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खतरे में लाखों का बागवानी कारोबार
Sirmour
Updated Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
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खतरे में लाखों का बागवानी कारोबार
शिलाई (सिरमौर)। ढाई माह से बारिश न होने के कारण यहां के बागवानों को
खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है। बारिश न होने से फलदार पौधों की कटिंग, प्रोनिंग तथा तोलिए बनाने का काम पूरी तरह चौपट पड़ा है। यदि बागवान यह कामकम नमी में करते हैं तो टहनियां सूखने का खतरा रहता है। तोलिए बनाते समय यदि कम नमी में पेड़ की कोई जड़ कट गई तो पौधे भी सूख जाते हैं। पौधे की प्रोनिंग और तोलिए न बनाए गए तो अच्छी फसल नहीं मिलेगी। लिहाजा सैकड़ों बागवान बारिश के इंतजार में हैं। क्षेत्र के करीब तीन सौ परिवार सीधे रूप से बागवानी पर निर्भर हैं।
गिरीपार क्षेत्र के किसान-बागवान इन दिनों फलदार पौधे की कटिंग, प्रोनिंग और तोलिए बनाते हैं। क्षेत्र के बागवान सूरत सिंह, रमेश, जितेंद्र, भवान सिंह, तोता राम, आत्मा राम और गंगा राम सहित दर्जनों बागवानों का कहना है कि सूखे के चलते कटिंग, प्रोनिंग और तोलिए बनाने के कार्यों में दिक्कत आ रही हैं। कहा कि यदि कई बार ज्यादा कटिंग हो जाए या पौधे की जड़ कट जाए तो पौधे के सूखने का भय लगा रहता हैं।
बागवानों का यह भी कहना है कि पौधों के तोलिए बनाकर पौधों में नीला थोथा और चूने का लेप किया जाता है। इससे बुलिएफिट रोग नहीं लगता। बारिश न होने से जहां यह सारा कार्य रुक गया है वहीं आगे गर्मियों में पौधों को नमी न मिलने से फसल कम होगी। इससे किसानों को लाखों की क्षति होगी। इन दिनों सेब, आडू, पलम, नाशपती और खुमानी की कटिंग का कार्य जरूरी है। यदि यह न हुआ तो किसानों को काफी क्षति होगी।
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इंसेट
पेड़ों की जड़ों पर डालें घास
उद्यान विकास अधिकारी शिलाई रितेश शर्मा का कहना है कि इन दिनों पौधों की कटिंग और तोलिए बनाना अनिवार्य है। इससे पेड़ों में आने वाले फल विकसित होते हैं। किसान-बागवान सावधानी से कटिंग करें। पेड़ों की जड़ों पर घास डालें। ऐसे में उसमें नमी बरकरार रहती है।
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शिलाई (सिरमौर)। ढाई माह से बारिश न होने के कारण यहां के बागवानों को
खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है। बारिश न होने से फलदार पौधों की कटिंग, प्रोनिंग तथा तोलिए बनाने का काम पूरी तरह चौपट पड़ा है। यदि बागवान यह कामकम नमी में करते हैं तो टहनियां सूखने का खतरा रहता है। तोलिए बनाते समय यदि कम नमी में पेड़ की कोई जड़ कट गई तो पौधे भी सूख जाते हैं। पौधे की प्रोनिंग और तोलिए न बनाए गए तो अच्छी फसल नहीं मिलेगी। लिहाजा सैकड़ों बागवान बारिश के इंतजार में हैं। क्षेत्र के करीब तीन सौ परिवार सीधे रूप से बागवानी पर निर्भर हैं।
गिरीपार क्षेत्र के किसान-बागवान इन दिनों फलदार पौधे की कटिंग, प्रोनिंग और तोलिए बनाते हैं। क्षेत्र के बागवान सूरत सिंह, रमेश, जितेंद्र, भवान सिंह, तोता राम, आत्मा राम और गंगा राम सहित दर्जनों बागवानों का कहना है कि सूखे के चलते कटिंग, प्रोनिंग और तोलिए बनाने के कार्यों में दिक्कत आ रही हैं। कहा कि यदि कई बार ज्यादा कटिंग हो जाए या पौधे की जड़ कट जाए तो पौधे के सूखने का भय लगा रहता हैं।
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बागवानों का यह भी कहना है कि पौधों के तोलिए बनाकर पौधों में नीला थोथा और चूने का लेप किया जाता है। इससे बुलिएफिट रोग नहीं लगता। बारिश न होने से जहां यह सारा कार्य रुक गया है वहीं आगे गर्मियों में पौधों को नमी न मिलने से फसल कम होगी। इससे किसानों को लाखों की क्षति होगी। इन दिनों सेब, आडू, पलम, नाशपती और खुमानी की कटिंग का कार्य जरूरी है। यदि यह न हुआ तो किसानों को काफी क्षति होगी।
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पेड़ों की जड़ों पर डालें घास
उद्यान विकास अधिकारी शिलाई रितेश शर्मा का कहना है कि इन दिनों पौधों की कटिंग और तोलिए बनाना अनिवार्य है। इससे पेड़ों में आने वाले फल विकसित होते हैं। किसान-बागवान सावधानी से कटिंग करें। पेड़ों की जड़ों पर घास डालें। ऐसे में उसमें नमी बरकरार रहती है।