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हिमाचल की लोक संस्कृति विश्वभर में रखती है अलग पहचान : पठानिया
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राजगढ़ में बैसाखी मेले की अंतिम सांस्कृतिक संध्या में मौजूद मुख्यातिथि विस अध्यक्ष कुलदीप सि
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-जिला स्तरीय शिरगुल देवता बैसाखी मेले का समापन पर बोले प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष
-सांस्कृतिक संध्या में कलाकारों ने बांधा समा, हरियाणा के मुकेश पहलवान बने दंगल विजेता
-मुख्यातिथि ने स्मारिका का विमोचन किया, मेला कमेटी को एक लाख रुपये देन की घोषणा
संवाद न्यूज एजेंसी
राजगढ़ (सिरमौर)। जिला स्तरीय शिरगुल देवता बैसाखी मेले का समापन अंतिम सांस्कृतिक संध्या में पहाड़ी नाटियों, पंजाबी, हिंदी गीतों और भजनों की रंगारंग प्रस्तुतियों के साथ हुआ। कार्यक्रम में कलाकारों ने देर रात तक दर्शकों का मनोरंजन किया। समापन समारोह में विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया मुख्यातिथि रहे, जबकि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष जीआर मुसाफिर विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
विधानसभा अध्यक्ष ने शिरगुल महाराज को नमन करते हुए लोगों को मेले की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हिमाचल देवभूमि है और यहां की समृद्ध लोक संस्कृति विश्वभर में अपनी अलग पहचान रखती है। उन्होंने यह भी कहा कि विकास के मामले में हिमाचल पहाड़ी राज्यों में अग्रणी है। इस अवसर पर मुख्यातिथि ने मेला कमेटी की ओर से प्रकाशित स्मारिका का विमोचन किया। साथ ही कमेटी को एक लाख रुपये देने की घोषणा भी की।
अंतिम सांस्कृतिक संध्या में कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। अमित शांडिल्य ने नाटियों की प्रस्तुति दी, जबकि देवेंद्र ठाकुर ने पहाड़ी गीतों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर किया। सुदर्शन दिवाना ने भजन प्रस्तुत कर माहौल को भक्तिमय बना दिया। तनुजा चौहान, हरीश, मदन झालटा, रीता शर्मा, राजेश धालटा और गीता ने भी शानदार प्रस्तुतियां दीं।
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इसके अलावा नरेश, अनुराग पंवार, अशोक तोमर, सुरेश शर्मा, रमेश चंद और परवेश निहालटा ने भी अपनी गायकी से कार्यक्रम में रंग भरे। अंतिम प्रस्तुति में अजय चौहान और अंजू तोमर की जोड़ी ने लगातार नाटियां पेश कर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
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इनसेट-1
दंगल में मुकेश पहलवान बना विजेता
मेले के अंतिम दिन आयोजित विशाल दंगल में एक बार फिर दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी। दंगल में पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के विभिन्न अखाड़ों से करीब 150 पहलवानों ने भाग लेकर दमखम और कुश्ती कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। बड़ी माली के मुकाबले में हरियाणा के पहलवान मुकेश ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया, जबकि आशीष उपविजेता रहे। मुकेश को 51 हजार रुपये की नकद राशि प्रदान की गई। वहीं छोटी माली में शुभम विजेता और रजनीश उपविजेता रहे।
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इनसेट-2
रात्रि में हुआ मेले का विधिवत समापन, सराही गई पहल
इस बार बैसाखी मेले का विधिवत समापन पहली बार रात्रि के सांस्कृतिक कार्यक्रम में किया गया, जिसे लोगों ने सराहनीय पहल बताया। पहले मेले का समापन दिन में कुश्तियों के दौरान मुख्यातिथि के संबोधन के साथ किया जाता था, जबकि अंतिम सांस्कृतिक संध्या में अलग मुख्य अतिथि होता था। इतना ही नहीं, पहले कुश्तियों के बीच में मुख्यातिथि के भाषण के कारण मुकाबले बाधित होते थे, जिससे दर्शकों में नाराजगी रहती थी। इस बार कुश्तियां बिना किसी व्यवधान के जारी रहीं और समापन भी सांस्कृतिक संध्या में किया गया। लोगों ने इस निर्णय की सराहना करते हुए भविष्य में भी इस परंपरा को जारी रखने की मांग की है। संवाद
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-जिला स्तरीय शिरगुल देवता बैसाखी मेले का समापन पर बोले प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष
-सांस्कृतिक संध्या में कलाकारों ने बांधा समा, हरियाणा के मुकेश पहलवान बने दंगल विजेता
-मुख्यातिथि ने स्मारिका का विमोचन किया, मेला कमेटी को एक लाख रुपये देन की घोषणा
संवाद न्यूज एजेंसी
राजगढ़ (सिरमौर)। जिला स्तरीय शिरगुल देवता बैसाखी मेले का समापन अंतिम सांस्कृतिक संध्या में पहाड़ी नाटियों, पंजाबी, हिंदी गीतों और भजनों की रंगारंग प्रस्तुतियों के साथ हुआ। कार्यक्रम में कलाकारों ने देर रात तक दर्शकों का मनोरंजन किया। समापन समारोह में विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया मुख्यातिथि रहे, जबकि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष जीआर मुसाफिर विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
विधानसभा अध्यक्ष ने शिरगुल महाराज को नमन करते हुए लोगों को मेले की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हिमाचल देवभूमि है और यहां की समृद्ध लोक संस्कृति विश्वभर में अपनी अलग पहचान रखती है। उन्होंने यह भी कहा कि विकास के मामले में हिमाचल पहाड़ी राज्यों में अग्रणी है। इस अवसर पर मुख्यातिथि ने मेला कमेटी की ओर से प्रकाशित स्मारिका का विमोचन किया। साथ ही कमेटी को एक लाख रुपये देने की घोषणा भी की।
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अंतिम सांस्कृतिक संध्या में कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। अमित शांडिल्य ने नाटियों की प्रस्तुति दी, जबकि देवेंद्र ठाकुर ने पहाड़ी गीतों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर किया। सुदर्शन दिवाना ने भजन प्रस्तुत कर माहौल को भक्तिमय बना दिया। तनुजा चौहान, हरीश, मदन झालटा, रीता शर्मा, राजेश धालटा और गीता ने भी शानदार प्रस्तुतियां दीं।
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इसके अलावा नरेश, अनुराग पंवार, अशोक तोमर, सुरेश शर्मा, रमेश चंद और परवेश निहालटा ने भी अपनी गायकी से कार्यक्रम में रंग भरे। अंतिम प्रस्तुति में अजय चौहान और अंजू तोमर की जोड़ी ने लगातार नाटियां पेश कर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
इनसेट-1
दंगल में मुकेश पहलवान बना विजेता
मेले के अंतिम दिन आयोजित विशाल दंगल में एक बार फिर दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी। दंगल में पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के विभिन्न अखाड़ों से करीब 150 पहलवानों ने भाग लेकर दमखम और कुश्ती कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। बड़ी माली के मुकाबले में हरियाणा के पहलवान मुकेश ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया, जबकि आशीष उपविजेता रहे। मुकेश को 51 हजार रुपये की नकद राशि प्रदान की गई। वहीं छोटी माली में शुभम विजेता और रजनीश उपविजेता रहे।
इनसेट-2
रात्रि में हुआ मेले का विधिवत समापन, सराही गई पहल
इस बार बैसाखी मेले का विधिवत समापन पहली बार रात्रि के सांस्कृतिक कार्यक्रम में किया गया, जिसे लोगों ने सराहनीय पहल बताया। पहले मेले का समापन दिन में कुश्तियों के दौरान मुख्यातिथि के संबोधन के साथ किया जाता था, जबकि अंतिम सांस्कृतिक संध्या में अलग मुख्य अतिथि होता था। इतना ही नहीं, पहले कुश्तियों के बीच में मुख्यातिथि के भाषण के कारण मुकाबले बाधित होते थे, जिससे दर्शकों में नाराजगी रहती थी। इस बार कुश्तियां बिना किसी व्यवधान के जारी रहीं और समापन भी सांस्कृतिक संध्या में किया गया। लोगों ने इस निर्णय की सराहना करते हुए भविष्य में भी इस परंपरा को जारी रखने की मांग की है। संवाद

राजगढ़ में बैसाखी मेले की अंतिम सांस्कृतिक संध्या में मौजूद मुख्यातिथि विस अध्यक्ष कुलदीप सि

राजगढ़ में बैसाखी मेले की अंतिम सांस्कृतिक संध्या में मौजूद मुख्यातिथि विस अध्यक्ष कुलदीप सि

राजगढ़ में बैसाखी मेले की अंतिम सांस्कृतिक संध्या में मौजूद मुख्यातिथि विस अध्यक्ष कुलदीप सि