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डीजल-पेट्रोल पर जीएसटी, पुरानी पेंशन, आयकर छूट की आस
Updated Tue, 30 Jan 2018 11:15 PM IST
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बजट 2017-18
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पंकज तन्हा
नाहन (सिरमौर)।
जीएसटी लागू करने के बाद केंद्र सरकार अपना पहला बजट पेश करने जा रही है। इस आम बजट से लोगों की भारी उम्मीदें हैं। कारोबारियों को जीएसटी प्रणाली में संशोधन करने की उम्मीद है। गरीब व मध्यमवर्ग डीजल-पेट्रोल को जीएसटी के दायरे में लाए जाने की भी उम्मीद कर रहा है। सरकारी सेवा में तैनात लोगों को आशा है कि सरकार इस बार आयकर छूट का दायरा बढ़ा कर स्लैब में भी बदलाव करेगी। ऐसे में क्या वित्त मंत्री आमजन की उम्मीदों पर खरा उतर पाएंगे। बजट को लेकर ‘अमर उजाला’ ने आमजन से उनकी राय जानी।
सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य राजकुमार शर्मा ने कहा कि महंगाई बढ़ी है जिसका असर आय पर भी पड़ा है। सरकार 4 लाख की आमदनी को आयकर फ्री करे। साथ ही स्लैब रेट में भी बदलाव करे। 4 से 5 लाख तक की आय पर 5 प्रतिशत, 5 से 10 लाख तक 10 प्रतिशत तथा 10 से 20 लाख तक 20 प्रतिशत कर वसूले।
गृहिणी अनु भारद्वाज ने कहा कि सरकार को दाल, चीनी, चावल, गेहूं, फल, सब्जी, तेल जैसी अन्य चीजों के दाम निश्चित करने चाहिए। रसोई गैस सब्सिडी को खत्म किया जा रहा है। जबकि उसे बढ़ाया जाना चाहिए जिससे ज्यादा लोगों को लाभ हो।
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गृहिणी सीता तोमर ने कहा कि उद्योगों में मेहनतकश वर्ग शोषित हो रहा है। उन्हें बचाने के लिए सरकार को कम से कम 15000 रुपये का न्यूनतम वेतन देने की घोषणा करनी चाहिए। इससे निजी क्षेत्र में काम करने वालों को बड़ी राहत मिलेगी।
समाजसेवी दलीप सिंह वर्मा ने कहा कि वर्ष 2003 के बाद लगे कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन लागू की जाए। ऐसा होने से वर्तमान में सरकारी कार्यालयों में तैनात कर्मचारियों को बुढ़ापे में दो वक्त की रोटी नसीब हो सकेगी। ऐसा न होने की सूरत में इन कर्मचारियों को बुढ़ापे में आर्थिक तंगी से जूझना पड़ेगा।
वकील अशोक पुंडीर ने कहा कि सरकार बैंक में ट्रांजेक्शन पहले की तरह फ्री करे। ट्रांजेक्शन पर शुल्क वसूले जाने से इतना ब्याज नहीं पड़ रहा है जितना शुल्क चुकाना पड़ रहा है।
अचपाल सिंह ने कहा कि जीएसटी में व्यापारी वर्ग को राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार को पेट्रोल व डीजल के दाम जीएसटी के अंतर्गत लाने चाहिए ताकि इनके बढ़ते दामों से देशवासियों को राहत मिले।
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नाहन (सिरमौर)।
जीएसटी लागू करने के बाद केंद्र सरकार अपना पहला बजट पेश करने जा रही है। इस आम बजट से लोगों की भारी उम्मीदें हैं। कारोबारियों को जीएसटी प्रणाली में संशोधन करने की उम्मीद है। गरीब व मध्यमवर्ग डीजल-पेट्रोल को जीएसटी के दायरे में लाए जाने की भी उम्मीद कर रहा है। सरकारी सेवा में तैनात लोगों को आशा है कि सरकार इस बार आयकर छूट का दायरा बढ़ा कर स्लैब में भी बदलाव करेगी। ऐसे में क्या वित्त मंत्री आमजन की उम्मीदों पर खरा उतर पाएंगे। बजट को लेकर ‘अमर उजाला’ ने आमजन से उनकी राय जानी।
सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य राजकुमार शर्मा ने कहा कि महंगाई बढ़ी है जिसका असर आय पर भी पड़ा है। सरकार 4 लाख की आमदनी को आयकर फ्री करे। साथ ही स्लैब रेट में भी बदलाव करे। 4 से 5 लाख तक की आय पर 5 प्रतिशत, 5 से 10 लाख तक 10 प्रतिशत तथा 10 से 20 लाख तक 20 प्रतिशत कर वसूले।
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गृहिणी अनु भारद्वाज ने कहा कि सरकार को दाल, चीनी, चावल, गेहूं, फल, सब्जी, तेल जैसी अन्य चीजों के दाम निश्चित करने चाहिए। रसोई गैस सब्सिडी को खत्म किया जा रहा है। जबकि उसे बढ़ाया जाना चाहिए जिससे ज्यादा लोगों को लाभ हो।
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गृहिणी सीता तोमर ने कहा कि उद्योगों में मेहनतकश वर्ग शोषित हो रहा है। उन्हें बचाने के लिए सरकार को कम से कम 15000 रुपये का न्यूनतम वेतन देने की घोषणा करनी चाहिए। इससे निजी क्षेत्र में काम करने वालों को बड़ी राहत मिलेगी।
समाजसेवी दलीप सिंह वर्मा ने कहा कि वर्ष 2003 के बाद लगे कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन लागू की जाए। ऐसा होने से वर्तमान में सरकारी कार्यालयों में तैनात कर्मचारियों को बुढ़ापे में दो वक्त की रोटी नसीब हो सकेगी। ऐसा न होने की सूरत में इन कर्मचारियों को बुढ़ापे में आर्थिक तंगी से जूझना पड़ेगा।
वकील अशोक पुंडीर ने कहा कि सरकार बैंक में ट्रांजेक्शन पहले की तरह फ्री करे। ट्रांजेक्शन पर शुल्क वसूले जाने से इतना ब्याज नहीं पड़ रहा है जितना शुल्क चुकाना पड़ रहा है।
अचपाल सिंह ने कहा कि जीएसटी में व्यापारी वर्ग को राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार को पेट्रोल व डीजल के दाम जीएसटी के अंतर्गत लाने चाहिए ताकि इनके बढ़ते दामों से देशवासियों को राहत मिले।