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परीक्षा उतीर्ण वर्ष को ही बैच वर्ष माने शिक्षा विभाग
Updated Tue, 23 Jan 2018 11:15 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)।
हिमाचल बेरोजगार शास्त्री संघ ने प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग से उत्तीर्ण वर्ष को ही बैच वर्ष मानने की मांग की है। अपनी इस मांग को लेकर संघ का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को विधानसभा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल से नाहन सर्किट हाउस में मिला। इस दौरान उन्हें एक ज्ञापन भी सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल अमन कुमार, सुरेंद्र पाल, धीरज कुमार, पंकज, अरुणा, अनु, दीपा तोमर, अंजू देवी ने उन्हें बताया कि शिक्षा विभाग ने वर्ष 2009 में आएंडपी नियम में यह प्रावधान किया कि अबसे शिक्षा विभाग में जो भी भर्तियां होंगी उसके लिए 50 प्रतिशत अंक के साथ अध्यापक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की होनी आवश्यक है। ऐसे में वर्ष 2009 से पूर्व जिन विद्यार्थियों ने शास्त्री की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। उस दौरान उनके 50 प्रतिशत से कहीं कम नंबर थे जिसके चलते सरकार ने शास्त्री उत्तीर्ण विद्यार्थियों को अंक सुधार का मौका दिया। इसके लिए 5 हजार रुपये प्रति कक्षा व विषय का उनसे शुल्क लिया गया।
अधिकतर शास्त्री छात्रों ने वर्ष 2012-13 के बैच में ही अपने अंकों में सुधार कर लिया। साथ ही अध्यापक पात्रता परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली लेकिन जब वर्ष 2016-17 में बैच वाइज भर्तियां हुईं तो शिक्षा विभाग ने शास्त्री छात्रों को उत्तीर्ण वर्ष न मानकर विवि से जारी अंक तालिका की तिथि को बैच वर्ष माना। जिस छात्र ने वर्ष 2001 में यह परीक्षा उत्तीर्ण की थी उसे भी 2017 के बैच का विद्यार्थी माना। ऐसे मेें सैकड़ों बेरोजगार शास्त्री सरकारी नौकरी से वंचित रह गए।
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इसके बाद मामला ट्रिब्यूनल में गया तो उन्होंने भी उत्तीर्ण वर्ष को ही बैच वर्ष मानने के निर्देश जारी किए लेकिन शिक्षा विभाग उस फैसले को भी नहीं मान रहा है। इस वजह से उनका भविष्य अधर में लटक गया है।
बेरोजगार शास्त्रियों ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल से मांग की कि उन सभी श्रेणी सुधारकों का उत्तीर्ण वर्ष ही बैच वर्ष माना जाए तथा इसकी अधिसूचना शीघ्र जारी की जाए। विस अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने संघ को विश्वास दिलाया कि उनकी मांगों को सरकार व शिक्षा विभाग के समक्ष रख इसका समाधान किया जाएगा।
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नाहन (सिरमौर)।
हिमाचल बेरोजगार शास्त्री संघ ने प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग से उत्तीर्ण वर्ष को ही बैच वर्ष मानने की मांग की है। अपनी इस मांग को लेकर संघ का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को विधानसभा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल से नाहन सर्किट हाउस में मिला। इस दौरान उन्हें एक ज्ञापन भी सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल अमन कुमार, सुरेंद्र पाल, धीरज कुमार, पंकज, अरुणा, अनु, दीपा तोमर, अंजू देवी ने उन्हें बताया कि शिक्षा विभाग ने वर्ष 2009 में आएंडपी नियम में यह प्रावधान किया कि अबसे शिक्षा विभाग में जो भी भर्तियां होंगी उसके लिए 50 प्रतिशत अंक के साथ अध्यापक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की होनी आवश्यक है। ऐसे में वर्ष 2009 से पूर्व जिन विद्यार्थियों ने शास्त्री की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। उस दौरान उनके 50 प्रतिशत से कहीं कम नंबर थे जिसके चलते सरकार ने शास्त्री उत्तीर्ण विद्यार्थियों को अंक सुधार का मौका दिया। इसके लिए 5 हजार रुपये प्रति कक्षा व विषय का उनसे शुल्क लिया गया।
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अधिकतर शास्त्री छात्रों ने वर्ष 2012-13 के बैच में ही अपने अंकों में सुधार कर लिया। साथ ही अध्यापक पात्रता परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली लेकिन जब वर्ष 2016-17 में बैच वाइज भर्तियां हुईं तो शिक्षा विभाग ने शास्त्री छात्रों को उत्तीर्ण वर्ष न मानकर विवि से जारी अंक तालिका की तिथि को बैच वर्ष माना। जिस छात्र ने वर्ष 2001 में यह परीक्षा उत्तीर्ण की थी उसे भी 2017 के बैच का विद्यार्थी माना। ऐसे मेें सैकड़ों बेरोजगार शास्त्री सरकारी नौकरी से वंचित रह गए।
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इसके बाद मामला ट्रिब्यूनल में गया तो उन्होंने भी उत्तीर्ण वर्ष को ही बैच वर्ष मानने के निर्देश जारी किए लेकिन शिक्षा विभाग उस फैसले को भी नहीं मान रहा है। इस वजह से उनका भविष्य अधर में लटक गया है।
बेरोजगार शास्त्रियों ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल से मांग की कि उन सभी श्रेणी सुधारकों का उत्तीर्ण वर्ष ही बैच वर्ष माना जाए तथा इसकी अधिसूचना शीघ्र जारी की जाए। विस अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने संघ को विश्वास दिलाया कि उनकी मांगों को सरकार व शिक्षा विभाग के समक्ष रख इसका समाधान किया जाएगा।