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भूस्खलन से टिक्कर गांव में लोगों के आशियानों को हो रहा खतरा
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सतौन-रेणुकाजी सड़क पर बसे बड़वास पंचायत के टिक्कर गांव में भूस्खलन से घर में आई दरारें। संवाद
- फोटो : NAHAN
सतौन(सिरमौर) शिलाई क्षेत्र की बड़वास पंचायत के टिक्कर गांव में भूस्खलन से लोगों के घरों को खतरा पैदा हो गया है। लंबे समय से सतौन-रेणुकाजी मार्ग पर गांव के साथ लगती सड़क पर भूस्खलन हो रहा है। लोक निर्माण विभाग की ओर से मलबा हटाकर सड़क तो खोल दी जाती है, लेकिन अभी तक इस भूस्खलन को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
शिलाई विधानसभा क्षेत्र की बड़वास पंचायत का टिक्कर गांव सड़क से हो रहे कटाव के कारण भूस्खलन का दंश कई दशकों से झेल रहा है। इस कारण 12 परिवार संकट में हैं। ग्रामीण राजेंद्र सिंह, कल्याण सिंह, गुमान सिंह, बाबू राम, सूरत सिंह, तेलु राम, जाति राम, नैन सिंह आदि ने बताया कि सतौन रेणुकाजी सड़क पर सतौन से महज एक किलोमीटर की दूरी पर हर बरसात में भारी भूस्खलन होता है। कभी-कभार तो बिना बरसात के भी भूस्खलन हो रहा है।
भूस्खलन वाली जगह के ठीक ऊपर पहाड़ी पर टिक्कर गांव बसा है। भूस्खलन होने से गांव को खतरा पैदा हो गया है। खेत, खलियानों और घरों में दरारें आ गई हैं। लोगों को बरसात में रातें डर का साये में काटनी पड़ रही हैं। लोक निर्माण विभाग खाली मलबा हटाता आ रहा है। यहां 200 मीटर तक भूस्खलन वाला क्षेत्र है। इस पर विभाग ने आज तक कोई सुरक्षा दीवार नहीं लगाई है।
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हल्का पटवारी बड़वास सुरेश तोमर ने बताया कि एसडीएम पांवटा के निर्देशानुसार वे मौके पर गए थे। यहां ग्रामीणों से बातचीत में पता चला कि भूस्खलन का यह सिलसिला 1999 से जारी है। फिलहाल रिपोर्ट बनाकर उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है।
लोक निर्माण विभाग शिलाई मंडल के अधिशासी अभियंता पीके उप्रेती ने बताया कि सड़क में हर साल भारी भूस्खलन होता है। इस जगह पुल की कोई व्यवस्था नहीं, इसके चलते मलबा हटाकर ही सड़क खोलनी पड़ती है। सुरक्षा दीवार के लिए बजट का प्रावधान करवाना पड़ेगा।
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शिलाई विधानसभा क्षेत्र की बड़वास पंचायत का टिक्कर गांव सड़क से हो रहे कटाव के कारण भूस्खलन का दंश कई दशकों से झेल रहा है। इस कारण 12 परिवार संकट में हैं। ग्रामीण राजेंद्र सिंह, कल्याण सिंह, गुमान सिंह, बाबू राम, सूरत सिंह, तेलु राम, जाति राम, नैन सिंह आदि ने बताया कि सतौन रेणुकाजी सड़क पर सतौन से महज एक किलोमीटर की दूरी पर हर बरसात में भारी भूस्खलन होता है। कभी-कभार तो बिना बरसात के भी भूस्खलन हो रहा है।
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भूस्खलन वाली जगह के ठीक ऊपर पहाड़ी पर टिक्कर गांव बसा है। भूस्खलन होने से गांव को खतरा पैदा हो गया है। खेत, खलियानों और घरों में दरारें आ गई हैं। लोगों को बरसात में रातें डर का साये में काटनी पड़ रही हैं। लोक निर्माण विभाग खाली मलबा हटाता आ रहा है। यहां 200 मीटर तक भूस्खलन वाला क्षेत्र है। इस पर विभाग ने आज तक कोई सुरक्षा दीवार नहीं लगाई है।
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हल्का पटवारी बड़वास सुरेश तोमर ने बताया कि एसडीएम पांवटा के निर्देशानुसार वे मौके पर गए थे। यहां ग्रामीणों से बातचीत में पता चला कि भूस्खलन का यह सिलसिला 1999 से जारी है। फिलहाल रिपोर्ट बनाकर उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है।
लोक निर्माण विभाग शिलाई मंडल के अधिशासी अभियंता पीके उप्रेती ने बताया कि सड़क में हर साल भारी भूस्खलन होता है। इस जगह पुल की कोई व्यवस्था नहीं, इसके चलते मलबा हटाकर ही सड़क खोलनी पड़ती है। सुरक्षा दीवार के लिए बजट का प्रावधान करवाना पड़ेगा।