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बिजली बिल में जोड़ दी पांच साल पहले जले मीटरों की कीमत

Tue, 30 Apr 2019 10:49 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 30 Apr 2019 10:49 PM IST
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बिजली बिल में जोड़ दी पांच साल पहले जले मीटरों की कीमत
शिलाई (सिरमौर)। करीब पांच साल बाद नए बिजली मीटरों की कीमत वसूलने के खिलाफ ग्रामीण भड़क गए हैं। बिजली बोर्ड ने बिलों के साथ नए मीटरों की कीमत भी जोड़ दी है। ऐसे में ग्रामीणों ने बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पांच साल पहले जले बिजली मीटरों की वजह से बिजली के उपकरण भी जल गए थे। ऐसा बोर्ड की लापरवाही से हुआ था। अब बोर्ड ने जले बिजली मीटरों की जगह लगे नए मीटरों की कीमत बिलों के साथ जोड़ दी है। इसको लेकर ग्रामीणों ने इस मामले को अदालत ले जाने की चेतावनी भी दी है। हालांकि, पहले बोर्ड के अधिकारियों ने जले मीटरों की जगह लगाए नए मीटरों की कीमत न चुकाने का आश्वासन दिया था। पांच साल गुजरने के बाद अब बोर्ड इसकी कीमत वसूल रहा है। वर्ष 2012-13 में लाइनों में तकनीकी खराबी के कारण बेला और डिमटऊ में बिजली की वोल्टेज अचानक बढ़ गई थी। हाई वोल्टेज से दोनों गावों के 50 बिजली मीटर, लोगों के घरों में रखे टीवी, वाशिंग मशीन और बिजली के अन्य उपकरण जल गए थे। इससे ग्रामीणों को भारी नुकसान पहुंचा था। क्षेत्र के नारायण सिंह, मेहर सिंह, जगत सिंह, धर्म सिंह, बारुराम, कंवर सिंह, गुमान सिंह, प्रभु राम, अत्तर सिंह, भीम सिंह, बाजू राम, गंगा राम, सुनील सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि विद्युत बोर्ड ने जब नए मीटर लगाए थे, तब उनको यह आश्वासन दिया था कि नए मीटरों का पैसा उनसे नहीं लिया जाएगा। ग्रामीणों ने बताया कि पांच साल तक सब कुछ ठीक चलता रहा, लेकिन अब विद्युत बोर्ड ने नए मीटरों की 1100 रुपये कीमत बिजली के बिलों के साथ जोड़ दी है जो सरासर अन्याय है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों ने बताया कि विद्युत बोर्ड की तकनीकी खराबी के कारण उनके मीटर जले। वहीं, कीमती सामान भी जल गया था। ऐसे में कोई औचित्य नहीं है कि विद्युत बोर्ड जले मीटरों के स्थान पर लगाए गए नए मीटरों की कीमत उनसे वसूले। ग्रामीणों ने कहा कि अगर बोर्ड ने यह फैसला वापस नहीं लिया तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
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कीमत माफ करना क्षेत्राधिकार में नहीं
बिजली मीटर की कीमत माफ करना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। यह राशि जमा करवानी अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि जिस समय बिजली के मीटर जले थे, उस समय के अधिकारियों को अपने उच्चाधिकारियों के संज्ञान में यह मामला लाकर उसका समाधान करना चाहिए था। लेकिन ऐसा हो नहीं पाया, जिस कारण यह परेशानी हो रही है।
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- दर्शन ठाकुर, सहायक अभियंता, बिजली बोर्ड।
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