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Sirmour News: बढ़ते वाहनों से पांवटा साहिब में पार्किंग संकट गहराएगा
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पांवटा साहिब में बेहतर पार्किंग सुविधा के अभाव में संपर्क सड़क के साथ नो पार्किंग जोन में खड़े
चार साल से बजट का इंतजार कर रही भूमिगत पार्किंग योजना
92 हजार पार पहुंची शहर में वाहनों की संख्या
भूमिगत और मल्टीलेवल पार्किंग की उठी मांग
सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। औद्योगिकीकरण और बढ़ते व्यापारीकरण के कारण पांवटा साहिब में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में आने वाले समय में शहर में पार्किंग की समस्या गंभीर रूप ले सकती है।
शहर से गुजरने वाले तीन राष्ट्रीय राजमार्गों, एमडीआर और संपर्क मार्गों पर हर साल हजारों छोटे-बड़े वाहन बढ़ रहे हैं। यदि समय रहते बड़े शहरों की तर्ज पर भूमिगत और बहुउद्देश्यीय पार्किंग की व्यवस्था नहीं की गई तो भविष्य में जाम और पार्किंग संकट बढ़ सकता है।
नगर परिषद ने करीब चार वर्ष पहले शहर के लिए भूमिगत पार्किंग की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर निदेशक शहरी विकास विभाग, शिमला को मंजूरी के लिए भेजी थी, लेकिन अभी तक योजना को बजट नहीं मिल पाया है। आरएलए के आंकड़ों के अनुसार पांवटा साहिब में पंजीकृत वाहनों की संख्या 92 हजार के पार है। इनमें दोपहिया वाहनों की संख्या सबसे अधिक है। इसके अलावा मोटर कार, गुड्स कैरियर, व्यावसायिक ट्रैक्टर, मोपेड, बसें, कृषि ट्रैक्टर और निजी सेवा वाहनों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।
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शहर में पार्किंग की समस्या प्रमुख मुद्दा बन गई है। पहले सड़क किनारे बड़ी संख्या में वाहन खड़े हो जाते थे, लेकिन एनएच-7, एनएच-707 और एनएच-907 के फोरलेन निर्माण के बाद सड़क किनारे की करीब आधा दर्जन पार्किंग सुविधाएं समाप्त हो गई हैं। इससे शहर में पार्किंग का दबाव और बढ़ गया है। समाजसेवी आरपी तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता नंदलाल परवाल, मदन मोहन शर्मा, संजय कौशल, सुरजीत सिंह, मंजीत सिंह, एसएस गुप्ता, प्रदीप चौहान, एनएच चौहान, सुनील चौधरी, अतर सिंह और सीताराम ने बताया कि पुलिस मैदान के सामने टाइलनुमा और कच्ची पार्किंग में करीब 400 वाहन खड़े किए जा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि रामलीला मैदान में वकीलों और नगर परिषद कर्मियों के करीब 50 वाहनों की पार्किंग सुविधा है। गुरुद्वारे के सामने 100 से 150 छोटे वाहनों की पार्किंग हो सकती है, जबकि मिनी सचिवालय के समीप अधिवक्ताओं और कर्मचारियों के लिए करीब 50 वाहनों की सुविधा उपलब्ध है। विश्वकर्मा चौक के समीप सामुदायिक भवन में भी करीब 150 वाहनों की पार्किंग की योजना तैयार की गई है।
लोगों का कहना है कि शहर की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए भूमिगत और मल्टीलेवल पार्किंग का निर्माण समय की मांग बन गया है। यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले वर्षों में पांवटा साहिब को बड़े शहरों जैसी पार्किंग समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
शहर में पार्किंग समस्या के समाधान के लिए कुछ पार्किंग स्थल विकसित किए गए हैं। इसके अलावा भूमिगत पार्किंग योजना की डीपीआर शिमला भेजी गई है, लेकिन अभी तक इसके लिए बजट का प्रावधान नहीं हो पाया है।
-कंचन बाला, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद
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92 हजार पार पहुंची शहर में वाहनों की संख्या
भूमिगत और मल्टीलेवल पार्किंग की उठी मांग
सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। औद्योगिकीकरण और बढ़ते व्यापारीकरण के कारण पांवटा साहिब में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में आने वाले समय में शहर में पार्किंग की समस्या गंभीर रूप ले सकती है।
शहर से गुजरने वाले तीन राष्ट्रीय राजमार्गों, एमडीआर और संपर्क मार्गों पर हर साल हजारों छोटे-बड़े वाहन बढ़ रहे हैं। यदि समय रहते बड़े शहरों की तर्ज पर भूमिगत और बहुउद्देश्यीय पार्किंग की व्यवस्था नहीं की गई तो भविष्य में जाम और पार्किंग संकट बढ़ सकता है।
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नगर परिषद ने करीब चार वर्ष पहले शहर के लिए भूमिगत पार्किंग की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर निदेशक शहरी विकास विभाग, शिमला को मंजूरी के लिए भेजी थी, लेकिन अभी तक योजना को बजट नहीं मिल पाया है। आरएलए के आंकड़ों के अनुसार पांवटा साहिब में पंजीकृत वाहनों की संख्या 92 हजार के पार है। इनमें दोपहिया वाहनों की संख्या सबसे अधिक है। इसके अलावा मोटर कार, गुड्स कैरियर, व्यावसायिक ट्रैक्टर, मोपेड, बसें, कृषि ट्रैक्टर और निजी सेवा वाहनों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।
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शहर में पार्किंग की समस्या प्रमुख मुद्दा बन गई है। पहले सड़क किनारे बड़ी संख्या में वाहन खड़े हो जाते थे, लेकिन एनएच-7, एनएच-707 और एनएच-907 के फोरलेन निर्माण के बाद सड़क किनारे की करीब आधा दर्जन पार्किंग सुविधाएं समाप्त हो गई हैं। इससे शहर में पार्किंग का दबाव और बढ़ गया है। समाजसेवी आरपी तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता नंदलाल परवाल, मदन मोहन शर्मा, संजय कौशल, सुरजीत सिंह, मंजीत सिंह, एसएस गुप्ता, प्रदीप चौहान, एनएच चौहान, सुनील चौधरी, अतर सिंह और सीताराम ने बताया कि पुलिस मैदान के सामने टाइलनुमा और कच्ची पार्किंग में करीब 400 वाहन खड़े किए जा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि रामलीला मैदान में वकीलों और नगर परिषद कर्मियों के करीब 50 वाहनों की पार्किंग सुविधा है। गुरुद्वारे के सामने 100 से 150 छोटे वाहनों की पार्किंग हो सकती है, जबकि मिनी सचिवालय के समीप अधिवक्ताओं और कर्मचारियों के लिए करीब 50 वाहनों की सुविधा उपलब्ध है। विश्वकर्मा चौक के समीप सामुदायिक भवन में भी करीब 150 वाहनों की पार्किंग की योजना तैयार की गई है।
लोगों का कहना है कि शहर की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए भूमिगत और मल्टीलेवल पार्किंग का निर्माण समय की मांग बन गया है। यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले वर्षों में पांवटा साहिब को बड़े शहरों जैसी पार्किंग समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
शहर में पार्किंग समस्या के समाधान के लिए कुछ पार्किंग स्थल विकसित किए गए हैं। इसके अलावा भूमिगत पार्किंग योजना की डीपीआर शिमला भेजी गई है, लेकिन अभी तक इसके लिए बजट का प्रावधान नहीं हो पाया है।
-कंचन बाला, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद