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Sirmour News: दिव्यांगता प्रमाण पत्र के लिए सैकड़ों किलोमीटर का सफर, फिर भी घंटों इंतजार
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मेडिकल बोर्ड नियमित नहीं बैठने से कई-कई चक्कर लगाने को मजबूर, हजारों रुपये भी हो रहे खर्च
ओपीडी में हो रही जांच, प्रमाण पत्र के लिए बार-बार नाहन पहुंच रहे लोग
विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से दिव्यांगों को समय पर नहीं मिल पा रही मेडिकल सुविधा
धर्म सिंह तोमर
नाहन (सिरमौर)। सुबह के करीब 11 बजे। मेडिकल कॉलेज नाहन की ओपीडी में मरीजों की लंबी कतार लगी है। इन्हीं कतारों में व्हीलचेयर, बैसाखियों और परिजनों के सहारे खड़े कई दिव्यांगजन भी बारी का इंतजार कर रहे हैं। किसी को पेंशन जारी रखने के लिए मेडिकल करवाना है, तो किसी को दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाना है। यहां पहुंचना और प्रमाणप त्र बनाने उनकी सबसे बड़ी परीक्षा बन गया है।
प्रमाण पत्र के लिए वे सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर मेडिकल कॉलेज नाहन पहुंचे हैं। यहां भी चिकित्सकों की कमी के कारण मेडिकल बोर्ड नियमित रूप से नहीं बैठ पाता है। नतीजतन दिव्यांगों को सामान्य मरीजों के साथ ओपीडी में घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
एक मेडिकल के लिए कई-कई चक्कर
जिले में दिव्यांगता मेडिकल की मुख्य सुविधा मेडिकल कॉलेज नाहन में ही उपलब्ध है। कुछ मामलों में सिविल अस्पताल पांवटा साहिब में मेडिकल बोर्ड बैठता है, लेकिन जिले के अधिकांश दुर्गम क्षेत्रों राजगढ़, हरिपुरधार, नौहराधार, संगड़ाह, शिलाई, ददाहू, पच्छाद, सराहां, बड़ू साहिब और चांदनी से आने वाले लोगों के लिए यहां पहुंचना आसान नहीं है।
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यहां पहुंचे दिव्यांगों ने बताया कि मेडिकल एक ही दिन में नहीं हो पाता। उन्हें दो, तीन और कई बार चार-पांच बार तक नाहन आना पड़ता है। हर बार किराया, भोजन और साथ आने वाले परिजनों का खर्च अलग से उठाना पड़ता है। कई लोगों की शारीरिक स्थिति ऐसी है कि वे सामान्य बसों में सफर नहीं कर सकते। मजबूरी में टैक्सी या निजी वाहन किराये पर लेने पड़ते हैं, जिससे हजारों रुपये खर्च हो जाते हैं।
डॉक्टर एक, जिम्मेदारियां कई
मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी का असर दिव्यांग मेडिकल प्रक्रिया पर साफ दिखाई देता है। कई विभागों में केवल एक-एक विशेषज्ञ चिकित्सक तैनात हैं। यही डॉक्टर ओपीडी में सामान्य मरीजों का इलाज भी करते हैं और दिव्यांगों की मेडिकल जांच भी। ऐसे में पहले सामान्य मरीजों की भीड़ संभालनी पड़ती है, फिर मेडिकल जांच की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसका सबसे ज्यादा असर उन दिव्यांगों पर पड़ता है, जो सुबह से इंतजार कर रहे होते हैं।
पांचवीं बार आई हूं, अब पेंशन बंद होने का डर
बड़ू साहिब से आईं निर्मला देवी की कहानी इस व्यवस्था की सबसे दर्दनाक तस्वीर पेश करती है। निर्मला बताती हैं कि नौ साल की उम्र में आग से झुलसने के कारण वे दिव्यांग हो गई थीं। वर्षों से उन्हें दिव्यांग पेंशन मिल रही है, लेकिन अब दोबारा मेडिकल करवाने के निर्देश मिले हैं। विभाग ने साफ कहा है कि मेडिकल नहीं हुआ तो पेंशन बंद हो सकती है। निर्मला कहती हैं, ‘मैं मेडिकल के लिए पांचवीं बार नाहन आई हूं। दोपहर साढ़े बारह बजे तक भी जांच नहीं हो पाई। आने-जाने में करीब 20 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। मेरे पति की रीढ़ की हड्डी टूट चुकी है। वे भी काम नहीं कर सकते। हमारे परिवार का सहारा सिर्फ पेंशन है।’
सुविधा उपमंडल स्तर तक पहुंचे
नौहराधार से आए पुष्पेंद्र का कहना है कि यदि उपमंडल स्तर या नजदीकी अस्पतालों में मेडिकल बोर्ड की सुविधा मिले तो दिव्यांगों को लंबी यात्राओं से राहत मिल सकती है।
पांवटा साहिब से पहुंचे शलिंद्र सिंह का कहना है कि जिले के सभी सिविल अस्पतालों में नियमित मेडिकल बोर्ड गठित किए जाने चाहिए, ताकि लोगों को बार-बार नाहन न आना पड़े।
हर वीरवार को दिव्यांगों के मेडिकल किए जाते हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण कई बार मेडिकल बोर्ड एक साथ नहीं बैठ पाता। ऐसे में ओपीडी में ही जांच करनी पड़ती है। विशेष परेशानी की स्थिति में चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय में शिकायत की जा सकती है।
-डॉ. रेणू चौहान, चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नाहन
दिव्यांग मेडिकल की सुविधा मेडिकल कॉलेज नाहन और सिविल अस्पताल पांवटा साहिब में है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता के लिए मेडिकल का एक दिन निर्धारित किया गया है।
-डॉ. राकेश प्रताप, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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ओपीडी में हो रही जांच, प्रमाण पत्र के लिए बार-बार नाहन पहुंच रहे लोग
विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से दिव्यांगों को समय पर नहीं मिल पा रही मेडिकल सुविधा
धर्म सिंह तोमर
नाहन (सिरमौर)। सुबह के करीब 11 बजे। मेडिकल कॉलेज नाहन की ओपीडी में मरीजों की लंबी कतार लगी है। इन्हीं कतारों में व्हीलचेयर, बैसाखियों और परिजनों के सहारे खड़े कई दिव्यांगजन भी बारी का इंतजार कर रहे हैं। किसी को पेंशन जारी रखने के लिए मेडिकल करवाना है, तो किसी को दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाना है। यहां पहुंचना और प्रमाणप त्र बनाने उनकी सबसे बड़ी परीक्षा बन गया है।
प्रमाण पत्र के लिए वे सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर मेडिकल कॉलेज नाहन पहुंचे हैं। यहां भी चिकित्सकों की कमी के कारण मेडिकल बोर्ड नियमित रूप से नहीं बैठ पाता है। नतीजतन दिव्यांगों को सामान्य मरीजों के साथ ओपीडी में घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
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एक मेडिकल के लिए कई-कई चक्कर
जिले में दिव्यांगता मेडिकल की मुख्य सुविधा मेडिकल कॉलेज नाहन में ही उपलब्ध है। कुछ मामलों में सिविल अस्पताल पांवटा साहिब में मेडिकल बोर्ड बैठता है, लेकिन जिले के अधिकांश दुर्गम क्षेत्रों राजगढ़, हरिपुरधार, नौहराधार, संगड़ाह, शिलाई, ददाहू, पच्छाद, सराहां, बड़ू साहिब और चांदनी से आने वाले लोगों के लिए यहां पहुंचना आसान नहीं है।
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यहां पहुंचे दिव्यांगों ने बताया कि मेडिकल एक ही दिन में नहीं हो पाता। उन्हें दो, तीन और कई बार चार-पांच बार तक नाहन आना पड़ता है। हर बार किराया, भोजन और साथ आने वाले परिजनों का खर्च अलग से उठाना पड़ता है। कई लोगों की शारीरिक स्थिति ऐसी है कि वे सामान्य बसों में सफर नहीं कर सकते। मजबूरी में टैक्सी या निजी वाहन किराये पर लेने पड़ते हैं, जिससे हजारों रुपये खर्च हो जाते हैं।
डॉक्टर एक, जिम्मेदारियां कई
मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी का असर दिव्यांग मेडिकल प्रक्रिया पर साफ दिखाई देता है। कई विभागों में केवल एक-एक विशेषज्ञ चिकित्सक तैनात हैं। यही डॉक्टर ओपीडी में सामान्य मरीजों का इलाज भी करते हैं और दिव्यांगों की मेडिकल जांच भी। ऐसे में पहले सामान्य मरीजों की भीड़ संभालनी पड़ती है, फिर मेडिकल जांच की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसका सबसे ज्यादा असर उन दिव्यांगों पर पड़ता है, जो सुबह से इंतजार कर रहे होते हैं।
पांचवीं बार आई हूं, अब पेंशन बंद होने का डर
बड़ू साहिब से आईं निर्मला देवी की कहानी इस व्यवस्था की सबसे दर्दनाक तस्वीर पेश करती है। निर्मला बताती हैं कि नौ साल की उम्र में आग से झुलसने के कारण वे दिव्यांग हो गई थीं। वर्षों से उन्हें दिव्यांग पेंशन मिल रही है, लेकिन अब दोबारा मेडिकल करवाने के निर्देश मिले हैं। विभाग ने साफ कहा है कि मेडिकल नहीं हुआ तो पेंशन बंद हो सकती है। निर्मला कहती हैं, ‘मैं मेडिकल के लिए पांचवीं बार नाहन आई हूं। दोपहर साढ़े बारह बजे तक भी जांच नहीं हो पाई। आने-जाने में करीब 20 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। मेरे पति की रीढ़ की हड्डी टूट चुकी है। वे भी काम नहीं कर सकते। हमारे परिवार का सहारा सिर्फ पेंशन है।’
सुविधा उपमंडल स्तर तक पहुंचे
नौहराधार से आए पुष्पेंद्र का कहना है कि यदि उपमंडल स्तर या नजदीकी अस्पतालों में मेडिकल बोर्ड की सुविधा मिले तो दिव्यांगों को लंबी यात्राओं से राहत मिल सकती है।
पांवटा साहिब से पहुंचे शलिंद्र सिंह का कहना है कि जिले के सभी सिविल अस्पतालों में नियमित मेडिकल बोर्ड गठित किए जाने चाहिए, ताकि लोगों को बार-बार नाहन न आना पड़े।
हर वीरवार को दिव्यांगों के मेडिकल किए जाते हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण कई बार मेडिकल बोर्ड एक साथ नहीं बैठ पाता। ऐसे में ओपीडी में ही जांच करनी पड़ती है। विशेष परेशानी की स्थिति में चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय में शिकायत की जा सकती है।
-डॉ. रेणू चौहान, चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नाहन
दिव्यांग मेडिकल की सुविधा मेडिकल कॉलेज नाहन और सिविल अस्पताल पांवटा साहिब में है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता के लिए मेडिकल का एक दिन निर्धारित किया गया है।
-डॉ. राकेश प्रताप, मुख्य चिकित्सा अधिकारी