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Sirmour News: सिरमौर में लंपी रोग के बाद से 30 से 40 फीसदी दुग्ध उत्पादन में गिरावट
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नाहन (सिरमौर)। सिरमौर जिले में लंपी रोग के बाद से दुग्ध उत्पादन में गिरावट आई है। रोग से संक्रमित होने के बाद पशुधन ने दूध देना कम कर दिया है। इसका बड़ा कारण संक्रमण के बाद पशुओं का कमजोर होना माना जा रहा है। जिले में 40 से 50 फीसदी दुग्ध उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है।
नाहन के कांशीवाला मिल्क प्लांट में भी इसका थोड़ा असर देखने को मिला है। प्लांट में एक से दो फीसदी दुग्ध कम हुआ है। यहां सोसायटियों के माध्यम से दूध पहुंचता है। पशुपालकों की मानें तो रोग से संक्रमित होने के बाद दूध उत्पादन कम हुआ है। जो मवेशी बीमार हुआ, स्वस्थ होने के बाद भी पहले जैसा दूध नहीं दे रहा है।
बनेठी के गौंथ गांव की निवासी माया देवी ने बताया कि पहले गाय दिन में 3 से 4 लीटर दूध देती थी, अब दो लीटर भी दूध मुश्किल से मिल रहा है। घुंड गांव के ओम प्रकाश, बनेठी के राकेश, बनाह के विनय आदि पशुपालकों के पशुधन में भी कमोबेश यही समस्या बनी है। पशुपालन विभाग भी इस बात को स्वीकार कर रहा है कि पशुधन में दुग्ध उत्पादन कम हुआ है।
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दूसरी तरफ जिले में लंपी रोग के मामलों में कमी जरूर आई है। बावजूद इसके पशुपालकों में लंपी रोग को लेकर खौफ अब भी बरकरार है। शहरी क्षेत्रों में दूध की डेयरियों में भी गाय की अपेक्षा भैंसों के दूध की बिक्री बढ़ी है। गाय का दूध 40 रुपये मिल रहा हैं, तो भैंस के दूध की बिक्री 50 रुपये किलो हो रही है। नाहन निवासी सुनीता, पूनम, सूरज, सीता आदि ने बताया कि लंपी रोग आने के बाद से या तो पैकेट बंद दूध का इस्तेमाल कर रहे हैं या फिर भैंस का दूध प्रयोग में ला रहे हैं। वहीं डेयरी संचालकों की भी मानें तो संक्रमण के बाद से पैकेट बंद या फिर भैंस के दूध की बिक्री बढ़ी है।
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पड़ोसी राज्य हरियाणा से भी दूध की आपूर्ति कम हुई
शहर में अधिकतर दूध की सप्लाई पड़ोसी राज्य हरियाणा से होती है। यहां भी दूध उत्पादन में कमी आई है। लिहाजा शहर में चल रही निजी डेयरियों में भी दूध की कम आपूर्ति हो रही है। 40 से 50 फीसदी दूध में कमी आई है। शहर के मदन डेयरी संचालक सुनील शर्मा का कहना है कि लंपी रोग से पहले हरियाणा से करीब 1 क्विंटल दूध की आपूर्ति होती थी, जो अब 40 से 50 प्रतिशत तक ही सिमटकर रह गई है। लंपी रोग के चलते भैंस के दूध की बिक्री अधिक बढ़ी है। कमोबेश यही स्थिति नाहन शहर सहित जिला की अन्य निजी डेयरियों की भी है।
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अब भी लंपी रोग के 1500 मामले सक्रिय, 2708 तोड़ चुके दम
हालांकि वर्तमान में जिले में लंपी रोग के मामलों में गिरावट आई है, लेकिन अब भी जिले में करीब 1,500 पशुधन इस रोग से ग्रस्त हैं यानी इतने मामले सक्रिय हैं। पिछले पांच महीनों में जिले में 16,000 से अधिक पशुधन लंपी रोग की चपेट में आ चुका हैं। बड़ी बात यह है कि 2,708 मवेशी भी इस रोग के चलते दम तोड़ चुके हैं।
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50,000 का हो चुका वैक्सीनेशन
पशुपालन विभाग की मानें तो जिले में अब तक करीब 50,000 मवेशियों की एलएसडी वैक्सीनेशन की जा चुकी हैं। जबकि करीब 90,000 एलएसडी वैक्सीनेशन जिले को ओर प्राप्त हुई है। मवेशियों की वैक्सीनेशन का कार्य जिले में जारी है।
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संक्रमण के मामलों में आई कमी : डॉ. शबनम
उपनिदेशक पशुपालन विभाग डॉ. नीरू शबनम ने बताया कि पशुओं में कमजोरी की वजह से दूध उत्पादन पर असर पड़ना लाजमी है। फिलहाल, लंपी रोग के मामलों में काफी कमी आई है। 3 से 4 मामले की प्रतिदिन सामने आ रहे हैं। वैक्सीनेशन जारी है।
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नाहन के कांशीवाला मिल्क प्लांट में भी इसका थोड़ा असर देखने को मिला है। प्लांट में एक से दो फीसदी दुग्ध कम हुआ है। यहां सोसायटियों के माध्यम से दूध पहुंचता है। पशुपालकों की मानें तो रोग से संक्रमित होने के बाद दूध उत्पादन कम हुआ है। जो मवेशी बीमार हुआ, स्वस्थ होने के बाद भी पहले जैसा दूध नहीं दे रहा है।
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बनेठी के गौंथ गांव की निवासी माया देवी ने बताया कि पहले गाय दिन में 3 से 4 लीटर दूध देती थी, अब दो लीटर भी दूध मुश्किल से मिल रहा है। घुंड गांव के ओम प्रकाश, बनेठी के राकेश, बनाह के विनय आदि पशुपालकों के पशुधन में भी कमोबेश यही समस्या बनी है। पशुपालन विभाग भी इस बात को स्वीकार कर रहा है कि पशुधन में दुग्ध उत्पादन कम हुआ है।
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दूसरी तरफ जिले में लंपी रोग के मामलों में कमी जरूर आई है। बावजूद इसके पशुपालकों में लंपी रोग को लेकर खौफ अब भी बरकरार है। शहरी क्षेत्रों में दूध की डेयरियों में भी गाय की अपेक्षा भैंसों के दूध की बिक्री बढ़ी है। गाय का दूध 40 रुपये मिल रहा हैं, तो भैंस के दूध की बिक्री 50 रुपये किलो हो रही है। नाहन निवासी सुनीता, पूनम, सूरज, सीता आदि ने बताया कि लंपी रोग आने के बाद से या तो पैकेट बंद दूध का इस्तेमाल कर रहे हैं या फिर भैंस का दूध प्रयोग में ला रहे हैं। वहीं डेयरी संचालकों की भी मानें तो संक्रमण के बाद से पैकेट बंद या फिर भैंस के दूध की बिक्री बढ़ी है।
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पड़ोसी राज्य हरियाणा से भी दूध की आपूर्ति कम हुई
शहर में अधिकतर दूध की सप्लाई पड़ोसी राज्य हरियाणा से होती है। यहां भी दूध उत्पादन में कमी आई है। लिहाजा शहर में चल रही निजी डेयरियों में भी दूध की कम आपूर्ति हो रही है। 40 से 50 फीसदी दूध में कमी आई है। शहर के मदन डेयरी संचालक सुनील शर्मा का कहना है कि लंपी रोग से पहले हरियाणा से करीब 1 क्विंटल दूध की आपूर्ति होती थी, जो अब 40 से 50 प्रतिशत तक ही सिमटकर रह गई है। लंपी रोग के चलते भैंस के दूध की बिक्री अधिक बढ़ी है। कमोबेश यही स्थिति नाहन शहर सहित जिला की अन्य निजी डेयरियों की भी है।
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अब भी लंपी रोग के 1500 मामले सक्रिय, 2708 तोड़ चुके दम
हालांकि वर्तमान में जिले में लंपी रोग के मामलों में गिरावट आई है, लेकिन अब भी जिले में करीब 1,500 पशुधन इस रोग से ग्रस्त हैं यानी इतने मामले सक्रिय हैं। पिछले पांच महीनों में जिले में 16,000 से अधिक पशुधन लंपी रोग की चपेट में आ चुका हैं। बड़ी बात यह है कि 2,708 मवेशी भी इस रोग के चलते दम तोड़ चुके हैं।
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50,000 का हो चुका वैक्सीनेशन
पशुपालन विभाग की मानें तो जिले में अब तक करीब 50,000 मवेशियों की एलएसडी वैक्सीनेशन की जा चुकी हैं। जबकि करीब 90,000 एलएसडी वैक्सीनेशन जिले को ओर प्राप्त हुई है। मवेशियों की वैक्सीनेशन का कार्य जिले में जारी है।
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संक्रमण के मामलों में आई कमी : डॉ. शबनम
उपनिदेशक पशुपालन विभाग डॉ. नीरू शबनम ने बताया कि पशुओं में कमजोरी की वजह से दूध उत्पादन पर असर पड़ना लाजमी है। फिलहाल, लंपी रोग के मामलों में काफी कमी आई है। 3 से 4 मामले की प्रतिदिन सामने आ रहे हैं। वैक्सीनेशन जारी है।