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Sirmour News: अदालत 2
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जमीन सौदे में खरीदार को मिली जीत, विक्रेता को 3 माह में रजिस्ट्री के आदेश
पांवटा साहिब के बद्रीपुर क्षेत्र का मामला, 73 लाख रुपये में हुआ था ब्रिकी समझौता
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने जमीन बिक्री के विवाद मामले में खरीदार के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने विक्रेता को आदेश दिया है कि वह तय समझौते के अनुसार तीन माह के भीतर जमीन की रजिस्ट्री कराए। यह मामला बद्रीपुर क्षेत्र की भूमि से जुड़ा है।
वर्ष 2022 में जमीन बेचने को लेकर 73 लाख रुपये में दोनों पक्षों के बीच लिखित समझौता हुआ था। समझौते के अनुसार पांवटा साहिब निवासी इंद्रजीत (खरीदार) की ओर से बड़ी रकम बतौर अग्रिम दी गई, लेकिन निर्धारित तिथि पर जसवीर (विक्रेता) ने रजिस्ट्री नहीं कराई। इसके बाद खरीदार ने न्यायालय में शिकायत दर्ज करवाई।
अदालत ने निर्णय में स्पष्ट कहा कि बिक्री समझौता वैध था। खरीदार की ओर से भुगतान तथा उपस्थिति से यह सिद्ध होता है कि वह सौदे को पूरा करने के लिए तैयार था। वहीं विक्रेता की ओर से बाद में पेश किए गए अन्य दस्तावेजों को अदालत ने अमान्य करार दिया। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिए कि विवादित भूमि को लेकर किसी भी प्रकार का हस्तांतरण, बिक्री या बंधक नहीं किया जाएगा, जब तक कि मूल समझौते का पालन नहीं हो जाता।
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पांवटा साहिब के बद्रीपुर क्षेत्र का मामला, 73 लाख रुपये में हुआ था ब्रिकी समझौता
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने जमीन बिक्री के विवाद मामले में खरीदार के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने विक्रेता को आदेश दिया है कि वह तय समझौते के अनुसार तीन माह के भीतर जमीन की रजिस्ट्री कराए। यह मामला बद्रीपुर क्षेत्र की भूमि से जुड़ा है।
वर्ष 2022 में जमीन बेचने को लेकर 73 लाख रुपये में दोनों पक्षों के बीच लिखित समझौता हुआ था। समझौते के अनुसार पांवटा साहिब निवासी इंद्रजीत (खरीदार) की ओर से बड़ी रकम बतौर अग्रिम दी गई, लेकिन निर्धारित तिथि पर जसवीर (विक्रेता) ने रजिस्ट्री नहीं कराई। इसके बाद खरीदार ने न्यायालय में शिकायत दर्ज करवाई।
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अदालत ने निर्णय में स्पष्ट कहा कि बिक्री समझौता वैध था। खरीदार की ओर से भुगतान तथा उपस्थिति से यह सिद्ध होता है कि वह सौदे को पूरा करने के लिए तैयार था। वहीं विक्रेता की ओर से बाद में पेश किए गए अन्य दस्तावेजों को अदालत ने अमान्य करार दिया। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिए कि विवादित भूमि को लेकर किसी भी प्रकार का हस्तांतरण, बिक्री या बंधक नहीं किया जाएगा, जब तक कि मूल समझौते का पालन नहीं हो जाता।
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