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Sirmour News: बाघों के दीदार को बढ़ी उत्सुकता, रेणुकाजी में हो रही मेहमाननवाजी
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मिनी जू रेणुकाजी के इनडोर वार्ड में आराम फरमाता नया महेमान। संवाद
चिकित्सकों की निगरानी में टाइगर जोड़ा, 2 अक्तूबर को नए बाड़े में छोड़े जाएंगे; शीशे की दीवार से पर्यटक कर सकेंगे नजदीक से दीदार
योगेंद्र अग्रवाल
ददाहू (सिरमौर)। करीब एक दशक बाद मिनी जू रेणुकाजी में फिर बाघों की दहाड़ सुनाई देने की उम्मीद ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों की उत्सुकता बढ़ा दी है। रेणुकाजी पहुंचे टाइगर जोड़े की फिलहाल चिकित्सकों की निगरानी में खास मेहमानों की तरह देखभाल हो रही है। दोनों बाघों को इंडोर वार्ड में रखा गया है, जहां वन्य प्राणी विभाग उनके खान-पान से लेकर स्वास्थ्य तक पर विशेष नजर बनाए हुए है।
विभाग के अनुसार नए वातावरण में बाघों को ढलने में करीब 10 दिन का समय लगेगा। इसके बाद 2 अक्तूबर को दोनों को नवनिर्मित बाड़े में छोड़ने की तैयारी है। इसी दौरान उनका नामकरण भी किया जाएगा। पर्यटकों के लिए बनाए गए इस बाड़े की खासियत आधुनिक शीशे की दीवार होगी। इसके जरिए पर्यटक बाघों को बिना किसी बाधा के नजदीक से देख सकेंगे।
2015 के बाद फिर लौटेगी रौनक
मिनी जू रेणुकाजी में वर्ष 2015 में शेरों का पूरा वंश समाप्त होने के बाद वन्य प्राणी प्रेमियों के आकर्षण में कमी आई थी। अब टाइगर जोड़े के पहुंचने से एक दशक बाद मिनी जू में फिर से रौनक लौटने की उम्मीद जगी है। बाघों के नए बाड़े में आने के बाद पर्यटकों के लिए यह प्रमुख आकर्षण बनने की संभावना है।
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वन्य प्राणी मंडल शिमला के डीएफओ डॉ. शाहनवाज अहमद भट्ट ने बताया कि रेणुकाजी लाए गए बाघों के जोड़े की फिलहाल इंडोर वार्ड में सुरक्षित देखभाल की जा रही है। स्थानीय वातावरण के अनुकूल होने के बाद उन्हें नए बाड़े में छोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि बाघों के यहां सफलतापूर्वक रहने और प्रबंधन के सुखद परिणाम मिलने पर भविष्य में इनकी संख्या बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है।-- --
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योगेंद्र अग्रवाल
ददाहू (सिरमौर)। करीब एक दशक बाद मिनी जू रेणुकाजी में फिर बाघों की दहाड़ सुनाई देने की उम्मीद ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों की उत्सुकता बढ़ा दी है। रेणुकाजी पहुंचे टाइगर जोड़े की फिलहाल चिकित्सकों की निगरानी में खास मेहमानों की तरह देखभाल हो रही है। दोनों बाघों को इंडोर वार्ड में रखा गया है, जहां वन्य प्राणी विभाग उनके खान-पान से लेकर स्वास्थ्य तक पर विशेष नजर बनाए हुए है।
विभाग के अनुसार नए वातावरण में बाघों को ढलने में करीब 10 दिन का समय लगेगा। इसके बाद 2 अक्तूबर को दोनों को नवनिर्मित बाड़े में छोड़ने की तैयारी है। इसी दौरान उनका नामकरण भी किया जाएगा। पर्यटकों के लिए बनाए गए इस बाड़े की खासियत आधुनिक शीशे की दीवार होगी। इसके जरिए पर्यटक बाघों को बिना किसी बाधा के नजदीक से देख सकेंगे।
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2015 के बाद फिर लौटेगी रौनक
मिनी जू रेणुकाजी में वर्ष 2015 में शेरों का पूरा वंश समाप्त होने के बाद वन्य प्राणी प्रेमियों के आकर्षण में कमी आई थी। अब टाइगर जोड़े के पहुंचने से एक दशक बाद मिनी जू में फिर से रौनक लौटने की उम्मीद जगी है। बाघों के नए बाड़े में आने के बाद पर्यटकों के लिए यह प्रमुख आकर्षण बनने की संभावना है।
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वन्य प्राणी मंडल शिमला के डीएफओ डॉ. शाहनवाज अहमद भट्ट ने बताया कि रेणुकाजी लाए गए बाघों के जोड़े की फिलहाल इंडोर वार्ड में सुरक्षित देखभाल की जा रही है। स्थानीय वातावरण के अनुकूल होने के बाद उन्हें नए बाड़े में छोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि बाघों के यहां सफलतापूर्वक रहने और प्रबंधन के सुखद परिणाम मिलने पर भविष्य में इनकी संख्या बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है।