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Sirmour News: कार में भारी मात्रा में दवाइयां ले जाने का आरोपी बरी
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अदालत-
-नाहन में विशेष अदालत ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट से जुड़े मामले में सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। नाहन में विशेष अदालत (स्पेशल कोर्ट) ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश गौरव महाजन की अदालत ने कार में भारी मात्रा में दवाइयां ले जाने के आरोपी दिनेश कुमार को बरी कर दिया है। अदालत ने साफ किया कि किसी व्यक्ति के पास दवाइयों का मिलना मात्र तब तक दंडनीय अपराध नहीं है, जब तक अभियोजन पक्ष यह साबित न कर दे कि वे दवाइयां बेचने या बांटने के इरादे से रखी गई थीं।
यह मामला 16 जनवरी 2020 का है, जब नाहन-पांवटा सड़क पर मारकंडा पुल के पास पुलिस की एसआईयू टीम ने हरियाणा नंबर की एक स्विफ्ट डिजायर कार को रोका था। कार में दिनेश कुमार और सुशील कुमार सवार थे। तलाशी के दौरान गाड़ी में भारी मात्रा में एलोपैथिक दवाइयां बरामद हुईं। मौके पर ड्रग्स इंस्पेक्टर को बुलाया गया। आरोपी उस समय दवाइयों की खरीद के बिल या लाइसेंस नहीं दिखा पाए थे, जिसके बाद ड्रग्स इंस्पेक्टर ने दवाइयां जब्त कर केस दर्ज कर लिया था। इस मामले के दूसरे सह-आरोपी सुशील कुमार की ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ केस साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा। बचाव पक्ष ने अदालत में साबित किया कि बरामद दवाइयां यमुनानगर स्थित ‘भारत मेडिकल स्टोर’ से खरीदी गई थीं, जिसके वैध बिल और जीएसटी इनवॉइस मौजूद थे। यह मेडिकल स्टोर मृत आरोपी सुशील कुमार के पिता के नाम पर रजिस्टर्ड था। मामले का मुख्य स्वतंत्र गवाह अदालत में मुकर गया। दूसरे गवाह को कोर्ट में पेश ही नहीं किया गया। विशेष अदालत ने आरोपी दिनेश कुमार को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया और उनके बेल बॉन्ड भी रद्द कर दिए हैं।
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-नाहन में विशेष अदालत ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट से जुड़े मामले में सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। नाहन में विशेष अदालत (स्पेशल कोर्ट) ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश गौरव महाजन की अदालत ने कार में भारी मात्रा में दवाइयां ले जाने के आरोपी दिनेश कुमार को बरी कर दिया है। अदालत ने साफ किया कि किसी व्यक्ति के पास दवाइयों का मिलना मात्र तब तक दंडनीय अपराध नहीं है, जब तक अभियोजन पक्ष यह साबित न कर दे कि वे दवाइयां बेचने या बांटने के इरादे से रखी गई थीं।
यह मामला 16 जनवरी 2020 का है, जब नाहन-पांवटा सड़क पर मारकंडा पुल के पास पुलिस की एसआईयू टीम ने हरियाणा नंबर की एक स्विफ्ट डिजायर कार को रोका था। कार में दिनेश कुमार और सुशील कुमार सवार थे। तलाशी के दौरान गाड़ी में भारी मात्रा में एलोपैथिक दवाइयां बरामद हुईं। मौके पर ड्रग्स इंस्पेक्टर को बुलाया गया। आरोपी उस समय दवाइयों की खरीद के बिल या लाइसेंस नहीं दिखा पाए थे, जिसके बाद ड्रग्स इंस्पेक्टर ने दवाइयां जब्त कर केस दर्ज कर लिया था। इस मामले के दूसरे सह-आरोपी सुशील कुमार की ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है।
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सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ केस साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा। बचाव पक्ष ने अदालत में साबित किया कि बरामद दवाइयां यमुनानगर स्थित ‘भारत मेडिकल स्टोर’ से खरीदी गई थीं, जिसके वैध बिल और जीएसटी इनवॉइस मौजूद थे। यह मेडिकल स्टोर मृत आरोपी सुशील कुमार के पिता के नाम पर रजिस्टर्ड था। मामले का मुख्य स्वतंत्र गवाह अदालत में मुकर गया। दूसरे गवाह को कोर्ट में पेश ही नहीं किया गया। विशेष अदालत ने आरोपी दिनेश कुमार को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया और उनके बेल बॉन्ड भी रद्द कर दिए हैं।
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