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Sirmour News: देवदार के जब्त 29 स्लीपरों को छोड़ने की याचिका अदालत में खारिज
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साल 2021 में शिलाई क्षेत्र का मामला, आरोपी को तीन पेड़ आरक्षित वन से काटने के मामले में नहीं मिली राहत
संवाद न्यूज़ एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। आरक्षित वन क्षेत्र से अवैध कटान मामले में जब्त देवदार लकड़ी के 29 स्लीपरों को छोड़ने की याचिका न्यायिक दंडाधिकारी विकास कपूर की अदालत ने खारिज कर दी। कांशी राम ने अदालत में आवेदन दायर कर कहा था कि उसने अपने निजी भूमि क्षेत्र से मकान निर्माण के लिए दो देवदार के पेड़ काटे थे, जिनसे 62 स्लीपर तैयार किए गए। इनमें से 33 स्लीपर पहले ही सुपुर्दगी पर उसे दिए जा चुके हैं, जबकि शेष 29 स्लीपर वन चौकी खलांडो के कब्जे में हैं। आरोपी ने अदालत से सभी 62 स्लीपर देने की मांग की थी।
पुलिस और वन विभाग ने अदालत में जवाब दाखिल कर बताया कि वर्ष 2021 में आरक्षित वन खलांडो सी-2 में पांच देवदार के पेड़ों के अवैध कटान का मामला सामने आया था। जांच और सीमांकन में पता चला कि दो पेड़ आरोपी की निजी भूमि से और तीन पेड़ सरकारी आरक्षित वन क्षेत्र से काटे गए थे। मामले में आईपीसी की धारा 379 और भारतीय वन अधिनियम की धारा 26 के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
वन विभाग ने अदालत को बताया कि मौके से कुल 125 देवदार स्लीपर और 10 लट्ठे बरामद किए गए थे। विभागीय वॉल्यूम चार्ट के अनुसार आरोपी की निजी भूमि से काटे गए दो पेड़ों की लकड़ी का अनुमानित आयतन 2.8316 घन मीटर था, जबकि आरोपी के घर से मिले 62 स्लीपरों का आयतन 4.0208 घन मीटर पाया गया। इससे संदेह है कि अतिरिक्त लकड़ी आरक्षित वन क्षेत्र से काटे गए पेड़ों की हो सकती है।
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अदालत ने आदेश में कहा कि फिलहाल यह साबित होना बाकी है कि आरोपी ने निजी भूमि से पेड़ वैध अनुमति के तहत काटे थे या नहीं। वहीं शेष 29 स्लीपरों पर वन विभाग ने सरकारी वन क्षेत्र से अवैध कटान का दावा किया है। ऐसे में मामले की सुनवाई पूरी होने से पहले लकड़ी आरोपी को सौंपना उचित नहीं होगा। अदालत ने कहा कि लकड़ी केस प्रॉपर्टी है और उसे साक्ष्य के रूप में अदालत में पेश किया जाना आवश्यक है। इसी आधार पर आरोपी की याचिका खारिज कर दी गई।
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संवाद न्यूज़ एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। आरक्षित वन क्षेत्र से अवैध कटान मामले में जब्त देवदार लकड़ी के 29 स्लीपरों को छोड़ने की याचिका न्यायिक दंडाधिकारी विकास कपूर की अदालत ने खारिज कर दी। कांशी राम ने अदालत में आवेदन दायर कर कहा था कि उसने अपने निजी भूमि क्षेत्र से मकान निर्माण के लिए दो देवदार के पेड़ काटे थे, जिनसे 62 स्लीपर तैयार किए गए। इनमें से 33 स्लीपर पहले ही सुपुर्दगी पर उसे दिए जा चुके हैं, जबकि शेष 29 स्लीपर वन चौकी खलांडो के कब्जे में हैं। आरोपी ने अदालत से सभी 62 स्लीपर देने की मांग की थी।
पुलिस और वन विभाग ने अदालत में जवाब दाखिल कर बताया कि वर्ष 2021 में आरक्षित वन खलांडो सी-2 में पांच देवदार के पेड़ों के अवैध कटान का मामला सामने आया था। जांच और सीमांकन में पता चला कि दो पेड़ आरोपी की निजी भूमि से और तीन पेड़ सरकारी आरक्षित वन क्षेत्र से काटे गए थे। मामले में आईपीसी की धारा 379 और भारतीय वन अधिनियम की धारा 26 के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
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वन विभाग ने अदालत को बताया कि मौके से कुल 125 देवदार स्लीपर और 10 लट्ठे बरामद किए गए थे। विभागीय वॉल्यूम चार्ट के अनुसार आरोपी की निजी भूमि से काटे गए दो पेड़ों की लकड़ी का अनुमानित आयतन 2.8316 घन मीटर था, जबकि आरोपी के घर से मिले 62 स्लीपरों का आयतन 4.0208 घन मीटर पाया गया। इससे संदेह है कि अतिरिक्त लकड़ी आरक्षित वन क्षेत्र से काटे गए पेड़ों की हो सकती है।
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अदालत ने आदेश में कहा कि फिलहाल यह साबित होना बाकी है कि आरोपी ने निजी भूमि से पेड़ वैध अनुमति के तहत काटे थे या नहीं। वहीं शेष 29 स्लीपरों पर वन विभाग ने सरकारी वन क्षेत्र से अवैध कटान का दावा किया है। ऐसे में मामले की सुनवाई पूरी होने से पहले लकड़ी आरोपी को सौंपना उचित नहीं होगा। अदालत ने कहा कि लकड़ी केस प्रॉपर्टी है और उसे साक्ष्य के रूप में अदालत में पेश किया जाना आवश्यक है। इसी आधार पर आरोपी की याचिका खारिज कर दी गई।