{"_id":"6a870b82c85edb16c90830ad","slug":"watches-not-working-nahan-news-c-177-1-ssml1028-186638-2026-08-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirmour News: नाहन के दिल्ली गेट में ऐतिहासिक लिटन मेमोरियल की चारों घड़ियां रूकीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirmour News: नाहन के दिल्ली गेट में ऐतिहासिक लिटन मेमोरियल की चारों घड़ियां रूकीं
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बारिश के पानी के कारण जाम हुई मशीनरी, घड़ियों की सुइयां 3:07 बजे रुके
भारत के वायसराय लार्ड लिटन के सम्मान में 1877 में बनाया था स्मारक
पंकज तन्हा
नाहन (सिरमौर)। रियासतकालीन धरोहर लिटन मेमोरियल (दिल्ली गेट) में लगी घड़ियों की सुइयां 3:07 बजे रुक गई हैं। हाल ही में हुई भारी बारिश के कारण ऐतिहासिक धरोहर लिटन मेमोरियल भी सुरक्षित नहीं रह सका। बताया जा रहा है सिरमौरी हुकमरानों की ओर से बनाए गए लिटन मेमोरियल की घड़ियों में पानी घुस गया। इससे मशीनरी जाम हो गई है। इसकी देख रेख कर रहे मैकेनिक इसे ठीक करने का प्रयास कर चुके हैं, लेकिन अभी सफलता नहीं मिली है। घड़ियां करीब पांच-छह दिन से खराब हैं।
बता दें कि सिरमौर के जिला मुख्यालय नाहन शहर का दिल्ली गेट किसी अजूबे से कम नहीं है। हिमाचल में कहीं पर भी इस तरह का मेमोरियल नहीं है। खास यह है कि दिल्ली गेट के आखिरी गुंबद में चारों ओर चार घड़ियां स्थापित की गई हैं। बताया जाता है कि भारत के वायसराय, लार्ड लिटन के सम्मान में 1877 में इस स्मारक स्थल की स्थापना सिरमौर के महाराजा ने करवाई थी। अब इसकी देखरेख का जिम्मा स्थानीय नगर परिषद के पास है। हर साल नगर परिषद इस गेट पर रंग रोगन भी करती है।
शहरवासी पंकज, पूनम चौहान, नेहा भंडारी, किरण चौहान, प्रियल, टुन्नू ने दिल्ली गेट इमारत की घड़ी का समय सही न बताने पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने बताया कि दिल्ली गेट इमारत शहर की एक पहचान है। इसी इमारत से शहर को जाना जाता है। इसे समय पर ठीक किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
नगर परिषद नाहन की अध्यक्ष उपमा धीमान ने कहा कि बारिश के कारण यह परेशानी आई है। मेकेनिक इन घड़ियों को ठीक करने का प्रयास कर रहे हैं।
123 साल से घड़ियों की देखरेख कर रहा सोहल परिवार
नाहन के पक्का टैंक निवासी राजेंद्र सोहल का परिवार 123 साल से इन घड़ियों की देखरेख कर रहा है। पहले राजेंद्र सोहल के पूर्वज इन घड़ियों में चाबी देने, मरम्मत और तेल वगैरह देने का कार्य करते थे। अब राजेंद्र सोहल 53 साल से इनकी देखरेख कर रहे हैं। राजेंद्र सोहल के अनुसार इन घड़ियों का निर्माण 1901 में लंदन में हुआ था। तत्कालीन महाराजा ने शहर के दिल्ली गेट में बने लिटन मेमोरियल में इनको लगवाया था। राजेंद्र सोहल ने बताया कि एक बार चाबी देने पर यह घड़ियां पांच दिन तक चलती हैं।
विज्ञापन
भारत के वायसराय लार्ड लिटन के सम्मान में 1877 में बनाया था स्मारक
पंकज तन्हा
नाहन (सिरमौर)। रियासतकालीन धरोहर लिटन मेमोरियल (दिल्ली गेट) में लगी घड़ियों की सुइयां 3:07 बजे रुक गई हैं। हाल ही में हुई भारी बारिश के कारण ऐतिहासिक धरोहर लिटन मेमोरियल भी सुरक्षित नहीं रह सका। बताया जा रहा है सिरमौरी हुकमरानों की ओर से बनाए गए लिटन मेमोरियल की घड़ियों में पानी घुस गया। इससे मशीनरी जाम हो गई है। इसकी देख रेख कर रहे मैकेनिक इसे ठीक करने का प्रयास कर चुके हैं, लेकिन अभी सफलता नहीं मिली है। घड़ियां करीब पांच-छह दिन से खराब हैं।
बता दें कि सिरमौर के जिला मुख्यालय नाहन शहर का दिल्ली गेट किसी अजूबे से कम नहीं है। हिमाचल में कहीं पर भी इस तरह का मेमोरियल नहीं है। खास यह है कि दिल्ली गेट के आखिरी गुंबद में चारों ओर चार घड़ियां स्थापित की गई हैं। बताया जाता है कि भारत के वायसराय, लार्ड लिटन के सम्मान में 1877 में इस स्मारक स्थल की स्थापना सिरमौर के महाराजा ने करवाई थी। अब इसकी देखरेख का जिम्मा स्थानीय नगर परिषद के पास है। हर साल नगर परिषद इस गेट पर रंग रोगन भी करती है।
विज्ञापन
शहरवासी पंकज, पूनम चौहान, नेहा भंडारी, किरण चौहान, प्रियल, टुन्नू ने दिल्ली गेट इमारत की घड़ी का समय सही न बताने पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने बताया कि दिल्ली गेट इमारत शहर की एक पहचान है। इसी इमारत से शहर को जाना जाता है। इसे समय पर ठीक किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
नगर परिषद नाहन की अध्यक्ष उपमा धीमान ने कहा कि बारिश के कारण यह परेशानी आई है। मेकेनिक इन घड़ियों को ठीक करने का प्रयास कर रहे हैं।
123 साल से घड़ियों की देखरेख कर रहा सोहल परिवार
नाहन के पक्का टैंक निवासी राजेंद्र सोहल का परिवार 123 साल से इन घड़ियों की देखरेख कर रहा है। पहले राजेंद्र सोहल के पूर्वज इन घड़ियों में चाबी देने, मरम्मत और तेल वगैरह देने का कार्य करते थे। अब राजेंद्र सोहल 53 साल से इनकी देखरेख कर रहे हैं। राजेंद्र सोहल के अनुसार इन घड़ियों का निर्माण 1901 में लंदन में हुआ था। तत्कालीन महाराजा ने शहर के दिल्ली गेट में बने लिटन मेमोरियल में इनको लगवाया था। राजेंद्र सोहल ने बताया कि एक बार चाबी देने पर यह घड़ियां पांच दिन तक चलती हैं।