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Sirmour News: वसूली विवाद में कारोबारी को राहत, आरोपी को 67,500 रुपये देने के आदेश
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साल 2024 का शिलाई क्षेत्र का मामला, प्रतिवादी ने वादी से किराये पर लिया था कमरा
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। सिविल न्यायाधीश की अदालत ने देनदारियों से जुड़े वसूली मामले में फैसला सुनाते हुए वादी जालम सिंह के पक्ष में आंशिक डिक्री पारित की है। न्यायाधीश विकास कपूर ने शिलाई निवासी कपिल को 67,500 रुपये की राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करने का आदेश दिया है।
यह मामला साल 2024 को शिलाई क्षेत्र का है। वादी जालम सिंह पेशे से कारोबारी हैं और प्रतिवादी उसका किरायेदार है। उसने कहा कि प्रतिवादी उसकी दुकान से घरेलू सामान खरीदता था। यह भी दावा किया था कि प्रतिवादी ने 50,000 रुपये उधार लिए थे, साथ ही 17,500 रुपये का घरेलू सामान भी उधार पर लिया था लेकिन प्रतिवादी ने दो महीने में भुगतान करने की बजाय किराये का कमरा भी छोड़ दिया।
आरोप लगाया कि रसीद/लिखित दस्तावेज में दिए गए वचन के अनुसार राशि का भुगतान नहीं किया गया है। कानूनी नोटिस का भी कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद अदालत में शिकायत दायर की गई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि मामला व्यावसायिक लेन-देन से जुड़ा है। वादी ने राशि उधार देने और प्रतिवादी को घरेलू सामान क्रेडिट पर आपूर्ति करने को साबित किया है। इसलिए साक्ष्यों के आधार पर प्रतिवादी को वाद दायर करने की तिथि से भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। इस प्रकार अदालत ने वसूली का दावा स्वीकार कर लिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। सिविल न्यायाधीश की अदालत ने देनदारियों से जुड़े वसूली मामले में फैसला सुनाते हुए वादी जालम सिंह के पक्ष में आंशिक डिक्री पारित की है। न्यायाधीश विकास कपूर ने शिलाई निवासी कपिल को 67,500 रुपये की राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करने का आदेश दिया है।
यह मामला साल 2024 को शिलाई क्षेत्र का है। वादी जालम सिंह पेशे से कारोबारी हैं और प्रतिवादी उसका किरायेदार है। उसने कहा कि प्रतिवादी उसकी दुकान से घरेलू सामान खरीदता था। यह भी दावा किया था कि प्रतिवादी ने 50,000 रुपये उधार लिए थे, साथ ही 17,500 रुपये का घरेलू सामान भी उधार पर लिया था लेकिन प्रतिवादी ने दो महीने में भुगतान करने की बजाय किराये का कमरा भी छोड़ दिया।
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आरोप लगाया कि रसीद/लिखित दस्तावेज में दिए गए वचन के अनुसार राशि का भुगतान नहीं किया गया है। कानूनी नोटिस का भी कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद अदालत में शिकायत दायर की गई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि मामला व्यावसायिक लेन-देन से जुड़ा है। वादी ने राशि उधार देने और प्रतिवादी को घरेलू सामान क्रेडिट पर आपूर्ति करने को साबित किया है। इसलिए साक्ष्यों के आधार पर प्रतिवादी को वाद दायर करने की तिथि से भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। इस प्रकार अदालत ने वसूली का दावा स्वीकार कर लिया।
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