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Sirmour News: अदालत 3
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47.61 लाख रुपये की संपत्ति पर विवाद
खत्म, वसीयत को अदालत ने ठहराया वैध
- जिला न्यायाधीश ने सुनाया फैसला, सभी वारिसों ने जताई सहमति, बैंक को राशि जारी करने के निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। जिला अदालत ने उत्तराधिकार मामले में फैसला सुनाते हुए करीब 47.61 लाख रुपये की संपत्ति पर दावेदारी का रास्ता साफ कर दिया है। अदालत ने दिवंगत रूप सिंह की वसीयत को वैध ठहराते हुए उसके आधार पर प्रोबेट (उत्तराधिकार प्रमाण पत्र) जारी करने का आदेश दिया है।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश योगेश जसवाल की अदालत में यह मामला दलीप सिंह की ओर से दायर किया गया था। याचिका में बताया गया कि रूप सिंह ने 1 सितंबर 2021 को विधिवत पंजीकृत वसीयत तैयार की थी। इसमें अपनी चल-अचल संपत्ति दलीप सिंह और अपने पोतों के नाम की थी। मृतक के नाम पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, ददाहू शाखा में 47,61,395 रुपये एफडी और खातों में जमा थे, जिनमें कोई नामिनी नहीं था। बैंक ने राशि जारी करने के लिए कोर्ट से प्रोबेट मांगा, जिसके बाद याचिका दायर की गई।
मामले की सुनवाई के दौरान अन्य कानूनी वारिसों ने कोर्ट में बयान देकर वसीयत पर कोई आपत्ति नहीं जताई। उन्होंने वसीयत को सही और वैध मानते हुए प्रोबेट जारी करने पर सहमति दी। अदालत में पेश गवाहों और दस्तावेजों से यह साबित हुआ कि वसीयत पूरी तरह से वैध तरीके से बिना किसी दबाव के और पूर्ण मानसिक संतुलन में तैयार की गई थी। सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए वसीयत के अनुसार प्रोबेट जारी करने के आदेश दिए। संबंधित बैंक को निर्देश दिया गया है कि वह राशि लाभार्थियों को निर्धारित हिस्सेदारी के अनुसार जारी करे।
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खत्म, वसीयत को अदालत ने ठहराया वैध
- जिला न्यायाधीश ने सुनाया फैसला, सभी वारिसों ने जताई सहमति, बैंक को राशि जारी करने के निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। जिला अदालत ने उत्तराधिकार मामले में फैसला सुनाते हुए करीब 47.61 लाख रुपये की संपत्ति पर दावेदारी का रास्ता साफ कर दिया है। अदालत ने दिवंगत रूप सिंह की वसीयत को वैध ठहराते हुए उसके आधार पर प्रोबेट (उत्तराधिकार प्रमाण पत्र) जारी करने का आदेश दिया है।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश योगेश जसवाल की अदालत में यह मामला दलीप सिंह की ओर से दायर किया गया था। याचिका में बताया गया कि रूप सिंह ने 1 सितंबर 2021 को विधिवत पंजीकृत वसीयत तैयार की थी। इसमें अपनी चल-अचल संपत्ति दलीप सिंह और अपने पोतों के नाम की थी। मृतक के नाम पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, ददाहू शाखा में 47,61,395 रुपये एफडी और खातों में जमा थे, जिनमें कोई नामिनी नहीं था। बैंक ने राशि जारी करने के लिए कोर्ट से प्रोबेट मांगा, जिसके बाद याचिका दायर की गई।
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मामले की सुनवाई के दौरान अन्य कानूनी वारिसों ने कोर्ट में बयान देकर वसीयत पर कोई आपत्ति नहीं जताई। उन्होंने वसीयत को सही और वैध मानते हुए प्रोबेट जारी करने पर सहमति दी। अदालत में पेश गवाहों और दस्तावेजों से यह साबित हुआ कि वसीयत पूरी तरह से वैध तरीके से बिना किसी दबाव के और पूर्ण मानसिक संतुलन में तैयार की गई थी। सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए वसीयत के अनुसार प्रोबेट जारी करने के आदेश दिए। संबंधित बैंक को निर्देश दिया गया है कि वह राशि लाभार्थियों को निर्धारित हिस्सेदारी के अनुसार जारी करे।
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