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Sirmour News: आलाप में जरिये राग विस्तार और लयकारी की बारीकियों पर डाला प्रकाश
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बड़ू साहिब इटरनल विश्वविद्यालय में विशेष संगीत कार्यशाला का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
राजगढ़ (सिरमौर)। इटरनल विश्वविद्यालय बड़ू साहिब के अकाल कॉलेज ऑफ डिवाइन म्यूजिक एंड स्पिरिचुअलिज्म में आर्ट ऑफ राग.., प्रेजेंटेशन इन ओपन आलाप, तोड़ा एंड लयकारी.., विषय पर एक विशेष संगीत कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में डॉ. ओम शर्मा, सहायक प्रोफेसर, संगीत (वाद्य संगीत), राजा वीरभद्र सिंह राजकीय महाविद्यालय, सीमा (रोहड़ू) ने रिसोर्स पर्सन के रूप में भाग लिया।
कार्यशाला के शुभारंभ पर डीन डॉ. पूर्वी लुनियाल ने डॉ. ओम शर्मा का स्वागत किया और उन्हें सम्मानस्वरूप शॉल और पुष्पगुच्छ भेंट किया।
कार्यशाला के दौरान डॉ. ओम शर्मा ने खुले आलाप के माध्यम से राग-विस्तार, तोड़ों की प्रभावशाली प्रस्तुति और लयकारी की बारीकियों को विस्तारपूर्वक समझाया। उन्होंने स्वर-शुद्धता, लय एवं ताल पर पकड़, कलात्मक समझ और निरंतर रियाज़ के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को राग के मूल स्वरूप को बनाए रखते हुए अपनी रचनात्मक प्रतिभा विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
इस कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को अपने सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने और राग प्रस्तुति की विभिन्न तकनीकों को सीखने का अवसर मिला। इस कार्यशाला का आयोजन बलविंदर कौर, गुरप्रीत कौर एवं हरमनजोत कौर द्वारा किया गया।
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कार्यशाला के समापन अवसर पर संगीत विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. रानी ने भी डॉ. ओम शर्मा के संगीत संबंधी योगदान, विषय की गहन समझ तथा विद्यार्थियों को दिए गए मूल्यवान मार्गदर्शन की सराहना की।-- -
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संवाद न्यूज एजेंसी
राजगढ़ (सिरमौर)। इटरनल विश्वविद्यालय बड़ू साहिब के अकाल कॉलेज ऑफ डिवाइन म्यूजिक एंड स्पिरिचुअलिज्म में आर्ट ऑफ राग.., प्रेजेंटेशन इन ओपन आलाप, तोड़ा एंड लयकारी.., विषय पर एक विशेष संगीत कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में डॉ. ओम शर्मा, सहायक प्रोफेसर, संगीत (वाद्य संगीत), राजा वीरभद्र सिंह राजकीय महाविद्यालय, सीमा (रोहड़ू) ने रिसोर्स पर्सन के रूप में भाग लिया।
कार्यशाला के शुभारंभ पर डीन डॉ. पूर्वी लुनियाल ने डॉ. ओम शर्मा का स्वागत किया और उन्हें सम्मानस्वरूप शॉल और पुष्पगुच्छ भेंट किया।
कार्यशाला के दौरान डॉ. ओम शर्मा ने खुले आलाप के माध्यम से राग-विस्तार, तोड़ों की प्रभावशाली प्रस्तुति और लयकारी की बारीकियों को विस्तारपूर्वक समझाया। उन्होंने स्वर-शुद्धता, लय एवं ताल पर पकड़, कलात्मक समझ और निरंतर रियाज़ के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को राग के मूल स्वरूप को बनाए रखते हुए अपनी रचनात्मक प्रतिभा विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
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इस कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को अपने सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने और राग प्रस्तुति की विभिन्न तकनीकों को सीखने का अवसर मिला। इस कार्यशाला का आयोजन बलविंदर कौर, गुरप्रीत कौर एवं हरमनजोत कौर द्वारा किया गया।
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कार्यशाला के समापन अवसर पर संगीत विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. रानी ने भी डॉ. ओम शर्मा के संगीत संबंधी योगदान, विषय की गहन समझ तथा विद्यार्थियों को दिए गए मूल्यवान मार्गदर्शन की सराहना की।