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सोलन कॉलेज के छात्र हॉस्टल में मूलभूत सुविधाएं नहीं
Updated Sun, 14 Oct 2018 09:56 PM IST
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पीने-नहाने को नहीं पानी, खिड़कियों के टूटे शीशों से हवा रोकने को लगाए गत्ते
सोलन कॉलेज के ब्वॉयज हॉस्टल में मूलभूत सुविधाओं कोतरस रहे छात्र, नहीं मिल रहा खाना, बाहर भोजन मजबूरी
कॉलेज में जिला सोलन, शिमला, सिरमौर के विद्यार्थी करते हैं शिक्षा ग्रहण
अमर उजाला ब्यूरो
सोलन। डिग्री कॉलेज सोलन के छात्र हॉस्टल में विद्यार्थियों को सुविधा का अभाव है। इस कारण छात्र हॉस्टल से छोड़ कर शहर में किराये का कमरा लेकर रह रहे हैं। हॉस्टल में अब छात्रों की संख्या सिर्फ 25 ही रह गई है। कॉलेज प्रशासन एक माह का हॉस्टल खर्च करीब 2200 रुपये ले रहा है। इसके बावजूद छात्रों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। छात्र सिर्फ हॉस्टल में सोने के लिए आते हैं जबकि भोजन, पेयजल बाहर से खरीद कर ग्रहण कर रहे हैं। आलम यह है कि छात्र हॉस्टल में न तो पेयजल की व्यवस्था है और न ही भोजन की। इसके चलते छात्रों को अपना खान-पान सब बाहर से करना पड़ रहा है जो उनकी जेब पर भारी पड़ रहा हैं। वहीं छात्रों को पानी भी खरीद कर पीन पड़ रहा है। हॉस्टल में पानी भी कभी-कभी आता है जबकि हॉस्टल के स्नानागृह में लगे गीजर भी खराब पड़े हैं। इसके चलते छात्रों को ठंड के दौरान ठंडे पानी या फिर रॉड लगा कर पानी गर्म कर नहाने को मजबूर होना पड़ रहा है। छात्रों की मानें तो उन्होंने समस्या को कई दफा कॉलेज प्रशासन के पास रखा, इसके बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। डिग्री कॉलेज सोलन में शिमला, सिरमौर सहित सोलन के आसपास और दूरदराज क्षेत्र से विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते हैं। इसमें से अन्य जिलों से आए छात्र हॉस्टल में रहते हैं लेकिन छात्रों को हॉस्टल में मूलभूत सुविधाएं ही नहीं मिल रही हैं। हॉस्टल सिर्फ छात्रों के लिए सिर छिपाने की जगह ही बन कर रह गई है। यहां पर न तो छात्रों के लिए पेयजल व्यवस्था तो है ही नहीं, नहाने व शौच अन्य के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। हॉस्टल की पाइपलाइन सहित शौचालय की नालियां ब्लॉक पड़ी हैं जिससे यहां पर शौचालय के बुरे हाल हैं। वहीं हॉस्टल की दीवारें भी पूरी तरह से काली पड़ गई हैं। इसके अलावा कमरों की खिड़कियों के शीशे टूटे हुए हैं। इसके चलते छात्रों ने ठंड से बचने के लिए शीशों में कागज सहित अन्य गत्ते लगाए हुए हैं।
बाहर होटलों में खाना खाने को मजबूर
छात्र हॉस्टल में छात्रों के पास मेस तो है लेकिन खाना बनाने वाला कुक कोई भी नहीं है। इसके चलते छात्रों को ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर की कोई सुविधा नहीं मिल रही है। छात्रों को बाहर निजी होटलों में मंहगे दाम पर भोजन करना पड़ रहा है जो उनकी जेब पर भारी पड़ रहा है।
कॉलेज प्राचार्य डॉ. नीलम कौशिक का कहना है कि हॉस्टल में छात्रों को हो रही असुविधा का मामला उनके संज्ञान में है। उन्होंने बताया कि हॉस्टल की मरम्मत का प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भेजा है। जैसे ही इसके लिए फंडिंग होती है, मरम्मत कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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सोलन कॉलेज के ब्वॉयज हॉस्टल में मूलभूत सुविधाओं कोतरस रहे छात्र, नहीं मिल रहा खाना, बाहर भोजन मजबूरी
कॉलेज में जिला सोलन, शिमला, सिरमौर के विद्यार्थी करते हैं शिक्षा ग्रहण
अमर उजाला ब्यूरो
सोलन। डिग्री कॉलेज सोलन के छात्र हॉस्टल में विद्यार्थियों को सुविधा का अभाव है। इस कारण छात्र हॉस्टल से छोड़ कर शहर में किराये का कमरा लेकर रह रहे हैं। हॉस्टल में अब छात्रों की संख्या सिर्फ 25 ही रह गई है। कॉलेज प्रशासन एक माह का हॉस्टल खर्च करीब 2200 रुपये ले रहा है। इसके बावजूद छात्रों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। छात्र सिर्फ हॉस्टल में सोने के लिए आते हैं जबकि भोजन, पेयजल बाहर से खरीद कर ग्रहण कर रहे हैं। आलम यह है कि छात्र हॉस्टल में न तो पेयजल की व्यवस्था है और न ही भोजन की। इसके चलते छात्रों को अपना खान-पान सब बाहर से करना पड़ रहा है जो उनकी जेब पर भारी पड़ रहा हैं। वहीं छात्रों को पानी भी खरीद कर पीन पड़ रहा है। हॉस्टल में पानी भी कभी-कभी आता है जबकि हॉस्टल के स्नानागृह में लगे गीजर भी खराब पड़े हैं। इसके चलते छात्रों को ठंड के दौरान ठंडे पानी या फिर रॉड लगा कर पानी गर्म कर नहाने को मजबूर होना पड़ रहा है। छात्रों की मानें तो उन्होंने समस्या को कई दफा कॉलेज प्रशासन के पास रखा, इसके बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। डिग्री कॉलेज सोलन में शिमला, सिरमौर सहित सोलन के आसपास और दूरदराज क्षेत्र से विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते हैं। इसमें से अन्य जिलों से आए छात्र हॉस्टल में रहते हैं लेकिन छात्रों को हॉस्टल में मूलभूत सुविधाएं ही नहीं मिल रही हैं। हॉस्टल सिर्फ छात्रों के लिए सिर छिपाने की जगह ही बन कर रह गई है। यहां पर न तो छात्रों के लिए पेयजल व्यवस्था तो है ही नहीं, नहाने व शौच अन्य के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। हॉस्टल की पाइपलाइन सहित शौचालय की नालियां ब्लॉक पड़ी हैं जिससे यहां पर शौचालय के बुरे हाल हैं। वहीं हॉस्टल की दीवारें भी पूरी तरह से काली पड़ गई हैं। इसके अलावा कमरों की खिड़कियों के शीशे टूटे हुए हैं। इसके चलते छात्रों ने ठंड से बचने के लिए शीशों में कागज सहित अन्य गत्ते लगाए हुए हैं।
बाहर होटलों में खाना खाने को मजबूर
छात्र हॉस्टल में छात्रों के पास मेस तो है लेकिन खाना बनाने वाला कुक कोई भी नहीं है। इसके चलते छात्रों को ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर की कोई सुविधा नहीं मिल रही है। छात्रों को बाहर निजी होटलों में मंहगे दाम पर भोजन करना पड़ रहा है जो उनकी जेब पर भारी पड़ रहा है।
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कॉलेज प्राचार्य डॉ. नीलम कौशिक का कहना है कि हॉस्टल में छात्रों को हो रही असुविधा का मामला उनके संज्ञान में है। उन्होंने बताया कि हॉस्टल की मरम्मत का प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भेजा है। जैसे ही इसके लिए फंडिंग होती है, मरम्मत कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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