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Sirmour News: गलत क्षेत्राधिकार में चला जमीन विवाद का मुकदमा, दो साल बाद फैसला पलटा
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अब राजगढ़ कोर्ट में चलेगा केस, जिला अदालत ने कहा-सिर्फ समझौता नाहन में होने से नहीं मिलता क्षेत्राधिकार
2008-09 में जमीन के एक हिस्से का 2.40 लाख रुपये में सौदा होने का था दावा
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। नाहन की सिविल अदालत में करीब दो साल पहले तय हुआ जमीन विवाद का मुकदमा जिला अदालत में गलत क्षेत्राधिकार के सवाल पर पलट गया। जिला न्यायाधीश योगेश जसवाल ने ताजली बेगम की अपील मंजूर करते हुए 29 जून 2024 को सिविल अदालत की ओर से पारित निर्णय और डिक्री को निरस्त कर दिया।
अदालत ने माना कि विवादित जमीन पच्छाद तहसील के मौजा खैरी शल्यार में स्थित है और मामले में जमीन के विभाजन से जुड़े अधिकारों का भी सवाल है। ऐसे में नाहन की सिविल अदालत को मुकदमे की सुनवाई का क्षेत्राधिकार नहीं था। जिला अदालत ने सीपीसी के आदेश 7 नियम 10 के तहत वाद वापस करने के आदेश दिए हैं। अब इसे राजगढ़ की सक्षम अदालत में प्रस्तुत किया जा सकेगा।
मामले में वादी पक्ष ने दावा किया था कि 2008-09 में जमीन के एक हिस्से का 2.40 लाख रुपये में बिक्री समझौता हुआ था। इसके आधार पर जमीन का विभाजन करवाकर बिक्री विलेख पंजीकृत करने की मांग की गई थी। वहीं, ताजली बेगम ने समझौते और रकम प्राप्त करने से इन्कार किया था। उन्होंने कथित दस्तावेजों की सत्यता पर सवाल उठाते हुए मुकदमे का विरोध किया था। जिला अदालत ने स्पष्ट किया कि सिर्फ बिक्री समझौता नाहन में होने से नाहन की अदालत का अचल संपत्ति से जुड़े मुकदमे की क्षेत्रीय अधिकारिता नहीं मिल जाती। मामले में जमीन के अधिकार और उसके विभाजन का प्रश्न सीधे जुड़ा था।
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जिला जज ने कहा कि क्षेत्राधिकार के मुद्दे पर फैसला होने के बाद समझौते की वास्तविकता, भुगतान, सीमा अवधि और अन्य वैधानिक आपत्तियों पर कोई अंतिम राय नहीं दी गई है। इन सभी मुद्दों को सक्षम अदालत में तय किए जाने के लिए खुला रखा गया है।
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2008-09 में जमीन के एक हिस्से का 2.40 लाख रुपये में सौदा होने का था दावा
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। नाहन की सिविल अदालत में करीब दो साल पहले तय हुआ जमीन विवाद का मुकदमा जिला अदालत में गलत क्षेत्राधिकार के सवाल पर पलट गया। जिला न्यायाधीश योगेश जसवाल ने ताजली बेगम की अपील मंजूर करते हुए 29 जून 2024 को सिविल अदालत की ओर से पारित निर्णय और डिक्री को निरस्त कर दिया।
अदालत ने माना कि विवादित जमीन पच्छाद तहसील के मौजा खैरी शल्यार में स्थित है और मामले में जमीन के विभाजन से जुड़े अधिकारों का भी सवाल है। ऐसे में नाहन की सिविल अदालत को मुकदमे की सुनवाई का क्षेत्राधिकार नहीं था। जिला अदालत ने सीपीसी के आदेश 7 नियम 10 के तहत वाद वापस करने के आदेश दिए हैं। अब इसे राजगढ़ की सक्षम अदालत में प्रस्तुत किया जा सकेगा।
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मामले में वादी पक्ष ने दावा किया था कि 2008-09 में जमीन के एक हिस्से का 2.40 लाख रुपये में बिक्री समझौता हुआ था। इसके आधार पर जमीन का विभाजन करवाकर बिक्री विलेख पंजीकृत करने की मांग की गई थी। वहीं, ताजली बेगम ने समझौते और रकम प्राप्त करने से इन्कार किया था। उन्होंने कथित दस्तावेजों की सत्यता पर सवाल उठाते हुए मुकदमे का विरोध किया था। जिला अदालत ने स्पष्ट किया कि सिर्फ बिक्री समझौता नाहन में होने से नाहन की अदालत का अचल संपत्ति से जुड़े मुकदमे की क्षेत्रीय अधिकारिता नहीं मिल जाती। मामले में जमीन के अधिकार और उसके विभाजन का प्रश्न सीधे जुड़ा था।
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जिला जज ने कहा कि क्षेत्राधिकार के मुद्दे पर फैसला होने के बाद समझौते की वास्तविकता, भुगतान, सीमा अवधि और अन्य वैधानिक आपत्तियों पर कोई अंतिम राय नहीं दी गई है। इन सभी मुद्दों को सक्षम अदालत में तय किए जाने के लिए खुला रखा गया है।