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Sirmour News: एनएच-707 निर्माण में लापरवाही का आरोप, मुआवजे के लिए भटक रहे कमरऊ के ग्रामीण
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कमरऊ गांव में एनएच -707 निर्माण को खोदाई के दौरान बर्बाद कर दिया गया उपजाऊ खेत व कोने लगी बुर्
गलत कटिंग से तीन परिवारों की 17 बिस्वा भूमि तबाह, आश्वासन के बावजूद नहीं मिली क्षतिपूर्ति
कार्रवाई की मांग को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और प्रदेश सरकार को भेजा पत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
पांवटा साहिब (सिरमौर)। पांवटा साहिब-शिलाई-गुम्मा राष्ट्रीय राजमार्ग-707 के निर्माण कार्य के दौरान कथित लापरवाही से निजी भूमि को हुए नुकसान के बाद प्रभावित परिवार मुआवजे के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। ग्राम पंचायत कमरऊ के ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि एनएच निर्माण के दौरान गलत कटिंग से तीन परिवारों की करीब 17 बिस्वा भूमि बर्बाद हो गई, लेकिन अब तक उन्हें कोई मुआवजा नहीं मिला है।
नाराज ग्रामीणों ने मामले की शिकायत केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और प्रदेश सरकार को भेजकर जांच और कार्रवाई की मांग उठाई है। ग्रामीणों दीपचंद तोमर, मेहर सिंह, दौलत राम, ध्यान सिंह, मुंशी राम और सुरेश राणा ने बताया कि वर्ष 2025 में कमरऊ के मुनाणा क्षेत्र में एनएच-707 के निर्माण कार्य के दौरान नालका के समीप निजी भूमि पर गलत तरीके से कटिंग कर दी गई। इससे एक परिवार का उपजाऊ खेत पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि आसपास के रिहायशी मकानों और मंदिर को भी खतरा पैदा हो गया था।
ग्रामीणों का आरोप है कि मामले के बाद प्रशासन, राजस्व विभाग, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ) और प्रभावित परिवारों की संयुक्त बैठक हुई थी। बैठक में अधिकारियों ने डिमार्केशन के बाद भूमि क्षति का आकलन कर मुआवजा देने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद आज तक प्रभावितों को कोई राहत नहीं मिली।
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उन्होंने बताया कि मेहर सिंह, दीपचंद तोमर और रामभज तोमर परिवार की करीब 12 बिस्वा, दौलत राम और मुंशी राम की चार बिस्वा व ध्यान सिंह की एक बिस्वा भूमि निर्माण कार्य की भेंट चढ़ गई। आरोप है कि बाद में सॉयल एवं रॉक एंकरिंग कार्य के दौरान बची हुई भूमि को भी नुकसान पहुंचाया गया। प्रभावित परिवार जिलाधीश सिरमौर, एसडीएम कफोटा और तहसीलदार कमरऊ को शिकायतें सौंप चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों के अनुसार एनएच के लिए अधिग्रहित भूमि की सीमाएं पहले से चिन्हित थीं और बुर्जियां भी लगी हुई थीं। इसके बावजूद निर्माण एजेंसी ने निर्धारित सीमा से बाहर कटिंग शुरू कर दी, जिससे खेतों को भारी नुकसान पहुंचा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कटिंग निर्धारित क्षेत्र तक सीमित रहती तो उपजाऊ भूमि को नुकसान नहीं पहुंचता।
एसडीएम कफोटा रमन शर्मा ने बताया कि मामले से संबंधित फाइल मोर्थ के पांवटा साहिब कार्यालय को भेजी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि विभाग को अब इस संबंध में रिमाइंडर भी भेजा जा रहा है, ताकि प्रभावित परिवारों के मामले में आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
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कार्रवाई की मांग को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और प्रदेश सरकार को भेजा पत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
पांवटा साहिब (सिरमौर)। पांवटा साहिब-शिलाई-गुम्मा राष्ट्रीय राजमार्ग-707 के निर्माण कार्य के दौरान कथित लापरवाही से निजी भूमि को हुए नुकसान के बाद प्रभावित परिवार मुआवजे के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। ग्राम पंचायत कमरऊ के ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि एनएच निर्माण के दौरान गलत कटिंग से तीन परिवारों की करीब 17 बिस्वा भूमि बर्बाद हो गई, लेकिन अब तक उन्हें कोई मुआवजा नहीं मिला है।
नाराज ग्रामीणों ने मामले की शिकायत केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और प्रदेश सरकार को भेजकर जांच और कार्रवाई की मांग उठाई है। ग्रामीणों दीपचंद तोमर, मेहर सिंह, दौलत राम, ध्यान सिंह, मुंशी राम और सुरेश राणा ने बताया कि वर्ष 2025 में कमरऊ के मुनाणा क्षेत्र में एनएच-707 के निर्माण कार्य के दौरान नालका के समीप निजी भूमि पर गलत तरीके से कटिंग कर दी गई। इससे एक परिवार का उपजाऊ खेत पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि आसपास के रिहायशी मकानों और मंदिर को भी खतरा पैदा हो गया था।
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ग्रामीणों का आरोप है कि मामले के बाद प्रशासन, राजस्व विभाग, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ) और प्रभावित परिवारों की संयुक्त बैठक हुई थी। बैठक में अधिकारियों ने डिमार्केशन के बाद भूमि क्षति का आकलन कर मुआवजा देने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद आज तक प्रभावितों को कोई राहत नहीं मिली।
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उन्होंने बताया कि मेहर सिंह, दीपचंद तोमर और रामभज तोमर परिवार की करीब 12 बिस्वा, दौलत राम और मुंशी राम की चार बिस्वा व ध्यान सिंह की एक बिस्वा भूमि निर्माण कार्य की भेंट चढ़ गई। आरोप है कि बाद में सॉयल एवं रॉक एंकरिंग कार्य के दौरान बची हुई भूमि को भी नुकसान पहुंचाया गया। प्रभावित परिवार जिलाधीश सिरमौर, एसडीएम कफोटा और तहसीलदार कमरऊ को शिकायतें सौंप चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों के अनुसार एनएच के लिए अधिग्रहित भूमि की सीमाएं पहले से चिन्हित थीं और बुर्जियां भी लगी हुई थीं। इसके बावजूद निर्माण एजेंसी ने निर्धारित सीमा से बाहर कटिंग शुरू कर दी, जिससे खेतों को भारी नुकसान पहुंचा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कटिंग निर्धारित क्षेत्र तक सीमित रहती तो उपजाऊ भूमि को नुकसान नहीं पहुंचता।
एसडीएम कफोटा रमन शर्मा ने बताया कि मामले से संबंधित फाइल मोर्थ के पांवटा साहिब कार्यालय को भेजी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि विभाग को अब इस संबंध में रिमाइंडर भी भेजा जा रहा है, ताकि प्रभावित परिवारों के मामले में आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

कमरऊ गांव में एनएच -707 निर्माण को खोदाई के दौरान बर्बाद कर दिया गया उपजाऊ खेत व कोने लगी बुर्