{"_id":"68457267bc455fe29d04faa3","slug":"ronhaat-bazar-development-nahan-news-c-177-1-ssml1028-152163-2025-06-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirmour News: इलेक्ट्राॅनिक्स और भवन सामग्री के लिए पहले लगती थी विकासनगर और पांवटा की दौड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirmour News: इलेक्ट्राॅनिक्स और भवन सामग्री के लिए पहले लगती थी विकासनगर और पांवटा की दौड़
विज्ञापन
हाट बाजार: आत्मा राम शर्मा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
-हाट बाजार/सचित्र
सड़कें बनते ही विकसित हुआ रोनहाट बाजार, मिलता है अब जरूरत का हर सामान
इलेक्ट्राॅनिक्स और भवन सामग्री के लिए पहले लगती थी विकासनगर और पांवटा की दौड़
गुजरे जमाने में ग्रामीण क्षेत्रों से किसान पीठ पर उठाकर बेचने के लिए रोनहाट लाते थे उत्पाद
1978 में बारिश से मीनस बाजार का नाम मिटने के बाद फलने फूलने लगा था रोनहाट बाजार
सुरेश शर्मा
रोनहाट (सिरमौर)। सिरमौर जिले के बेहद दुर्गम क्षेत्र रोनहाट कस्बे का बाजार दिन प्रतिदिन प्रगति पर अग्रसर है। इस बाजार में स्थानीय लोगों और आसपास के गांवों के लोगों को हर प्रकार की जरूरत का सामान मिल रहा है।
गुजरे जमाने में रोनहाट कस्बे में चुनिंदा दुकानें थीं, यहां पर खाने-पीने की ही वस्तुएं मिला करतीं थीं। इलेक्ट्राॅनिक्स सामान और भवन सामग्री की खरीदारी के लिए लोगों को बस पकड़कर विकासनगर या पांवटा साहिब जाना पड़ता था। इससे उनके समय और अतिरिक्त धन की हानि होती थी।
आज, रोनहाट बाजार का स्वरूप ही बदल गया है। यहां खाने-पीने से लेकर हर प्रकार के इलेक्ट्राॅनिक्स और भवन सामग्री से दुकानें सजी पड़ी हैं। रोनहाट कस्बे के बाजार की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। बताया जाता है कि साल 1975 में लोक निर्माण विभाग ने यहां सड़क बनाते समय पुल भी बनाया था। उस समय यहां इक्का-दुक्का दुकानें ही हुआ करती थीं।
विज्ञापन
साल 1978 में हुई तेज बारिश ने गिरिपार के मीनस बाजार का नाम ही मिटा दिया। यहां 15 से 20 दुकानें होती थीं। इनमें से अधिकतर सहारनपुर और विकासनगर क्षेत्र के दुकानदार थे। इनमें से कुछ वापस चले गए और कई दुकानदार रोनहाट में ही दुकानें करने लगे।
उस जमाने में रोनहाट की चुनिंदा दुकानों पर आसपास के कई गांवों के लोग निर्भर थे। गत्ताधार का सांगना, भलाड भलोना, नाया-पंजोड़, नैनीधार, कोटी-बौंच, जिला शिमला का धार चांदना क्षेत्र, उत्तराखंड का जौनसार क्षेत्र के ग्रामीण यहीं पर जरूरत का सामान खरीदने और अपनी फसल बेचने के लिए आते थे।
ग्रामीण अपने उत्पाद पीठ पर या खच्चरों पर यहां लाकर बेचते थे। इनमें मुख्य रूप से धान, अदरक, मिर्च, दालें, मक्की, आलू जैसी फसल प्रमुख थी। ग्रामीण ये उत्पाद यहां बेचते और अपने लिए खाद्य सामग्री और दवाएं आदि लेकर चलते जाते। गेहूं पीसने के लिए घराटों के पानी का उपयोग किया जाता। उस समय मूलभूत सुविधाएं नहीं थी, संपर्क सड़कों का भी निर्माण नहीं हुआ था।
ऐसे में ग्रामीण पैदल रोनहाट आते और पांवटा के लिए बस पकड़ते। पांवटा से वह भवन सामग्री खरीदते और पड़ोसी राज्य के विकासनगर से इलेक्ट्रानिक्स उत्पाद।
आज रोनहाट बाजार इतना अधिक विकसित हो गया है कि लोगों को हर प्रकार के इलेक्ट्राॅनिक्स उत्पाद जिनमें टेलीविजन, फ्रिज, रेडिमेड कपड़े, शूज समेत फर्नीचर, सोफा सेट, अलमीरा, भवन सामग्री, ईंट, सरिया, रंग, सीमेंट, शीशा यहीं मिल रहे हैं। इसके अलावा खाद्य सामग्री, नाई, टेलर, मिठाई, स्वास्थ्य सुविधाएं, कृषि संबंधी दवाइयां भी यहीं मिल रही हैं। रोनहाट में शिक्षण, स्वास्थ्य, विभिन्न सरकारी विभागों के कार्यालय खुलने से भी यहां का बाजार खूब फल-फूल रहा है।
-- -- बाक्स
1. अब विकासनगर नहीं जाना पड़ता, यहीं मिलता है पूरा सामान
स्थानीय दुकानदार रमेश चौहान ने बताया कि लोगों को मोबाइल फोन, टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन, पंखों के लिए पांवटा और विकासनगर नहीं जाना पड़ता। यह सामग्री अब लोगों को रोनहाट बाजार में ही आसानी से मिल रही है।
2. पहले पांवटा बाजार पर ही थे हम निर्भर
वरिष्ठ नागरिक चेतराम शर्मा ने कहा कि पहले यहां के लोग भवन निर्माण सामग्री के लिए पांवटा बाजार पर निर्भर थे। मीलों दूर जाने में समय और अतिरिक्त धन की हानि होती थी। अब रोनहाट बाजार में ही यह सामग्री मिल रही है।
3. ग्राहकों को हर सामान उपलब्ध करवा रहा बाजार
दुकानदार आत्माराम शर्मा ने कहा कि लोगों को अब फर्नीचर, सोफा सेट, अलमीरा के लिए बाहरी बाजारों पर निर्भर नहीं रहता पड़ता। ये सामग्री भी अब लोगों को रोनहाट बाजार में ही उपलब्ध है। लोग अपनी मनपसंद डिजाइन की सामग्री यहीं से खरीद रहे हैं।
4. सड़क सुविधा से मिला बाजार को बूस्ट
स्थानीय सूरत राम शर्मा ने कहा कि पहले संपर्क मार्गों और परिवहन सुविधाओं का अभाव था। इसके कारण लोगों को रोनहाट पहुंचने में परेशानी होती थी, बाजार भी सीमित था। इन सुविधाओं के बढ़ने से रोनहाट बाजार खूब विकसित हुआ है और यहां पर हर सामान उपलब्ध है।
-- -- संवाद
विज्ञापन
सड़कें बनते ही विकसित हुआ रोनहाट बाजार, मिलता है अब जरूरत का हर सामान
इलेक्ट्राॅनिक्स और भवन सामग्री के लिए पहले लगती थी विकासनगर और पांवटा की दौड़
गुजरे जमाने में ग्रामीण क्षेत्रों से किसान पीठ पर उठाकर बेचने के लिए रोनहाट लाते थे उत्पाद
1978 में बारिश से मीनस बाजार का नाम मिटने के बाद फलने फूलने लगा था रोनहाट बाजार
सुरेश शर्मा
रोनहाट (सिरमौर)। सिरमौर जिले के बेहद दुर्गम क्षेत्र रोनहाट कस्बे का बाजार दिन प्रतिदिन प्रगति पर अग्रसर है। इस बाजार में स्थानीय लोगों और आसपास के गांवों के लोगों को हर प्रकार की जरूरत का सामान मिल रहा है।
गुजरे जमाने में रोनहाट कस्बे में चुनिंदा दुकानें थीं, यहां पर खाने-पीने की ही वस्तुएं मिला करतीं थीं। इलेक्ट्राॅनिक्स सामान और भवन सामग्री की खरीदारी के लिए लोगों को बस पकड़कर विकासनगर या पांवटा साहिब जाना पड़ता था। इससे उनके समय और अतिरिक्त धन की हानि होती थी।
विज्ञापन
आज, रोनहाट बाजार का स्वरूप ही बदल गया है। यहां खाने-पीने से लेकर हर प्रकार के इलेक्ट्राॅनिक्स और भवन सामग्री से दुकानें सजी पड़ी हैं। रोनहाट कस्बे के बाजार की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। बताया जाता है कि साल 1975 में लोक निर्माण विभाग ने यहां सड़क बनाते समय पुल भी बनाया था। उस समय यहां इक्का-दुक्का दुकानें ही हुआ करती थीं।
विज्ञापन
साल 1978 में हुई तेज बारिश ने गिरिपार के मीनस बाजार का नाम ही मिटा दिया। यहां 15 से 20 दुकानें होती थीं। इनमें से अधिकतर सहारनपुर और विकासनगर क्षेत्र के दुकानदार थे। इनमें से कुछ वापस चले गए और कई दुकानदार रोनहाट में ही दुकानें करने लगे।
उस जमाने में रोनहाट की चुनिंदा दुकानों पर आसपास के कई गांवों के लोग निर्भर थे। गत्ताधार का सांगना, भलाड भलोना, नाया-पंजोड़, नैनीधार, कोटी-बौंच, जिला शिमला का धार चांदना क्षेत्र, उत्तराखंड का जौनसार क्षेत्र के ग्रामीण यहीं पर जरूरत का सामान खरीदने और अपनी फसल बेचने के लिए आते थे।
ग्रामीण अपने उत्पाद पीठ पर या खच्चरों पर यहां लाकर बेचते थे। इनमें मुख्य रूप से धान, अदरक, मिर्च, दालें, मक्की, आलू जैसी फसल प्रमुख थी। ग्रामीण ये उत्पाद यहां बेचते और अपने लिए खाद्य सामग्री और दवाएं आदि लेकर चलते जाते। गेहूं पीसने के लिए घराटों के पानी का उपयोग किया जाता। उस समय मूलभूत सुविधाएं नहीं थी, संपर्क सड़कों का भी निर्माण नहीं हुआ था।
ऐसे में ग्रामीण पैदल रोनहाट आते और पांवटा के लिए बस पकड़ते। पांवटा से वह भवन सामग्री खरीदते और पड़ोसी राज्य के विकासनगर से इलेक्ट्रानिक्स उत्पाद।
आज रोनहाट बाजार इतना अधिक विकसित हो गया है कि लोगों को हर प्रकार के इलेक्ट्राॅनिक्स उत्पाद जिनमें टेलीविजन, फ्रिज, रेडिमेड कपड़े, शूज समेत फर्नीचर, सोफा सेट, अलमीरा, भवन सामग्री, ईंट, सरिया, रंग, सीमेंट, शीशा यहीं मिल रहे हैं। इसके अलावा खाद्य सामग्री, नाई, टेलर, मिठाई, स्वास्थ्य सुविधाएं, कृषि संबंधी दवाइयां भी यहीं मिल रही हैं। रोनहाट में शिक्षण, स्वास्थ्य, विभिन्न सरकारी विभागों के कार्यालय खुलने से भी यहां का बाजार खूब फल-फूल रहा है।
1. अब विकासनगर नहीं जाना पड़ता, यहीं मिलता है पूरा सामान
स्थानीय दुकानदार रमेश चौहान ने बताया कि लोगों को मोबाइल फोन, टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन, पंखों के लिए पांवटा और विकासनगर नहीं जाना पड़ता। यह सामग्री अब लोगों को रोनहाट बाजार में ही आसानी से मिल रही है।
2. पहले पांवटा बाजार पर ही थे हम निर्भर
वरिष्ठ नागरिक चेतराम शर्मा ने कहा कि पहले यहां के लोग भवन निर्माण सामग्री के लिए पांवटा बाजार पर निर्भर थे। मीलों दूर जाने में समय और अतिरिक्त धन की हानि होती थी। अब रोनहाट बाजार में ही यह सामग्री मिल रही है।
3. ग्राहकों को हर सामान उपलब्ध करवा रहा बाजार
दुकानदार आत्माराम शर्मा ने कहा कि लोगों को अब फर्नीचर, सोफा सेट, अलमीरा के लिए बाहरी बाजारों पर निर्भर नहीं रहता पड़ता। ये सामग्री भी अब लोगों को रोनहाट बाजार में ही उपलब्ध है। लोग अपनी मनपसंद डिजाइन की सामग्री यहीं से खरीद रहे हैं।
4. सड़क सुविधा से मिला बाजार को बूस्ट
स्थानीय सूरत राम शर्मा ने कहा कि पहले संपर्क मार्गों और परिवहन सुविधाओं का अभाव था। इसके कारण लोगों को रोनहाट पहुंचने में परेशानी होती थी, बाजार भी सीमित था। इन सुविधाओं के बढ़ने से रोनहाट बाजार खूब विकसित हुआ है और यहां पर हर सामान उपलब्ध है।

हाट बाजार: आत्मा राम शर्मा।

हाट बाजार: आत्मा राम शर्मा।

हाट बाजार: आत्मा राम शर्मा।

हाट बाजार: आत्मा राम शर्मा।

हाट बाजार: आत्मा राम शर्मा।

हाट बाजार: आत्मा राम शर्मा।