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Solan News: प्रदेश में 1,281 उद्योग चल रहे बिना मंजूरी
Fri, 04 Sep 2026 12:06 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Fri, 04 Sep 2026 12:06 AM IST
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बद्दी में सबसे ज्यादा 469 उद्योग, लाल श्रेणी में उद्योगों की निगरानी बढ़ाने की उठी मांग
पंजाब मोर्चा ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्य प्रणाली पर उठाए सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। हिमाचल प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों की मंजूरी से जुड़े 1,281 मामले लंबित हैं। इन सरकारी आंकड़ों ने उद्योगों के संचालन और पर्यावरणीय निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पंजाब मोर्चा ने हिमाचल सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाया है।
मोर्चा ने इस मामले को लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू करने की बात कही है। सरकारी ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2017 से 2026 तक ये मामले लंबित हैं। इनमें सोलन-बद्दी क्षेत्र में 469 और सोलन-परवाणू में 134 मामले शामिल हैं। कुल्लू में 167, कांगड़ा में 133 और सिरमौर में 109 मामले दर्ज हैं। पंजाब मोर्चा के संयोजक गौरव राणा ने तत्काल जांच की मांग की है। उन्होंने यह स्पष्ट करने को कहा कि कौन सी इकाइयां वैध अनुमति के तहत संचालित हो रही हैं। राणा ने विशेष रूप से लाल श्रेणी के उद्योगों की निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया। मोर्चा ने हिमाचल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सचिव और सदस्य सचिव को कानूनी नोटिस भेजने का दावा किया है।
मोर्चा नेताओं ने चेतावनी दी कि औद्योगिक प्रदूषण का असर हिमाचल और पंजाब पर पड़ेगा। बीबीएन के उद्योगों का प्रदूषण सरसा, चिकनी खड्डों से होकर सतलुज नदी में मिल रहा है। इससे पंजाब के लोगों को दूषित पानी पीना पड़ रहा है। मोर्चा ने कहा कि वे हिमाचल या पंजाब को बर्बाद नहीं होने देंगे। इसके लिए कानूनी कार्रवाई के साथ जन आंदोलन भी तेज किया जाएगा।
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कोट
इन्हें सीधे बिना कंसेंट चल रहे उद्योग बताना सही नहीं है। कई उद्योगों की कंसेंट टू ऑपरेट पहले ही जारी हो चुकी है, जिनका केवल नवीनीकरण लंबित है। नवीनीकरण लंबित होने पर भी पुरानी मंजूरी की सभी शर्तें लागू रहती हैं और पर्यावरणीय मानकों का पालन अनिवार्य है। बोर्ड अब वन टाइम कंसेंट जारी करने की तैयारी कर रहा है। - अतुल परमार, अधिशासी अभियंता, प्रदूषण बोर्ड, बद्दी
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पंजाब मोर्चा ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्य प्रणाली पर उठाए सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। हिमाचल प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों की मंजूरी से जुड़े 1,281 मामले लंबित हैं। इन सरकारी आंकड़ों ने उद्योगों के संचालन और पर्यावरणीय निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पंजाब मोर्चा ने हिमाचल सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाया है।
मोर्चा ने इस मामले को लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू करने की बात कही है। सरकारी ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2017 से 2026 तक ये मामले लंबित हैं। इनमें सोलन-बद्दी क्षेत्र में 469 और सोलन-परवाणू में 134 मामले शामिल हैं। कुल्लू में 167, कांगड़ा में 133 और सिरमौर में 109 मामले दर्ज हैं। पंजाब मोर्चा के संयोजक गौरव राणा ने तत्काल जांच की मांग की है। उन्होंने यह स्पष्ट करने को कहा कि कौन सी इकाइयां वैध अनुमति के तहत संचालित हो रही हैं। राणा ने विशेष रूप से लाल श्रेणी के उद्योगों की निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया। मोर्चा ने हिमाचल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सचिव और सदस्य सचिव को कानूनी नोटिस भेजने का दावा किया है।
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मोर्चा नेताओं ने चेतावनी दी कि औद्योगिक प्रदूषण का असर हिमाचल और पंजाब पर पड़ेगा। बीबीएन के उद्योगों का प्रदूषण सरसा, चिकनी खड्डों से होकर सतलुज नदी में मिल रहा है। इससे पंजाब के लोगों को दूषित पानी पीना पड़ रहा है। मोर्चा ने कहा कि वे हिमाचल या पंजाब को बर्बाद नहीं होने देंगे। इसके लिए कानूनी कार्रवाई के साथ जन आंदोलन भी तेज किया जाएगा।
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इन्हें सीधे बिना कंसेंट चल रहे उद्योग बताना सही नहीं है। कई उद्योगों की कंसेंट टू ऑपरेट पहले ही जारी हो चुकी है, जिनका केवल नवीनीकरण लंबित है। नवीनीकरण लंबित होने पर भी पुरानी मंजूरी की सभी शर्तें लागू रहती हैं और पर्यावरणीय मानकों का पालन अनिवार्य है। बोर्ड अब वन टाइम कंसेंट जारी करने की तैयारी कर रहा है। - अतुल परमार, अधिशासी अभियंता, प्रदूषण बोर्ड, बद्दी