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Sirmour News: पारंपरिक बीजों की श्रेणी में रेशम शर्मा और लोक परिधानों की श्रेणी में सुमन प्रथम
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राजकीय महाविद्यालय कफोटा में प्रदर्शनी के दौरान पम्परिक वेशभूषा में छात्र
कफोटा कॉलेज में सजी पारंपरिक बीजों और लोक परिधानों की शानदार प्रदर्शनी
हमारी धरोहर, हमारी पहचान के जरिये स्थानीय संस्कृति और कृषि विरासत को सहेजने की पहल
संवाद न्यूज एजेंसी
सतौन (सिरमौर)। राजकीय महाविद्यालय कफोटा में इतिहास विभाग के तत्वावधान में हमारी धरोहर, हमारी पहचान विषय पर पारंपरिक बीजों एवं लोक परिधानों की प्रदर्शनी आयोजित की गई। प्रो. दिनेश कुमार के संयोजन में आयोजित प्रदर्शनी की टैगलाइन परंपरा का संरक्षण, संस्कृति का संवर्धन, भविष्य का संकल्प रही। इसका उद्देश्य क्षेत्र की पारंपरिक कृषि पद्धतियों, स्थानीय बीजों और लोक संस्कृति का संरक्षण कर युवा पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ना रहा।
प्रदर्शनी में राजमा, कोदो, मक्की, बालड़ी, पालक, बेलुले, जौ, तड़िया, शेरो, अलसी, कावणी, मेथी, भोटो, कचूर, सफेद एवं लाल चोलाई, अदरक, मीठा एवं कड़वा करेला, भगजीरा, मिर्च, धनिया, चचरेड़ा, माश, तुंबड़ी, कल्जरी, सफेद एवं काले तिल, शावक, सुटे, गेहूं, कपास, चिनोई, कोच (श्यामफली), भांग, राई, मूली और रागुण सहित सभी पारंपरिक बीज प्रदर्शित किए गए।
वहीं, लोक वेशभूषा में कोट, लोईया, टोपी, दवड़, पातू, साफा, घाघरा, सुथन, कुर्शे और सकाब सहित विभिन्न पारंपरिक परिधानों को प्रदर्शित कर क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाया गया।
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महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. सुलक्षणा शर्मा ने प्रदर्शनी की सराहना करते हुए इसे स्थानीय इतिहास, कृषि विरासत और लोक संस्कृति के संरक्षण की दिशा में सराहनीय पहल बताया।
प्रतियोगिता में पारंपरिक बीजों की श्रेणी में रेशम शर्मा ने प्रथम, दीपिका ने द्वितीय और समीक्षा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। लोक परिधानों की श्रेणी में सुमन प्रथम, रितु द्वितीय और नितिन तृतीय स्थान पर रहे। मूल्यांकन के लिए प्रो. विक्रम सिंह, प्रो. विपिन सिंह, प्रो. रवीना और प्रो. अनिकेत पुंडीर ने निर्णायक मंडल की भूमिका निभाई।
प्रदर्शनी के माध्यम से संदेश दिया गया कि पारंपरिक बीज खाद्य सुरक्षा और जैव विविधता के साथ पूर्वजों के ज्ञान की धरोहर हैं, जबकि लोक परिधान हमारी सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक हैं। इस आयोजन ने विद्यार्थियों को अपनी परंपराओं के संरक्षण और उन्हें अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रति जागरूक किया।-- -
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हमारी धरोहर, हमारी पहचान के जरिये स्थानीय संस्कृति और कृषि विरासत को सहेजने की पहल
संवाद न्यूज एजेंसी
सतौन (सिरमौर)। राजकीय महाविद्यालय कफोटा में इतिहास विभाग के तत्वावधान में हमारी धरोहर, हमारी पहचान विषय पर पारंपरिक बीजों एवं लोक परिधानों की प्रदर्शनी आयोजित की गई। प्रो. दिनेश कुमार के संयोजन में आयोजित प्रदर्शनी की टैगलाइन परंपरा का संरक्षण, संस्कृति का संवर्धन, भविष्य का संकल्प रही। इसका उद्देश्य क्षेत्र की पारंपरिक कृषि पद्धतियों, स्थानीय बीजों और लोक संस्कृति का संरक्षण कर युवा पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ना रहा।
प्रदर्शनी में राजमा, कोदो, मक्की, बालड़ी, पालक, बेलुले, जौ, तड़िया, शेरो, अलसी, कावणी, मेथी, भोटो, कचूर, सफेद एवं लाल चोलाई, अदरक, मीठा एवं कड़वा करेला, भगजीरा, मिर्च, धनिया, चचरेड़ा, माश, तुंबड़ी, कल्जरी, सफेद एवं काले तिल, शावक, सुटे, गेहूं, कपास, चिनोई, कोच (श्यामफली), भांग, राई, मूली और रागुण सहित सभी पारंपरिक बीज प्रदर्शित किए गए।
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वहीं, लोक वेशभूषा में कोट, लोईया, टोपी, दवड़, पातू, साफा, घाघरा, सुथन, कुर्शे और सकाब सहित विभिन्न पारंपरिक परिधानों को प्रदर्शित कर क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाया गया।
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महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. सुलक्षणा शर्मा ने प्रदर्शनी की सराहना करते हुए इसे स्थानीय इतिहास, कृषि विरासत और लोक संस्कृति के संरक्षण की दिशा में सराहनीय पहल बताया।
प्रतियोगिता में पारंपरिक बीजों की श्रेणी में रेशम शर्मा ने प्रथम, दीपिका ने द्वितीय और समीक्षा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। लोक परिधानों की श्रेणी में सुमन प्रथम, रितु द्वितीय और नितिन तृतीय स्थान पर रहे। मूल्यांकन के लिए प्रो. विक्रम सिंह, प्रो. विपिन सिंह, प्रो. रवीना और प्रो. अनिकेत पुंडीर ने निर्णायक मंडल की भूमिका निभाई।
प्रदर्शनी के माध्यम से संदेश दिया गया कि पारंपरिक बीज खाद्य सुरक्षा और जैव विविधता के साथ पूर्वजों के ज्ञान की धरोहर हैं, जबकि लोक परिधान हमारी सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक हैं। इस आयोजन ने विद्यार्थियों को अपनी परंपराओं के संरक्षण और उन्हें अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रति जागरूक किया।