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बेनामी संपति खरीद मामले में नपेंगे अधिकारी
Updated Tue, 27 Mar 2018 11:57 PM IST
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जगत सिंह तोमर
शिलाई (सिरमौर)।
हिमाचल और उत्तराखंड की सीमा पर स्थित शिलाई के मोहराड़ में प्रस्तावित किशाऊ बांध परियोजना में भू-अधिग्रहण से पहले ही जमीन की खरीद-फरोख्त के मामले सामने आए हैं। नियमों को ताक पर रखकर जिला से बाहर के लोगों ने यहां बेनामी संपत्तियां खरीदी हैं। प्रारंभिक जांच के बाद मामले में बड़े स्तर पर खरीद-फरोख्त की आशंका जताई जा रही है। लिहाजा, सरकार ने उपायुक्त सिरमौर से पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट मांगी है। ऐसे में कई अधिकारियों पर गाज गिरने की आशंका भी जताई जा रही है।
मोहराड़ में 660 मेगावाट की किशाऊ बांध परियोजना प्रस्तावित है। 20 जुलाई 2015 को उत्तराखंड और हिमाचल सरकार के बीच इस परियोजना को लेकर एमओयू साइन हुआ था। इसके बाद बड़े पैमाने पर इलाके में जमीन की खरीद-फरोख्त हुई। मुआवजे के लालच में जमीनें खरीदी गईं। उस दौरान मामला सुर्खियों में आया। तत्कालीन उपायुक्त ने एसडीएम पांवटा को जांच के आदेश दिए। इसके बाद इलाके में जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी थी।
एसडीएम ने प्रशासन को इसकी पूरी रिपोर्ट सौंपी लेकिन इस मामले को दबा दिया गया। इसके बाद एक आरटीआई कार्यकर्ता ने जब रिकॉर्ड मांगा तो यह मामला फिर सामने आया। पूर्व जांच अधिकारी एसडीएम पांवटा ने अपने रिपोर्ट में साफ शब्दों में लिखा है कि बांध स्थल में हुए जमीन खरीद मामले मे धांधलियां हुई हैं। जिन व्यक्तियों ने जमीन खरीदी उनको यह पता नहीं कि उन्होंने किस व्यक्ति से और कहां पर जमीन खरीदी।
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यहां तक कि भूमिहीनों को पट्टे पर मिली जमीनों की तक बिक्री हुई। बैंकों में रहन जमीनों की सौदेबाजी के भी मामले सामने आए हैं। आरटीआई की प्रति प्रदेश सरकार को भेजी गई तो प्रदेश सरकार ने पुन: जांच के आदेश दिए। आरटीआई में हुए खुलासे के अनुसार राजस्व विभाग ने नियम व कानून को ताक पर रख कर जमीनों के सौदे करवाएं हैं।
उधर, उपायुक्त सिरमौर ललित जैन ने जांच के आदेश मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच की जाएगी। यदि कोई दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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शिलाई (सिरमौर)।
हिमाचल और उत्तराखंड की सीमा पर स्थित शिलाई के मोहराड़ में प्रस्तावित किशाऊ बांध परियोजना में भू-अधिग्रहण से पहले ही जमीन की खरीद-फरोख्त के मामले सामने आए हैं। नियमों को ताक पर रखकर जिला से बाहर के लोगों ने यहां बेनामी संपत्तियां खरीदी हैं। प्रारंभिक जांच के बाद मामले में बड़े स्तर पर खरीद-फरोख्त की आशंका जताई जा रही है। लिहाजा, सरकार ने उपायुक्त सिरमौर से पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट मांगी है। ऐसे में कई अधिकारियों पर गाज गिरने की आशंका भी जताई जा रही है।
मोहराड़ में 660 मेगावाट की किशाऊ बांध परियोजना प्रस्तावित है। 20 जुलाई 2015 को उत्तराखंड और हिमाचल सरकार के बीच इस परियोजना को लेकर एमओयू साइन हुआ था। इसके बाद बड़े पैमाने पर इलाके में जमीन की खरीद-फरोख्त हुई। मुआवजे के लालच में जमीनें खरीदी गईं। उस दौरान मामला सुर्खियों में आया। तत्कालीन उपायुक्त ने एसडीएम पांवटा को जांच के आदेश दिए। इसके बाद इलाके में जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी थी।
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एसडीएम ने प्रशासन को इसकी पूरी रिपोर्ट सौंपी लेकिन इस मामले को दबा दिया गया। इसके बाद एक आरटीआई कार्यकर्ता ने जब रिकॉर्ड मांगा तो यह मामला फिर सामने आया। पूर्व जांच अधिकारी एसडीएम पांवटा ने अपने रिपोर्ट में साफ शब्दों में लिखा है कि बांध स्थल में हुए जमीन खरीद मामले मे धांधलियां हुई हैं। जिन व्यक्तियों ने जमीन खरीदी उनको यह पता नहीं कि उन्होंने किस व्यक्ति से और कहां पर जमीन खरीदी।
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यहां तक कि भूमिहीनों को पट्टे पर मिली जमीनों की तक बिक्री हुई। बैंकों में रहन जमीनों की सौदेबाजी के भी मामले सामने आए हैं। आरटीआई की प्रति प्रदेश सरकार को भेजी गई तो प्रदेश सरकार ने पुन: जांच के आदेश दिए। आरटीआई में हुए खुलासे के अनुसार राजस्व विभाग ने नियम व कानून को ताक पर रख कर जमीनों के सौदे करवाएं हैं।
उधर, उपायुक्त सिरमौर ललित जैन ने जांच के आदेश मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच की जाएगी। यदि कोई दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।