{"_id":"5b042b504f1c1bd3408b700d","slug":"181526999888-sirmour-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हमारा मुल्क है यह, कोई पाकिस्तान थोड़ी है..,","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हमारा मुल्क है यह, कोई पाकिस्तान थोड़ी है..,
Updated Tue, 22 May 2018 11:11 PM IST
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)। जिला भाषा कार्यालय नाहन ने मंगलवार को मासिक कवि गोष्ठी आयोजित की जिसमें कवियों ने विभिन्न विषयों पर कविता पाठ किया। गोष्ठी की अध्यक्षता साहित्यकार दीनदयाल वर्मा ने की।
बैठक में सर्वप्रथम नाहन में बनने वाले ऑडिटोरियम को लेकर चर्चा की गई। कवियों ने इस बात पर नाराजगी जाहिर की कि भूमि व पैसा होने के बाद भी लोनिवि द्वारा इसका निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जा रहा है। इसके बाद निर्णय लिया गया कि इस विषय पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल के समक्ष उठाया जाएगा।
इस मौके पर दीन दयाल वर्मा ने ‘आज गर्मियों की शाम बड़ी उदास है, खामोशी का बसेरा मेरे आसपास है। दिल में तेरे मिलन की इक आस है। मेरी कविताओं में जिक्र तेरा खास है..’, कविता पेश कर समां बांधा। रामकुमार सैनी ने ‘अक्लियत खौफजदा तालाबंद जबान थोड़ी है, हमारा मुल्क है, यह कोई पाकिस्तान थोड़ी है..’, सुना रंग जमाया।
विज्ञापन
शून्य विनोद ने ‘सीमाओं पर परमवीर सैनिकों के बलिदान, मैं नतमस्तक, भारत माता के मुकुट में उनका स्थान ढूंढता हूं..’, कविता पेश की। इस अवसर पर लायक राम शास्त्री, श्रीकांत अकेला, रविता आदि आधा दर्जन कवियों ने भी कविताएं पेश की।
-----------
विज्ञापन
नाहन (सिरमौर)। जिला भाषा कार्यालय नाहन ने मंगलवार को मासिक कवि गोष्ठी आयोजित की जिसमें कवियों ने विभिन्न विषयों पर कविता पाठ किया। गोष्ठी की अध्यक्षता साहित्यकार दीनदयाल वर्मा ने की।
बैठक में सर्वप्रथम नाहन में बनने वाले ऑडिटोरियम को लेकर चर्चा की गई। कवियों ने इस बात पर नाराजगी जाहिर की कि भूमि व पैसा होने के बाद भी लोनिवि द्वारा इसका निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जा रहा है। इसके बाद निर्णय लिया गया कि इस विषय पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल के समक्ष उठाया जाएगा।
विज्ञापन
इस मौके पर दीन दयाल वर्मा ने ‘आज गर्मियों की शाम बड़ी उदास है, खामोशी का बसेरा मेरे आसपास है। दिल में तेरे मिलन की इक आस है। मेरी कविताओं में जिक्र तेरा खास है..’, कविता पेश कर समां बांधा। रामकुमार सैनी ने ‘अक्लियत खौफजदा तालाबंद जबान थोड़ी है, हमारा मुल्क है, यह कोई पाकिस्तान थोड़ी है..’, सुना रंग जमाया।
विज्ञापन
शून्य विनोद ने ‘सीमाओं पर परमवीर सैनिकों के बलिदान, मैं नतमस्तक, भारत माता के मुकुट में उनका स्थान ढूंढता हूं..’, कविता पेश की। इस अवसर पर लायक राम शास्त्री, श्रीकांत अकेला, रविता आदि आधा दर्जन कवियों ने भी कविताएं पेश की।
-----------