{"_id":"6a4275096dee21f2cd077f92","slug":"court-news1-nahan-news-c-177-1-nhn1001-182128-2026-06-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirmour News: अदालत ने बैंक डिफ़ॉल्टर को 6 महीने की जेल और 1 लाख रुपये मुआवजे की सुनाई सजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirmour News: अदालत ने बैंक डिफ़ॉल्टर को 6 महीने की जेल और 1 लाख रुपये मुआवजे की सुनाई सजा
विज्ञापन
अदालत --
-मुआवजा नहीं चुकाने पर भुगतनी होगी एक महीने की अतिरिक्त जेल की सजा
संवाद समाचार एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए दोषी को 6 महीने की कैद और 1,00,000 रुपये मुआवजे की सजा सुनाई है। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी विकास कपूर की अदालत ने यह फैसला सुनाया। दोषी मुआवजा नहीं चुकाता है, तो उसे एक महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।
प्रकाश चंद ने साल 2017 में एचपी स्टेट को-ऑपरेटिव एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट बैंक से भूमि विकास के लिए 1.50 लाख रुपये का ऋण लिया था। वह साल 2018 से ऋण की किस्तें चुकाने में डिफ़ॉल्टर चल रहा था। ऋण खाता ठीक करने के लिए उसने बैंक को 70,780 रुपये का चेक दिया था, जो बैंक में लगाने पर खाते में पैसे न होने के कारण बाउंस हो गया।
अदालत में दोषी के वकील लोकेश नेगी ने दलील दी कि बैंक ने लोन देते समय खाली सुरक्षा चेक (सिक्योरिटी चेक) पर दस्तखत करवाए थे, जिसका गलत इस्तेमाल किया गया। हालांकि, बैंक के वकील की अकाट्य दलीलों और सबूतों के आगे आरोपी का यह दावा टिक नहीं सका। अदालत ने पाया कि आरोपी चेक पर अपने हस्ताक्षर होने की बात पहले ही कबूल कर चुका था और वह सुरक्षा चेक का कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया।
विज्ञापन
दोषी के वकील ने अदालत से गुहार लगाई कि प्रकाश चंद पहली बार अपराधी बना है और उसका परिवार उस पर निर्भर है, इसलिए उसे प्रोबेशन (परिवीक्षा) पर रिहा किया जाए। इस पर अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि चेक बाउंस एक सामाजिक-आर्थिक अपराध है। यदि ऐसे मामलों में दोषियों पर ढील दी गई, तो समाज में यह गलत संदेश जाएगा कि लोग बिना पैसे के चेक जारी कर सकते हैं। अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आरोपी को तुरंत हिरासत में लेने और सजा काटने के आदेश जारी कर दिए।
विज्ञापन
-मुआवजा नहीं चुकाने पर भुगतनी होगी एक महीने की अतिरिक्त जेल की सजा
संवाद समाचार एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए दोषी को 6 महीने की कैद और 1,00,000 रुपये मुआवजे की सजा सुनाई है। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी विकास कपूर की अदालत ने यह फैसला सुनाया। दोषी मुआवजा नहीं चुकाता है, तो उसे एक महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।
प्रकाश चंद ने साल 2017 में एचपी स्टेट को-ऑपरेटिव एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट बैंक से भूमि विकास के लिए 1.50 लाख रुपये का ऋण लिया था। वह साल 2018 से ऋण की किस्तें चुकाने में डिफ़ॉल्टर चल रहा था। ऋण खाता ठीक करने के लिए उसने बैंक को 70,780 रुपये का चेक दिया था, जो बैंक में लगाने पर खाते में पैसे न होने के कारण बाउंस हो गया।
विज्ञापन
अदालत में दोषी के वकील लोकेश नेगी ने दलील दी कि बैंक ने लोन देते समय खाली सुरक्षा चेक (सिक्योरिटी चेक) पर दस्तखत करवाए थे, जिसका गलत इस्तेमाल किया गया। हालांकि, बैंक के वकील की अकाट्य दलीलों और सबूतों के आगे आरोपी का यह दावा टिक नहीं सका। अदालत ने पाया कि आरोपी चेक पर अपने हस्ताक्षर होने की बात पहले ही कबूल कर चुका था और वह सुरक्षा चेक का कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया।
विज्ञापन
दोषी के वकील ने अदालत से गुहार लगाई कि प्रकाश चंद पहली बार अपराधी बना है और उसका परिवार उस पर निर्भर है, इसलिए उसे प्रोबेशन (परिवीक्षा) पर रिहा किया जाए। इस पर अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि चेक बाउंस एक सामाजिक-आर्थिक अपराध है। यदि ऐसे मामलों में दोषियों पर ढील दी गई, तो समाज में यह गलत संदेश जाएगा कि लोग बिना पैसे के चेक जारी कर सकते हैं। अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आरोपी को तुरंत हिरासत में लेने और सजा काटने के आदेश जारी कर दिए।