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बरसात में मलबे से लबालब रहता है पुरूवाला चौक
Updated Wed, 11 Jul 2018 10:16 PM IST
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बरसात में बदल जाती है पुरूवाला चौक की सूरत
कई दशक बीते, किसी भी नेता ने नहीं ली सुध
पैदल राहगीर और दापेहिया वाहन चालकों को दिक्कत
अमर उजाला ब्यूरो
पांवटा साहिब/राजपुर (सिरमौर)। पंद्रह पंचायतों को जोड़ने वाले पुरूवाला चौक की हालत बद से बदतर हो चुकी है। लेकिन, प्रदेश में बनने वाली कोई भी सरकार इसकी सुध नहीं ले रही है। इसके कारण यह चौक पुरूवाला-सालवाला के लोगों के लिए जी का जंजाल बन गया है। 1982 में बांगरण पुल के बाद इस चौक का निर्माण किया गया था। बरसात के दिनों में पुरूवाला चौक रेत, बजरी और मलबे से लबालब रहता है, जो दोपहिया वाहनों और पैदल राहगीरों के लिए जी का जंजाल बन जाता है। हालांकि, सरकार और विभाग चौक पर आने वाली दोपहरिया खड्ड के चैनेलाइजेशन की बात कई बार कर चुके हैं लेकिन बरसात जाते ही इसका जिक्र तक भूल जाते हैं। ऐतिहासिक गुरुद्वारा भगाणी साहिब, गुरुद्वारा श्री तीरगढ़ी, शिव मंदिर धौलीढांग सहित कई तीर्थों का रास्ता यहीं से होकर गुजरता है, जिससे लोगों का यहां हुजूम उमड़ा रहता है। फिर भी इसकी सुध नहीं ली जा रही है। इसके अलावा आस-पास की सभी संपर्क सड़कें खस्ताहाल हो चुकी हैं। क्षेत्र के लोगों राजीव, आकाश, रामदयाल, भूषण लाल, कंवर सिंह ने इस चौक की बदहाल दशा सुधारने की मांग की है। उधर, लोनिवि के अधिशासी अभियंता अजय शर्मा ने कहा कि बरसात के दिनों में पुरूवाला चौक की हालत खराब रहती है। दाएं-बाएं पानी की निकासी बंद होने से दोपहरिया खड्ड का मलबा यहां आ जाता है। इस समस्या के समाधान का प्रयास किया जाएगा।
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कई दशक बीते, किसी भी नेता ने नहीं ली सुध
पैदल राहगीर और दापेहिया वाहन चालकों को दिक्कत
अमर उजाला ब्यूरो
पांवटा साहिब/राजपुर (सिरमौर)। पंद्रह पंचायतों को जोड़ने वाले पुरूवाला चौक की हालत बद से बदतर हो चुकी है। लेकिन, प्रदेश में बनने वाली कोई भी सरकार इसकी सुध नहीं ले रही है। इसके कारण यह चौक पुरूवाला-सालवाला के लोगों के लिए जी का जंजाल बन गया है। 1982 में बांगरण पुल के बाद इस चौक का निर्माण किया गया था। बरसात के दिनों में पुरूवाला चौक रेत, बजरी और मलबे से लबालब रहता है, जो दोपहिया वाहनों और पैदल राहगीरों के लिए जी का जंजाल बन जाता है। हालांकि, सरकार और विभाग चौक पर आने वाली दोपहरिया खड्ड के चैनेलाइजेशन की बात कई बार कर चुके हैं लेकिन बरसात जाते ही इसका जिक्र तक भूल जाते हैं। ऐतिहासिक गुरुद्वारा भगाणी साहिब, गुरुद्वारा श्री तीरगढ़ी, शिव मंदिर धौलीढांग सहित कई तीर्थों का रास्ता यहीं से होकर गुजरता है, जिससे लोगों का यहां हुजूम उमड़ा रहता है। फिर भी इसकी सुध नहीं ली जा रही है। इसके अलावा आस-पास की सभी संपर्क सड़कें खस्ताहाल हो चुकी हैं। क्षेत्र के लोगों राजीव, आकाश, रामदयाल, भूषण लाल, कंवर सिंह ने इस चौक की बदहाल दशा सुधारने की मांग की है। उधर, लोनिवि के अधिशासी अभियंता अजय शर्मा ने कहा कि बरसात के दिनों में पुरूवाला चौक की हालत खराब रहती है। दाएं-बाएं पानी की निकासी बंद होने से दोपहरिया खड्ड का मलबा यहां आ जाता है। इस समस्या के समाधान का प्रयास किया जाएगा।