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कालाअंब में बुनियादी सुविधाएं नहीं, जनता परेशान
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कालाअंब (सिरमौर)। औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में भले ही विकास के लाख दावे किए जा रहे हों लेकिन कालाअंब आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। आम जनता के लिए कालाअंब में कोई बुनियादी सुविधा नजर नहीं आती है।
पिछले दो दशकों से औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने के बाद सरकार को लाखों-करोड़ों रुपये का सालाना राजस्व देने वाली औद्योगिक नगरी कालाअंब को आज भी बुनियादी सुविधाओं की दरकार है। आखिर दो दशकों से आम जनता को बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं मिल पाई ये सबसे अहम सवाल है। हालांकि कालाअंब में ग्राम पंचायत के सौजन्य से खुले आसमान के नीचे यात्रियों के बैठने के लिए दो बैंच लगाए गए हैं लेकिन वर्षाशालिका की व्यवस्था आज तक नहीं हो पाई।
दूसरी मुख्य समस्या पीने के पानी की है। प्रदेश के प्रवेश द्वार पर आगंतुकों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। यात्रियों को पानी भी खरीदकर पीना पड़ता है। वहीं यहां सार्वजनिक शौचालय भी नहीं है। हालांकि इसके निर्माण को लेकर ग्राम पंचायत ने पहल की है। इसके निर्माण से संबंधित कागजी प्रक्रिया चल रही है।
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स्थानीय निवासी संजय कुमार, रमन, विवेक, अरुण कुमार, राजकुमार, सुशील कुमार, विनोद कुमार, सुमन देवी, तमन्ना, दीपांशु और सुरेखा शर्मा आदि ने बताया कि चिलचिलाती धूप हो या बारिश का मौसम यात्रियों के बैठने की कोई व्यवस्था नहीं है। न ही पीने के पानी की कोई व्यवस्था है। लगभग पंद्रह साल पहले कालाअंब चौक पर एक हैंडपंप हुआ करता था जिसका अस्तित्व मिट चुका है। यात्रियों को पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। सरकार और प्रशासन या जनप्रतिनिधियों का दायित्व बनता है कि कालाअंब में जनता को उपरोक्त बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने को प्राथमिकता दें।
ग्राम पंचायत कालाअंब की प्रधान रेखा चौधरी ने बताया कि कालाअंब में जनता को शौचालय, पीने का पानी और वर्षाशालिका इत्यादि बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए पंचायत की ओर से भरसक प्रयास किए जा रहे हैं। प्रथम चरण में शौचालय निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराने को लेकर पशुपालन विभाग से पत्राचार किया जा रहा है। दूसरे चरण में वर्षाशालिका और पीने के पानी की व्यवस्था से संबंधित प्रस्ताव संबंधित विभागों को भेजा जाएगा।
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पिछले दो दशकों से औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने के बाद सरकार को लाखों-करोड़ों रुपये का सालाना राजस्व देने वाली औद्योगिक नगरी कालाअंब को आज भी बुनियादी सुविधाओं की दरकार है। आखिर दो दशकों से आम जनता को बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं मिल पाई ये सबसे अहम सवाल है। हालांकि कालाअंब में ग्राम पंचायत के सौजन्य से खुले आसमान के नीचे यात्रियों के बैठने के लिए दो बैंच लगाए गए हैं लेकिन वर्षाशालिका की व्यवस्था आज तक नहीं हो पाई।
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दूसरी मुख्य समस्या पीने के पानी की है। प्रदेश के प्रवेश द्वार पर आगंतुकों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। यात्रियों को पानी भी खरीदकर पीना पड़ता है। वहीं यहां सार्वजनिक शौचालय भी नहीं है। हालांकि इसके निर्माण को लेकर ग्राम पंचायत ने पहल की है। इसके निर्माण से संबंधित कागजी प्रक्रिया चल रही है।
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स्थानीय निवासी संजय कुमार, रमन, विवेक, अरुण कुमार, राजकुमार, सुशील कुमार, विनोद कुमार, सुमन देवी, तमन्ना, दीपांशु और सुरेखा शर्मा आदि ने बताया कि चिलचिलाती धूप हो या बारिश का मौसम यात्रियों के बैठने की कोई व्यवस्था नहीं है। न ही पीने के पानी की कोई व्यवस्था है। लगभग पंद्रह साल पहले कालाअंब चौक पर एक हैंडपंप हुआ करता था जिसका अस्तित्व मिट चुका है। यात्रियों को पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। सरकार और प्रशासन या जनप्रतिनिधियों का दायित्व बनता है कि कालाअंब में जनता को उपरोक्त बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने को प्राथमिकता दें।
ग्राम पंचायत कालाअंब की प्रधान रेखा चौधरी ने बताया कि कालाअंब में जनता को शौचालय, पीने का पानी और वर्षाशालिका इत्यादि बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए पंचायत की ओर से भरसक प्रयास किए जा रहे हैं। प्रथम चरण में शौचालय निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराने को लेकर पशुपालन विभाग से पत्राचार किया जा रहा है। दूसरे चरण में वर्षाशालिका और पीने के पानी की व्यवस्था से संबंधित प्रस्ताव संबंधित विभागों को भेजा जाएगा।