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Sirmour News: भरत के त्याग को देख रो पड़ी अयोध्या
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ददाहू के गीता भवन में आयोजित राम कथा का लुत्फ उठाती महिलाएं। संवाद
सचित्र--
सचित्र--
ददाहू में राम वनवास प्रसंग सुन भावुक हुईं महिलाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)।श्रावण मास के पावन उपलक्ष्य पर गीता भवन ददाहू में आयोजित संगीतमय श्री राम कथा के पांचवें दिन वनवास के मार्मिक प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा में विशेष रूप से पहुंची महिला श्रद्धालुओं की आंखें उस वक्त नम हो गई, जब कथा व्यास ने भाई भरत के अटूट प्रेम और मर्यादा का वर्णन किया। पूरा पंडाल प्रभु श्री राम और माता सीता के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
कथा व्यास पंडित राजन शांडिल्य ने भावुक कर देने वाले प्रसंग को बढ़ाते हुए कहा कि महाराज दशरथ ने रानी कैकेयी को दिए वचनों को निभाने के लिए भारी मन से अपने प्राणों से प्रिय पुत्र राम को 14 वर्ष का वनवास दे दिया। मर्यादा पुरुषोत्तम राम के साथ माता सीता और भाई लक्ष्मण भी वन को चले गए। कथा व्यास ने बताया कि जब भरत को इस बात का पता चला, तो उन्होंने राजपाठ और सिंहासन को ठुकरा कर भाईचारे की अनूठी मिसाल पेश की। भरत ने स्वयं भी महल छोड़कर वन में कुटिया बनाकर रहने का फैसला किया।
भरत की इस अगाध ममता, उदारता और त्याग को देखकर पूरी अयोध्या नगरी चकित रह गई। इस दृश्य को सुन पंडाल में बैठी माताएं और बहनें अपने आंसू नहीं रोक पाई।
इस धार्मिक अनुष्ठान में महिलाएं न केवल बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं, बल्कि वे परिवार और समाज के कल्याण के लिए बढ़-चढ़कर भजन-कीर्तन का आनंद भी उठा रही हैं। कथा का यह भव्य और भक्तिमय आयोजन 22 जुलाई तक जारी रहेगा, जिसमें हर दिन प्रभु चरित्र के नए और प्रेरणादायक रूपों के दर्शन श्रद्धालुओं को करने को मिलेंगे।-- -- -- --
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ददाहू में राम वनवास प्रसंग सुन भावुक हुईं महिलाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)।श्रावण मास के पावन उपलक्ष्य पर गीता भवन ददाहू में आयोजित संगीतमय श्री राम कथा के पांचवें दिन वनवास के मार्मिक प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा में विशेष रूप से पहुंची महिला श्रद्धालुओं की आंखें उस वक्त नम हो गई, जब कथा व्यास ने भाई भरत के अटूट प्रेम और मर्यादा का वर्णन किया। पूरा पंडाल प्रभु श्री राम और माता सीता के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
कथा व्यास पंडित राजन शांडिल्य ने भावुक कर देने वाले प्रसंग को बढ़ाते हुए कहा कि महाराज दशरथ ने रानी कैकेयी को दिए वचनों को निभाने के लिए भारी मन से अपने प्राणों से प्रिय पुत्र राम को 14 वर्ष का वनवास दे दिया। मर्यादा पुरुषोत्तम राम के साथ माता सीता और भाई लक्ष्मण भी वन को चले गए। कथा व्यास ने बताया कि जब भरत को इस बात का पता चला, तो उन्होंने राजपाठ और सिंहासन को ठुकरा कर भाईचारे की अनूठी मिसाल पेश की। भरत ने स्वयं भी महल छोड़कर वन में कुटिया बनाकर रहने का फैसला किया।
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भरत की इस अगाध ममता, उदारता और त्याग को देखकर पूरी अयोध्या नगरी चकित रह गई। इस दृश्य को सुन पंडाल में बैठी माताएं और बहनें अपने आंसू नहीं रोक पाई।
इस धार्मिक अनुष्ठान में महिलाएं न केवल बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं, बल्कि वे परिवार और समाज के कल्याण के लिए बढ़-चढ़कर भजन-कीर्तन का आनंद भी उठा रही हैं। कथा का यह भव्य और भक्तिमय आयोजन 22 जुलाई तक जारी रहेगा, जिसमें हर दिन प्रभु चरित्र के नए और प्रेरणादायक रूपों के दर्शन श्रद्धालुओं को करने को मिलेंगे।
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