे छोड़कर नई जगह चले जाना चाहिए। एनएचएआई प्रबंधन की ओर से भवन मालिकों को जमीन के निर्धारित मूल्य से दोगुनी राशि पर ब्याज के साथ भुगतान किया है। उन्होंने कहा कि अब किसी भी सूरत में भवनों को खाली करवाया जाएगा।
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जेसीबी शुरू होते ही यहां कारोबार चला रहे लोगों को सामान समेटने का भी वक्त नहीं मिला। हालांकि कुछ लोगों ने प्रशासन और एनएचएआई प्रबंधन के आगे मोहलत के लिए हाथ भी जोड़े लेकिन उनकी बात को अनसुना कर दिया गया। चंबाघाट में जेसीबी लगने के साथ ही अब कैंथलीघाट तक के कब्जाधारकों में खौफ बढ़ गया है।
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प्रशासन ने इस मार्ग पर करीब 258 कब्जाधारकों को नोटिस जारी किए थे। इन सभी कब्जाधारकों को जमीन के बाजारी मूल्य से दोगुना और ब्याज सहित मुआवजा राशि का भुगतान किया है। चंबाघाट में एक-एक परिवार को करीब 19 हजार रुपये प्रति वर्ग के हिसाब से भुगतान हुआ है। भुगतान के बाद प्रशासन की ओर से सभी को 24 मार्च तक कब्जे छोड़ने के आदेश जारी किए थे। लेकिन ज्यादातर ने मुआवजा लेने के बाद भी कब्जे नहीं छोड़े थे और प्रशासन से लगातार राहत की मांग कर रहे थे। सबसे ज्यादा मुद्दा मोटर मार्केट में बैठे कारीगरों और कारोबारियों ने उठाया था। यह सभी ट्रांसपोर्ट नगर के लिए भूमि चयन और उन्हें वैकल्पिक तौर पर वहां बसाने की मांग पर अड़े थे। इस वजह से प्रशासन की मुहिम निर्धारित समय 24 मार्च के बाद सीधे शुरू नहीं हो पाई। फिलहाल, प्रशासन ने कब्जे हटाने का अभियान छेड़ दिया है और जल्द ही फोरलेन के लिए चयनित भूमि को खाली करवा लेने की बात कही है।
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258 भवन मालिकों को 395 करोड़ मुआवजा
सोलन से कैंथलीघाट तक 258 भवनों के लिए मुआवजा राशि तय हुई है। प्रशासन की ओर से इन भवन मालिकों को करीब 395 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाना था। इसमें से अब तक 318.64 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि बांटी जा चुकी है। अन्य मामले लंबित चल रहे हैं। एनएचएआई ने फोरलेन के द्वितीय चरण में 534.17 बीघा जमीन का अधिग्रहण किया है। परवाणू से चंबाघाट तक 351 भवन और जमीन मालिकों से 494 बीघा जमीन के एवज में 310 करोड़ 62 लाख रुपये वितरित किए हैं।
खाली करनी पड़ेगी जमीन : एसडीएम
एसडीएम आशुतोष गर्ग ने कहा कि सिर्फ उन्हीं लोगों को मुआवजा नहीं मिल पाया है जिनकी जमीन या घर विवादित हैं। अन्य सभी का निपटारा कर दिया है। ऐसे में भवन मालिकों को अपने कब्जे छोड़कर नई जगह चले जाना चाहिए। एनएचएआई प्रबंधन की ओर से भवन मालिकों को जमीन के निर्धारित मूल्य से दोगुनी राशि पर ब्याज के साथ भुगतान किया है। उन्होंने कहा कि अब किसी भी सूरत में भवनों को खाली करवाया जाएगा।