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Sirmour News: गैर इरादतन हत्या का आरोपी बरी, एमवी एक्ट में ठहराया दोषी
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संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। चौदह साल पुराने सड़क हादसे के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने आरोपी विक्रम सिंह को राहत देते हुए गैर इरादतन हत्या, लापरवाही से वाहन चलाने, चोट पहुंचाने और साक्ष्य मिटाने के आरोपों से बरी कर दिया। ट्रायल कोर्ट ने अक्तूबर 2024 में उसे अधिकतम छह महीने के कारावास और 3,700 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। हालांकि, अदालत ने मोटर वाहन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दी गई 3,000 रुपये की दोषसिद्धि को बरकरार रखा।
मामला 8 जून 2012 को माजरा थाना में दर्ज किया गया था। सड़क हादसे में मोटरसाइकिल सवार की मौत हो गई थी, जबकि चालक घायल हुआ था। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी विक्रम को आईपीसी और मोटर वाहन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया था। इसके खिलाफ आरोपी ने अपील दायर की थी।
अपीलीय अदालत ने कहा कि अभियोजन के प्रमुख प्रत्यक्षदर्शियों के बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खाते। किसी गवाह ने तीसरे वाहन का जिक्र किया, तो किसी ने मृतक को ही वाहन चालक बताया। कई गवाह अपने पूर्व बयानों से मुकर गए या उनके बयान विरोधाभासी रहे। ऐसे में यह संदेह से परे साबित नहीं हो सका कि दुर्घटना आरोपी की लापरवाही के कारण हुई थी।
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नाहन (सिरमौर)। चौदह साल पुराने सड़क हादसे के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने आरोपी विक्रम सिंह को राहत देते हुए गैर इरादतन हत्या, लापरवाही से वाहन चलाने, चोट पहुंचाने और साक्ष्य मिटाने के आरोपों से बरी कर दिया। ट्रायल कोर्ट ने अक्तूबर 2024 में उसे अधिकतम छह महीने के कारावास और 3,700 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। हालांकि, अदालत ने मोटर वाहन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दी गई 3,000 रुपये की दोषसिद्धि को बरकरार रखा।
मामला 8 जून 2012 को माजरा थाना में दर्ज किया गया था। सड़क हादसे में मोटरसाइकिल सवार की मौत हो गई थी, जबकि चालक घायल हुआ था। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी विक्रम को आईपीसी और मोटर वाहन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया था। इसके खिलाफ आरोपी ने अपील दायर की थी।
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अपीलीय अदालत ने कहा कि अभियोजन के प्रमुख प्रत्यक्षदर्शियों के बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खाते। किसी गवाह ने तीसरे वाहन का जिक्र किया, तो किसी ने मृतक को ही वाहन चालक बताया। कई गवाह अपने पूर्व बयानों से मुकर गए या उनके बयान विरोधाभासी रहे। ऐसे में यह संदेह से परे साबित नहीं हो सका कि दुर्घटना आरोपी की लापरवाही के कारण हुई थी।
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