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Sirmour News: पांच लाख रुपये के चेक बाउंस मामले में पंचायत सचिव बरी
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संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अदालत ने पांच लाख रुपये के चेक बाउंस मामले में आरोपी पंचायत सचिव गोपाल सिंह को बरी कर दिया। न्यायिक मजिस्ट्रेट विकास कपूर ने माना कि शिकायतकर्ता अपने ही बयानों में विरोधाभास दूर नहीं कर सका। इससे उसके दावे पर संदेह उत्पन्न हुआ।
यह मामला सितंबर 2024 को शिलाई क्षेत्र का है। शिकायतकर्ता भोलेनाथ मार्बल्स के संचालक विनोद कुमार ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने मकान निर्माण के लिए टाइल्स, मार्बल, पानी की टंकी और अन्य निर्माण सामग्री खरीदी थी। यह सामान अलग-अलग तारीखों पर खरीदा गया था। भुगतान के लिए दिए गए 5 लाख रुपये के पोस्ट-डेटेड चेक को बैंक से अपर्याप्त धनराशि के कारण लौटने पर अदालत में परिवाद दायर किया गया था।
सुनवाई के दौरान आरोपी ने कहा कि उसने करीब 1.45 लाख रुपये की सामग्री खरीदी थी और सुरक्षा के तौर पर खाली चेक दिया था, जिसका बाद में दुरुपयोग किया गया। अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता ने स्वीकार किया कि चेक सुरक्षा के तौर पर दिया गया था, जबकि शिकायत में कहा गया था कि बकाया राशि मांगने पर दिसंबर 2024 में चेक जारी किया गया।
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इस विरोधाभास को अदालत ने महत्वपूर्ण माना और कहा कि इससे शिकायतकर्ता की कहानी अविश्वसनीय हो जाती है। अदालत ने फैसले में कहा कि आरोपी ने शिकायतकर्ता के पक्ष में कानून के तहत बनी धारणा का सफलतापूर्वक खंडन कर दिया है। ऐसे में संदेह का लाभ देते हुए आरोपी को एनआई एक्ट के तहत आरोप से बरी कर दिया गया।-- -- -- --
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नाहन (सिरमौर)। अदालत ने पांच लाख रुपये के चेक बाउंस मामले में आरोपी पंचायत सचिव गोपाल सिंह को बरी कर दिया। न्यायिक मजिस्ट्रेट विकास कपूर ने माना कि शिकायतकर्ता अपने ही बयानों में विरोधाभास दूर नहीं कर सका। इससे उसके दावे पर संदेह उत्पन्न हुआ।
यह मामला सितंबर 2024 को शिलाई क्षेत्र का है। शिकायतकर्ता भोलेनाथ मार्बल्स के संचालक विनोद कुमार ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने मकान निर्माण के लिए टाइल्स, मार्बल, पानी की टंकी और अन्य निर्माण सामग्री खरीदी थी। यह सामान अलग-अलग तारीखों पर खरीदा गया था। भुगतान के लिए दिए गए 5 लाख रुपये के पोस्ट-डेटेड चेक को बैंक से अपर्याप्त धनराशि के कारण लौटने पर अदालत में परिवाद दायर किया गया था।
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सुनवाई के दौरान आरोपी ने कहा कि उसने करीब 1.45 लाख रुपये की सामग्री खरीदी थी और सुरक्षा के तौर पर खाली चेक दिया था, जिसका बाद में दुरुपयोग किया गया। अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता ने स्वीकार किया कि चेक सुरक्षा के तौर पर दिया गया था, जबकि शिकायत में कहा गया था कि बकाया राशि मांगने पर दिसंबर 2024 में चेक जारी किया गया।
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इस विरोधाभास को अदालत ने महत्वपूर्ण माना और कहा कि इससे शिकायतकर्ता की कहानी अविश्वसनीय हो जाती है। अदालत ने फैसले में कहा कि आरोपी ने शिकायतकर्ता के पक्ष में कानून के तहत बनी धारणा का सफलतापूर्वक खंडन कर दिया है। ऐसे में संदेह का लाभ देते हुए आरोपी को एनआई एक्ट के तहत आरोप से बरी कर दिया गया।