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नौ साल से स्कूल भवन का इंतजार, खुले आसमान के नीचे लग रहीं कक्षाएं

Mon, 21 Mar 2022 11:48 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 21 Mar 2022 11:48 PM IST
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daroti school rajgargh not their own building- student facing problem
राजगढ़ खंड की राजकीय उच्च पाठशाला धरोटी में बाहर बैठकर पढ़ाई करते बच्चे। - फोटो : NAHAN
राजगढ़ (सिरमौर)। सरकारी धन का दुरुपयोग प्रशासनिक अव्यवस्था के चलते किस कदर हो रहा है, इसका उदाहरण शिक्षा खंड राजगढ़ के उच्च विद्यालय धरोटी के भवन निर्माण में भी देखने में मिल रहा है। यहां स्कूल के भवन का शिलान्यास दिसंबर 2013 में तत्कालीन उपाध्यक्ष योजना बोर्ड जीआर मुसाफिर ने किया था।
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हैरानी इस बात की है कि नौ वर्ष के बाद भी भवन का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। नतीजन स्कूल के विद्यार्थियों को खुले आसमान के नीचे कक्षाएं लगानी पड़ रही हैं। इससे न केवल बच्चे परेशान हैं, बल्कि स्टाफ भी दिक्कतें झेल रहा है।
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जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान योजना के तहत शिक्षा विभाग ने भवन निर्माण का कार्य हिमुडा को दिया था। इसका प्राक्कलन 95 लाख रुपये का था। मगर विभाग ने करीब 45 लाख रुपये हिमुडा को जारी किए। हिमुडा ने ठेकेदार को निर्माण का जिम्मा सौंपा, जिसने दो मंजिला भवन का लेंटर डाला और दूसरी मंजिल के पिल्लर भी खड़े कर दिए।
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पहली मंजिल में दीवारें बनाकर पलस्तर का काम कर दिया गया लेकिन उसके बाद पैसा खत्म होने से काम बंद हो गया। आज हालत यह है कि भवन बनने से पहले ही उजड़ने की कगार पर पहुंचे गया है।
स्थानीय लोगों ने नेताओं और अधिकारियों को बार-बार इस निर्माण कार्य को पूरा करने की गुहार लगाई है। फिर भी आज तक इसका कोई समाधान नहीं हो पाया। इस वजह से स्कूली बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ाई करने पर मजबूर हैं। एसएमसी अध्यक्ष कमलराज शर्मा और मुख्याध्यापक श्याम सिंह ने बताया कि मामले को एसएमसी और स्कूल प्रबंधन ने उच्चाधिकारियों और नेताओं के समक्ष कई बार उठाया है।
यही नहीं दो बार जनमंच कार्यक्रम में भी इस मामले को मंत्रियों और प्रशासन के अधिकारियों के समक्ष रखा गया। इसके बाद हिमुडा के अधिशासी अभियंता ने 2019 में एक पत्र लिखकर जानकारी दी कि आठ कमरों के दो मंजिला इस भवन का प्राक्कलन 94,40,938 रुपये का था। शिक्षा विभाग से इसके लिए अतिरिक्त पैसों की मांग की गई है और बजट मिलने पर निर्माण कार्य प्रारंभ किया जाएगा।
वर्तमान में उच्च विद्यालय में मात्र तीन कमरे हैं, जिसमें 150 बच्चे अध्ययनरत हैं। कक्षाओं की कमी के कारण उन्हें बाहर बैठाकर पढ़ाना पड़ रहा है। इस दौरान गर्मियों में समस्या विकट हो जाती है। लोगों का कहना है कि अगर पैसा कम था तो तीन-चार कमरे पहले बना दिए जाते तो इसका कुछ लाभ स्कूल के विद्यार्थियों को मिलता। अब भवन बनने से पहले ही खंडहर बनने की कगार पर पहुंच गया है।

विधायक रीना कश्यप बताया कि उन्होंने इस मामले में विधानसभा में इस सत्र में प्रश्न लगाया था, जिसके उत्तर में शिक्षा मंत्री ने लिखित उत्तर दिया है कि धनराशि के अभाव के कारण कार्य बंद है और इसे पूरा करने का विभाग प्रयास कर रहा है।
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