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गिरिपार को एसटी दर्जा देने के मुद्दे पर नीति स्पष्ट करें प्रत्याशी
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पांवटा साहिब (सिरमौर)। गिरिपार को एसटी का दर्जा देने के मुद्दे पर केंद्रीय हाटी समिति ने चुनावी मैदान में उतरे नेताओं से नीति और नियत स्पष्ट करने की मांग की है।
रविवार को पांवटा के शमशेरपुर में केंद्रीय हाटी समिति की बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में लीगल कमेटी और दिल्ली में हाटी यूनिट का गठन करने सहित अन्य कई मुद्दों पर चर्चा हुई। अध्यक्ष डॉ. अमीचंद कमल ने बैठक की अध्यक्षता की।
उन्होंने कहा कि 2013 से अब तक इस मुद्दे पर काफी कार्य हुआ है। भाजपा के साथ अब कांग्रेस के विजन डॉक्यूमेंट में भी यह मुद्दा शामिल हुआ है। पीएम को शिलाई, राजगढ़ सहित करीब 102 पंचायतों के प्रस्ताव मिल चुके हैं। उन्होंने पूर्व सांसद वीरेंद्र कश्यप द्वारा किए गए प्रयासों के लिए उनका धन्यवाद किया। लेकिन, खेद भी जताया कि वादे के मुताबिक हाटी समुदाय को जनजाति का दर्जा देने का मामला परिणाम तक नहीं पहुंच पाया। इस बार के चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों को इस मुद्दे पर अपनी नीति और नियत स्पष्ट करनी होगी। प्रदेश में पहुंचने वाले केंद्रीय स्तर के मंत्री व बडे़ नेताओं की रैलियों पर नजर रहेगी कि वे इस मुद्दे को लेकर कितने गंभीर हैं? नई सरकार बनने के बाद यहां से चुने जाने वाले सांसद के साथ समन्वय बनाकर फिर सरकार से बात की जाएगी। इसके लिए एक कमेटी का गठन किया गया है। कानूनी सलाह के लिए एक लिगल कमेटी का शीघ्र ही गठन कर दिया जाएगा। दिल्ली में भी एक हाटी यूनिट का गठन किया जाएगा। जो संबंधित मंत्रालय तथा उच्च अधिकारियों से बराबर संपर्क बनाकर रखेगी। केंद्रीय हाटी समिति के महासचिव कुंदन सिंह शास्त्री ने बताया कि नकारात्मक मानसिकता हटाना जरूरी है। तकनीकी ज्ञान के चलते कई बार सोशल मीडिया में अधूरी जानकारी प्रसारित हो रही है। कई अहम दौर व चरण से फाइल गुजर चुकी है। जय प्रकाश चौहान व ओपी चौहान ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर सबका सहयोग मिलना जरूरी है। हर मंच, हर दल से सहयोग लिया जा रहा है। अधिवक्ता अनिल ठाकुर, जगदीश, जीएस नेगी, रत्न ठाकुर, विजय भारद्वाज, मुंशी राम वर्मा, रमेश नेगी, पांवटा इकाई अध्यक्ष ओपी चौहान, अतर सिंह नेगी, रणसिंह चौहान, शिलाई यूनिट प्रधान जीएस नेगी, खजान सिंह नेगी, अनिल ठाकुर, चत्तर सिंह, पूरण तोमर, लायक राम शास्त्री, शिवानंद शर्मा, राम लाल शर्मा व सुरेशानंद भारद्वाज आदि बैठक में मौजूद रहे।
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रविवार को पांवटा के शमशेरपुर में केंद्रीय हाटी समिति की बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में लीगल कमेटी और दिल्ली में हाटी यूनिट का गठन करने सहित अन्य कई मुद्दों पर चर्चा हुई। अध्यक्ष डॉ. अमीचंद कमल ने बैठक की अध्यक्षता की।
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उन्होंने कहा कि 2013 से अब तक इस मुद्दे पर काफी कार्य हुआ है। भाजपा के साथ अब कांग्रेस के विजन डॉक्यूमेंट में भी यह मुद्दा शामिल हुआ है। पीएम को शिलाई, राजगढ़ सहित करीब 102 पंचायतों के प्रस्ताव मिल चुके हैं। उन्होंने पूर्व सांसद वीरेंद्र कश्यप द्वारा किए गए प्रयासों के लिए उनका धन्यवाद किया। लेकिन, खेद भी जताया कि वादे के मुताबिक हाटी समुदाय को जनजाति का दर्जा देने का मामला परिणाम तक नहीं पहुंच पाया। इस बार के चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों को इस मुद्दे पर अपनी नीति और नियत स्पष्ट करनी होगी। प्रदेश में पहुंचने वाले केंद्रीय स्तर के मंत्री व बडे़ नेताओं की रैलियों पर नजर रहेगी कि वे इस मुद्दे को लेकर कितने गंभीर हैं? नई सरकार बनने के बाद यहां से चुने जाने वाले सांसद के साथ समन्वय बनाकर फिर सरकार से बात की जाएगी। इसके लिए एक कमेटी का गठन किया गया है। कानूनी सलाह के लिए एक लिगल कमेटी का शीघ्र ही गठन कर दिया जाएगा। दिल्ली में भी एक हाटी यूनिट का गठन किया जाएगा। जो संबंधित मंत्रालय तथा उच्च अधिकारियों से बराबर संपर्क बनाकर रखेगी। केंद्रीय हाटी समिति के महासचिव कुंदन सिंह शास्त्री ने बताया कि नकारात्मक मानसिकता हटाना जरूरी है। तकनीकी ज्ञान के चलते कई बार सोशल मीडिया में अधूरी जानकारी प्रसारित हो रही है। कई अहम दौर व चरण से फाइल गुजर चुकी है। जय प्रकाश चौहान व ओपी चौहान ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर सबका सहयोग मिलना जरूरी है। हर मंच, हर दल से सहयोग लिया जा रहा है। अधिवक्ता अनिल ठाकुर, जगदीश, जीएस नेगी, रत्न ठाकुर, विजय भारद्वाज, मुंशी राम वर्मा, रमेश नेगी, पांवटा इकाई अध्यक्ष ओपी चौहान, अतर सिंह नेगी, रणसिंह चौहान, शिलाई यूनिट प्रधान जीएस नेगी, खजान सिंह नेगी, अनिल ठाकुर, चत्तर सिंह, पूरण तोमर, लायक राम शास्त्री, शिवानंद शर्मा, राम लाल शर्मा व सुरेशानंद भारद्वाज आदि बैठक में मौजूद रहे।
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