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सिकुड़ती मानवाकार रेणुका झील को बचाए प्रदेश सरकार

Sun, 24 Jun 2018 10:56 PM IST
Updated Sun, 24 Jun 2018 10:56 PM IST
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सिकुड़ती मानवाकार रेणुका झील को बचाए प्रदेश सरकार
नाहन / ददाहू(सिरमौर)। श्रीरेणुका जी स्थित मानवाकार रेणुका झील का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। उचित साफ-सफाई न होने से जहां लाखों श्रद्धालुओं की आस्था धूमिल हो रही है, वहीं इस झील का आकार भी लगातार सिकुड़ता चला जा रहा है।
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इस झील के अस्तित्व को बचाने के लिए जिला के कई संगठन और लोग लगातार प्रदेश सरकार से मांग कर रहे हैं कि इस पवित्र झील के लिए उचित बजट मुहैया करवाएं ताकि इस झील की सफाई बेहतर ढंग से हो सके। बावजूद इसके अभी तक इस दिशा में कोई उचित कदम नहीं उठाया गया है।
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हालांकि वन्य प्राणी विभाग अपनी ओर से कुछ प्रयास अवश्य कर रहा है जो कि नाकाफी ही सिद्ध हो रहे हैं। इस झील को वैटलैंड की श्रेणी में भी शामिल किया गया है लेकिन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग झील के रखरखाव को लेकर आंखें मूंदे बैठा हुआ है जिससे लोगों में भारी निराशा का माहौल है। इस बारे में ‘अमर उजाला’ ने जिला सिरमौर के लोगों की राय जानी तो उनके मन का गुब्बार कुछ यूं निकला।
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पांवटा निवासी संजीव भारद्वाज ने कहा कि 672 मीटर लंबी मानवाकार आकृति वाली प्राकृतिक झील रखरखाव के अभाव में सिकुड़ रही है। सरकार को चाहिए कि वो इसकी दशा सुधारने के लिए उचित बजट मुहैया करवाए ताकि इसका प्राकृतिक सौंदर्य कायम रहे।
नाहन निवासी धनवीर सिंह परमार ने कहा कि रेणुका झील मात्र झील नहीं, लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है। गाद के कारण इसका आकार सिकुड़ रहा है। लोगों की आस्था को ध्यान में रख इसका रखरखाव किया जाना चाहिए।
वहीं लायकराम भारद्वाज ने कहा कि यह झील धार्मिक आस्थाओं के साथ-साथ पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। लाखों लोग इसके कारण रेणुका आते हैं। पर्यटन उद्योग इस कारण भी फल फूल रहा है। यदि इसका अस्तित्व मिटा तो पर्यटन को भी धक्का लगेगा। इसका विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
वहीं विजय रानी बंसल ने कहा कि यह देश की एकमात्र ऐसी झील है जिसकी आकृति सोई हुई स्त्री के समान है। लोगों की आस्था, रोजगार, प्राकृतिक सौंदर्य इससे जुड़ा है। इसे बचाने की कोशिश की जानी चाहिए ताकि भावी पीढ़ी इसकी नैसर्गिक सुंदरता का आनंद ले सके।

वहीं पांवटा निवासी जगमोहन सिंह भंडारी ने कहा कि सरकार को इसके रखरखाव पर प्राथमिकता के साथ ध्यान देना चाहिए। यह झील सिरमौर जिला की एक पहचान है। इसके अस्तित्व पर पैदा हो रहे संकट को समय रहते दूर किया जाना चाहिए।
 
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