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Sirmour News: किशाऊ बांध परियोजना के विरोध में एकजुट हुए ग्रामीण, संघर्ष समिति का गठन
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विशाल बांध के स्थान पर 220 मेगावाट क्षमता के तीन छोटे बांध बनाने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
शिलाई (सिरमौर)। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर प्रस्तावित किशाऊ बांध परियोजना के विरोध में क्वांनू के गांव मेलोथ स्थित महासू देवता मंदिर परिसर में क्षेत्र के लोगों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से किशाऊ बांध संघर्ष समिति का गठन किया गया और प्रभावित परिवारों के अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित होकर संघर्ष करने का संकल्प लिया गया।
बैठक में श्याम सिंह तोमर को संघर्ष समिति का अध्यक्ष और जवाहर सिंह को संरक्षक नियुक्त किया गया। इसके अलावा परमेंद्र सिंह तोमर को उपाध्यक्ष, दलीप सिंह तोमर को महासचिव, हरी सिंह तोमर, आत्माराम भारद्वाज को सचिव, राहुल तोमर को कोषाध्यक्ष, केसर सिंह तोमर को कानूनी सलाहकार, नरेंद्र सिंह तोमर और चतर सिंह तोमर को मीडिया एवं प्रचार सचिव चुना गया।
नवगठित संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि उसका पहला और प्रमुख उद्देश्य किशाऊ बांध परियोजना का विरोध करना और प्रभावित एवं संभावित विस्थापित परिवारों के अधिकारों, हितों और वैधानिक दावों की रक्षा करना है।
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समिति के अध्यक्ष श्याम सिंह तोमर ने कहा कि क्षेत्रवासियों की सहमति और उनके हितों की अनदेखी किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर स्थानीय लोगों के जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों का हनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बैठक में यह प्रस्ताव भी पारित किया गया कि यदि सरकार किसी भी स्थिति में इस परियोजना को आगे बढ़ाने का निर्णय लेती है, तो एक विशाल बांध के स्थान पर 220 मेगावाट क्षमता के तीन छोटे बांध बनाए जाएं। समिति का तर्क है कि इससे विस्थापन कम होगा, पर्यावरणीय क्षति सीमित रहेगी और स्थानीय जनभावनाओं का भी सम्मान होगा।-- -- -- -- -
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिलाई (सिरमौर)। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर प्रस्तावित किशाऊ बांध परियोजना के विरोध में क्वांनू के गांव मेलोथ स्थित महासू देवता मंदिर परिसर में क्षेत्र के लोगों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से किशाऊ बांध संघर्ष समिति का गठन किया गया और प्रभावित परिवारों के अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित होकर संघर्ष करने का संकल्प लिया गया।
बैठक में श्याम सिंह तोमर को संघर्ष समिति का अध्यक्ष और जवाहर सिंह को संरक्षक नियुक्त किया गया। इसके अलावा परमेंद्र सिंह तोमर को उपाध्यक्ष, दलीप सिंह तोमर को महासचिव, हरी सिंह तोमर, आत्माराम भारद्वाज को सचिव, राहुल तोमर को कोषाध्यक्ष, केसर सिंह तोमर को कानूनी सलाहकार, नरेंद्र सिंह तोमर और चतर सिंह तोमर को मीडिया एवं प्रचार सचिव चुना गया।
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नवगठित संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि उसका पहला और प्रमुख उद्देश्य किशाऊ बांध परियोजना का विरोध करना और प्रभावित एवं संभावित विस्थापित परिवारों के अधिकारों, हितों और वैधानिक दावों की रक्षा करना है।
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समिति के अध्यक्ष श्याम सिंह तोमर ने कहा कि क्षेत्रवासियों की सहमति और उनके हितों की अनदेखी किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर स्थानीय लोगों के जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों का हनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बैठक में यह प्रस्ताव भी पारित किया गया कि यदि सरकार किसी भी स्थिति में इस परियोजना को आगे बढ़ाने का निर्णय लेती है, तो एक विशाल बांध के स्थान पर 220 मेगावाट क्षमता के तीन छोटे बांध बनाए जाएं। समिति का तर्क है कि इससे विस्थापन कम होगा, पर्यावरणीय क्षति सीमित रहेगी और स्थानीय जनभावनाओं का भी सम्मान होगा।