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Sirmour News: डाकघर और रिश्तों के भंवर में.., नाटक देखकर भाव विभोर हुए दर्शक
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नाहन में रिश्तों के भंवर नाटक मंचन के दौरान अभिनय करते कलाकार। संवाद
सचित्र-
‘डाकघर और रिश्तों के भंवर में..’, नाटक देखकर भावविभोर हुए दर्शक
नाहन में द्वितीय कंवर शूूरवीर सिंह स्मृति नाट्य महोत्सव का समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। नाहन में चल रहे द्वितीय कुंवर शूरवीर सिंह स्मृति राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव के अंतिम दिन जिला परिषद के सभागार में डाकघर और रिश्तों के भंवर में.., नाटकों का मंचन हुआ। इसी के साथ स्टेपको की ओर से रोटरी क्लब नाहन और भाषा एवं संस्कृति विभाग के सौजन्य से आयोजित इस नाट्य महोत्सव का समापन हुआ।
अंतिम दिन पहला नाटक राजस्थान अलवर से डॉ. देशराज मीणा की ओर से निर्देशित रिश्तों के भंवर में.., का मंचन हुआ। यह नाटक दो ऐसी औरतों की कहानी है जो एक ही व्यक्ति से प्रेम करती है। उसका नाम गोविंद है, एक औरत वह है जो उसकी पत्नी और दूसरी औरत वह है जिसके पास गोविंद जाता है वह वेश्या है। इस नाटक में दो औरतों के बीच चल रहे द्वंद को दिखाया गया। प्रियम जानी के लिखे इस नाटक को सभी ने बहुत पसंद किया। इसमें मोनालिसा दास और सुनीता मोंडल के अभिनय को खूब सराहना मिली।
उत्सव के अंतिम नाटक के रूप में डाकघर नाटक का मंचन हुआ। गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर द्वारा लिखे इस नाटक का निर्देशन नाहन के रजित सिंह कंवर ने किया। डाकघर की कहानी अनाथ लड़के अमल के इर्द-गिर्द घूमती है। जो एक लाइलाज बीमारी से ग्रस्त है। बीमारी के चलते अमल अपने कमरे से बाहर जाने में असमर्थ है। वह अपने कमरे की खिड़की के पास से गुजरने वालों से बात करता रहता है। इस नाटक का अंत बहुत ही मार्मिक ढंग से हुआ। इससे सभी की आंखें नम हो गई। इसमें अमल की भूमिका में वैभव अत्री ने शानदार काम किया।फकीर की भूमिका में राम सैनी, फूफा की भूमिका में राकेश शर्मा, सुधा की भूमिका में सिमरन जपोत्रा, चौधरी की भूमिका में नीरज गुप्ता, चौकीदार और पहरेदार की भूमिका में सोहेल खान, दही वाली की भूमिका में शालिनी ठाकुर, राजवेद की भूमिका में शशिकांत अत्री और दूत की भूमिका में ऋषभ शर्मा को दर्शकों ने खूब सराहा। इस मौके पर वसीम खान समेत काफी लोग मौजूद रहे।
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-- -- संवाद
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‘डाकघर और रिश्तों के भंवर में..’, नाटक देखकर भावविभोर हुए दर्शक
नाहन में द्वितीय कंवर शूूरवीर सिंह स्मृति नाट्य महोत्सव का समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। नाहन में चल रहे द्वितीय कुंवर शूरवीर सिंह स्मृति राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव के अंतिम दिन जिला परिषद के सभागार में डाकघर और रिश्तों के भंवर में.., नाटकों का मंचन हुआ। इसी के साथ स्टेपको की ओर से रोटरी क्लब नाहन और भाषा एवं संस्कृति विभाग के सौजन्य से आयोजित इस नाट्य महोत्सव का समापन हुआ।
अंतिम दिन पहला नाटक राजस्थान अलवर से डॉ. देशराज मीणा की ओर से निर्देशित रिश्तों के भंवर में.., का मंचन हुआ। यह नाटक दो ऐसी औरतों की कहानी है जो एक ही व्यक्ति से प्रेम करती है। उसका नाम गोविंद है, एक औरत वह है जो उसकी पत्नी और दूसरी औरत वह है जिसके पास गोविंद जाता है वह वेश्या है। इस नाटक में दो औरतों के बीच चल रहे द्वंद को दिखाया गया। प्रियम जानी के लिखे इस नाटक को सभी ने बहुत पसंद किया। इसमें मोनालिसा दास और सुनीता मोंडल के अभिनय को खूब सराहना मिली।
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उत्सव के अंतिम नाटक के रूप में डाकघर नाटक का मंचन हुआ। गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर द्वारा लिखे इस नाटक का निर्देशन नाहन के रजित सिंह कंवर ने किया। डाकघर की कहानी अनाथ लड़के अमल के इर्द-गिर्द घूमती है। जो एक लाइलाज बीमारी से ग्रस्त है। बीमारी के चलते अमल अपने कमरे से बाहर जाने में असमर्थ है। वह अपने कमरे की खिड़की के पास से गुजरने वालों से बात करता रहता है। इस नाटक का अंत बहुत ही मार्मिक ढंग से हुआ। इससे सभी की आंखें नम हो गई। इसमें अमल की भूमिका में वैभव अत्री ने शानदार काम किया।फकीर की भूमिका में राम सैनी, फूफा की भूमिका में राकेश शर्मा, सुधा की भूमिका में सिमरन जपोत्रा, चौधरी की भूमिका में नीरज गुप्ता, चौकीदार और पहरेदार की भूमिका में सोहेल खान, दही वाली की भूमिका में शालिनी ठाकुर, राजवेद की भूमिका में शशिकांत अत्री और दूत की भूमिका में ऋषभ शर्मा को दर्शकों ने खूब सराहा। इस मौके पर वसीम खान समेत काफी लोग मौजूद रहे।
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नाहन में रिश्तों के भंवर नाटक मंचन के दौरान अभिनय करते कलाकार। संवाद