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31 अक्तूबर तक गृह कर चुकाएं, 30 फीसदी छूट पाएं

Mon, 23 Aug 2021 11:32 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 23 Aug 2021 11:32 PM IST
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पांवटा साहिब (सिरमौर)। नगर परिषद पांवटा साहिब में गृहकर आय का प्रमुख साधन है लेकिन दो दशक से करीब आठ करोड़ रुपये से अधिक लंबित राशि फंसी हुई है। गृहकर समय पर मिलता रहे तो शहर में विकास की गति तीव्र हो सकती है। नगर परिषद को सरकारी अनुदान पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। कई बार नगर परिषद ने गृह कर जमा नहीं करवाने वालों को नोटिस भी जारी किए हैं। अब, नगर परिषद ने लंबित गृहकर वसूलने को नया फार्मूला तैयार किया है। इसमें 31 अक्तूबर 2021 तक लंबित गृहकर एकमुश्त जमा करवाने पर 30 फीसदी छूट प्रदान की जाएगी।
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पांवटा साहिब नगर परिषद क्षेत्र में वर्ष 2001 से गृहकर शुरू किया गया था। गृहकर की दरें रिहायशी भवन और व्यावसायिक संस्थान के अनुसार तय की गई थीं। नगर परिषद के 13 वार्डों में वर्तमान में 7200 से अधिक परिवार रह रहे हैं। जनसंख्या 40 हजार का आंकड़ा पार कर गई है। वर्ष 2019 में नप ने गृहकर के रूप में 16.55 लाख तथा विगत वर्ष करीब 15 लाख गृह कर वसूला था।
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वर्ष 2001 से अब तक करीब 8 करोड़ रुपये गृहकर की लंबित राशि फंसी हुई है। निकाय चुनाव के दौरान चुनाव लड़ने वाले प्रत्येक प्रत्याशियों से वसूली जाने वाली गृहकर राशि की औसत सर्वाधिक रहती है क्योंकि बिना गृहकर राशि जमा करवाए कोई प्रत्याशी निकाय चुनाव नहीं लड़ सकता है।
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उधर, पांवटा साहिब नगर परिषद अध्यक्षा निर्मल कौर तथा नायब तहसीलदार एवं पांवटा नगर परिषद कमेटी के कार्यकारी अधिकारी रणजीत सिंह बेदी ने बताया कि गृहकर के रूप में करोड़ों रुपये लंबित पड़े हैं। नगर परिषद पांवटा ने फैसला लिया है कि 31 अक्तूबर 2021 तक एकमुश्त गृहकर जमा करवाने वाले को 30 फीसदी छूट प्रदान की जाएगी। लंबित राशि तथा नियमित गृहकर मिलता रहे तो शहरी विकास में तीव्र गति आ सकती है।

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नियमित गृहकर मिलने से ही होगी नगर परिषद आत्मनिर्भर
- पांवटा साहिब नगर परिषद को करीब 55 लाख वार्षिक राशि दुकानों और किराये के भवनों से एकत्र होती है। नक्शे पास करने की एवज में 18 से 20 लाख आय होती रही है। हर वर्ष शहरी क्षेत्र की सफाई व्यवस्था पर करीब तीन करोड़, कर्मचारियों के मानदेय पर दो करोड़ और बिजली बिलों समेत अन्य वार्षिक खर्च एक करोड़ से अधिक होता है। इसलिए नगर परिषद को सरकार से मिलने वाली अनुदान राशि पर ही निर्भर रहना पड़ता है। गृहकर नियमित रूप से मिलना शुरू हो जाए तो धीरे-धीरे नगर परिषद आर्थिक आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ेगी।
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