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Sirmour News: रामपुर-भारापुर पंचायत में दो बाइकों पर सैकड़ों क्विंटल रेत, बजरी, सीमेंट ढुलाई के आरोप
सार
नाहन की ग्राम पंचायत रामपुर-भारापुर में घोटाले के आरोपों की जांच हाईकोर्ट के आदेश पर विजिलेंस विभाग कर रहा है। उप प्रधान ने फर्जी बिलों और खनन फॉर्म के जरिए लाखों की गड़बड़ी का आरोप लगाया है। प्रधान ने आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया है।
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विस्तार
हाईकोर्ट के आदेश के बाद पंचायत में घोटाले के आरोपों की जांच शुरू
उप प्रधान ने आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों के साथ अगस्त में उच्च न्यायालय को भेजी थी शिकायत
विजिलेंस ने शिकायतकर्ता को बुलाया, नाहन में आयोजित पत्रकारवार्ता में उप प्रधान ने किए कई खुलासे
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। ग्राम पंचायत रामपुर-भारापुर में घोटाले के आरोपों के मामले में प्रदेश उच्च न्यायालय ने विजिलेंस विभाग को जांच के आदेश दिए हैं। यह जानकारी नाहन में आयोजित पत्रकारवार्ता में शिकायतकर्ता एवं ग्राम पंचायत रामपुर भारापुर के उप प्रधान रजनीश चौधरी ने दी। उन्होंने बताया कि विजिलेंस के नाहन कार्यालय की ओर से उन्हें 24 सितंबर को फोन कर बुलाया गया था। इसके बाद उन्होंने सभी तथ्य विजिलेंस के सामने प्रस्तुत किए हैं। उम्मीद है कि इस मामले में निष्पक्ष जांच होगी।
चौधरी ने कहा कि पंचायत में मात्र वित्तीय वर्ष 2024-25 में हुए विकास कार्यों को लेकर सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी एकत्रित की गई थी। जानकारी प्राप्त हाेने के बाद चौकाने वाले तथ्य सामने आए। उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायत प्रधान ने फर्जी बिल और फर्जी एक्स फाॅर्म तैयार करके लाखों के घोटाला को अंजाम दिया। इन फर्जी बिल और फर्जी खनन एक्स फार्म के आधार पर दो मोटरसाइकिल पर सैकड़ों क्विंटल रेत, बजरी, सीमेंट व अन्य खनन सामग्री की ढुलाई दर्शाई गई है।
उन्होंने बताया कि पांवटा में स्थित क्रशर और पंचायतघर के बीच की दूरी आना-जाना लगभग 42 किलोमीटर है और हैरानी की बात यह है कि एक ही चालक को दो वाहनों को चलाकर पांवटा साहिब से रामपुर भारापुर पंचायत तक 42 किलोमीटर का रास्ता तय करने में 10 मिनट का समय लगा। यह समय अवधि खनन एक्स फार्म में साफ लिखी है। इतना ही नहीं चौपहिया वाहन जिसकी भार ढुलाई क्षमता 945 किलोग्राम थी और उस वाहन में खनन सामग्री लगभग 2170 किलोग्राम ढुलाई कर दी। आरटीओ ऑफिस नाहन व पंचायत से ली आरटीआई में यह गड़बड़ सामने आई है। एक्स फॉर्म में वाहन के मालिक का नाम कुलदीप और ड्राइवर का नाम कमल व मनु दर्शाए गए। उनके मोबाइल नंबर भी इनवेलिड हैं। वाहन मालिक कमल और ड्राइवर मनु कौन हैं इसकी पहचान आरटीआई में नहीं हो पाई। उन्होंने बताया कि खनन एक्स फॉर्म की सीरीज 80 नंबर 4 दिसंबर 2024 को काटा गया, जबकि 84 नंबर और 85 नंबर 3 दिसंबर को काटा गया। इसके अलावा एक ही तिथि में दो बिल एक जैसी राशि के काटे गए जो कई सवाल खड़े करते हैं।
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उन्होंने बताया कि आरटीआई के माध्यम से ठोस सबूतों के आधार पर हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था और मुख्य न्यायाधीश से शिकायत की थी। शिकायत में वित्तीय वर्ष 2024-25 में लगभग 35 लाख का घोटाला होने की आशंका है। उन्होंने बताया कि यदि अन्य वर्षों की भी जांच की जाए तो करोड़ों का घोटाला सामने आ सकता है। उन्होंने पंचायत प्रधान, ठेकेदार और सहयोगियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच करने की मांग उठाई है।
......बाक्स..........
पंचायत की बैठकों में होते हैं प्रस्ताव पास : प्रधान
रामपुर-भारापुर पंचायत के प्रधान ज्ञान चंद ने बताया कि जो उन पर आरोप लगा रहे हैं वे पंचायत के उप प्रधान हैं और पंचायत में विकास कार्यों के प्रस्ताव उनकी उपस्थिति में ही बैठकों में पास होते हैं। राजनीतिक रंजिश के चलते आरोप लगाए जा रहे हैं। अब पंचायत चुनाव सिर पर हैं, ऐसे में उन्हें आने वाले चुनाव में नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
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उप प्रधान ने आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों के साथ अगस्त में उच्च न्यायालय को भेजी थी शिकायत
विजिलेंस ने शिकायतकर्ता को बुलाया, नाहन में आयोजित पत्रकारवार्ता में उप प्रधान ने किए कई खुलासे
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। ग्राम पंचायत रामपुर-भारापुर में घोटाले के आरोपों के मामले में प्रदेश उच्च न्यायालय ने विजिलेंस विभाग को जांच के आदेश दिए हैं। यह जानकारी नाहन में आयोजित पत्रकारवार्ता में शिकायतकर्ता एवं ग्राम पंचायत रामपुर भारापुर के उप प्रधान रजनीश चौधरी ने दी। उन्होंने बताया कि विजिलेंस के नाहन कार्यालय की ओर से उन्हें 24 सितंबर को फोन कर बुलाया गया था। इसके बाद उन्होंने सभी तथ्य विजिलेंस के सामने प्रस्तुत किए हैं। उम्मीद है कि इस मामले में निष्पक्ष जांच होगी।
चौधरी ने कहा कि पंचायत में मात्र वित्तीय वर्ष 2024-25 में हुए विकास कार्यों को लेकर सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी एकत्रित की गई थी। जानकारी प्राप्त हाेने के बाद चौकाने वाले तथ्य सामने आए। उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायत प्रधान ने फर्जी बिल और फर्जी एक्स फाॅर्म तैयार करके लाखों के घोटाला को अंजाम दिया। इन फर्जी बिल और फर्जी खनन एक्स फार्म के आधार पर दो मोटरसाइकिल पर सैकड़ों क्विंटल रेत, बजरी, सीमेंट व अन्य खनन सामग्री की ढुलाई दर्शाई गई है।
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उन्होंने बताया कि पांवटा में स्थित क्रशर और पंचायतघर के बीच की दूरी आना-जाना लगभग 42 किलोमीटर है और हैरानी की बात यह है कि एक ही चालक को दो वाहनों को चलाकर पांवटा साहिब से रामपुर भारापुर पंचायत तक 42 किलोमीटर का रास्ता तय करने में 10 मिनट का समय लगा। यह समय अवधि खनन एक्स फार्म में साफ लिखी है। इतना ही नहीं चौपहिया वाहन जिसकी भार ढुलाई क्षमता 945 किलोग्राम थी और उस वाहन में खनन सामग्री लगभग 2170 किलोग्राम ढुलाई कर दी। आरटीओ ऑफिस नाहन व पंचायत से ली आरटीआई में यह गड़बड़ सामने आई है। एक्स फॉर्म में वाहन के मालिक का नाम कुलदीप और ड्राइवर का नाम कमल व मनु दर्शाए गए। उनके मोबाइल नंबर भी इनवेलिड हैं। वाहन मालिक कमल और ड्राइवर मनु कौन हैं इसकी पहचान आरटीआई में नहीं हो पाई। उन्होंने बताया कि खनन एक्स फॉर्म की सीरीज 80 नंबर 4 दिसंबर 2024 को काटा गया, जबकि 84 नंबर और 85 नंबर 3 दिसंबर को काटा गया। इसके अलावा एक ही तिथि में दो बिल एक जैसी राशि के काटे गए जो कई सवाल खड़े करते हैं।
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उन्होंने बताया कि आरटीआई के माध्यम से ठोस सबूतों के आधार पर हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था और मुख्य न्यायाधीश से शिकायत की थी। शिकायत में वित्तीय वर्ष 2024-25 में लगभग 35 लाख का घोटाला होने की आशंका है। उन्होंने बताया कि यदि अन्य वर्षों की भी जांच की जाए तो करोड़ों का घोटाला सामने आ सकता है। उन्होंने पंचायत प्रधान, ठेकेदार और सहयोगियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच करने की मांग उठाई है।
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पंचायत की बैठकों में होते हैं प्रस्ताव पास : प्रधान
रामपुर-भारापुर पंचायत के प्रधान ज्ञान चंद ने बताया कि जो उन पर आरोप लगा रहे हैं वे पंचायत के उप प्रधान हैं और पंचायत में विकास कार्यों के प्रस्ताव उनकी उपस्थिति में ही बैठकों में पास होते हैं। राजनीतिक रंजिश के चलते आरोप लगाए जा रहे हैं। अब पंचायत चुनाव सिर पर हैं, ऐसे में उन्हें आने वाले चुनाव में नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।