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शिरगुल महाराज देवता की नौतबीन की जातर पहुंची चूड़धार
Updated Sun, 24 Jun 2018 10:59 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
नौहराधार (सिरमौर)। आराध्य देव शिरगुल महाराज की जन्मस्थली शाया से शिरगुल महाराज देवता की नौतबीन की जातर रविवार को चूड़धार पहुंची। यह जातर शनिवार को शाया से चली थी। इससे पूर्व तीसरी नामक स्थान पर नौहराधार नौतबीन के सैकड़ों लोगों ने गाजे-बाजे के साथ शाया देवता का भव्य स्वागत किया।
श्रद्घालुओं ने अपनी प्राचीन परंपरा को भी बखूबी निभाया। इसके बाद ही देवता ने चूड़धार के लिए प्रस्थान किया। चूड़धार पहुंचने पर देवता का शाही स्नान हुआ। देवता ने लोगों को सुख समृद्धि का आशीर्वाद दिया। गौरतलब हो कि हर तीसरे वर्ष शिरगुल देवता जातर सहित चूड़धार के लिए आते हैं। इस महापर्व पर राजगढ़, पच्छाद और रेणुका क्षेत्र के नौतबीन के हजारों लोग भी देवता के साथ रवाना होते हैं। यह अपने आपमें एक अद्भुत दृश्य होता है। इसे आपसी भाईचारे का भी प्रतीक माना जाता है।
--बाक्स--
जातर ने दिया पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता का संदेश
चूड़धार पहुंचे नौहराधार के लोग जातर में शामिल रहे। इसमें बुजुर्ग और नौजवान सभी शामिल रहे। इस दौरान उन्होंने चूड़धार से नौहराधार तक करीब 18 किमी तक पूरे रास्ते की सफाई की। उन्होंने पर्यटकों व श्रद्धालुओं द्वारा फेंकी गई प्लास्टिक बोतलें, पॉलिथीन बैग, रैपर्स आदि को बोरियों में इक्टठा किया और पंचायत में लाकर जमा करवाया।
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नौहराधार (सिरमौर)। आराध्य देव शिरगुल महाराज की जन्मस्थली शाया से शिरगुल महाराज देवता की नौतबीन की जातर रविवार को चूड़धार पहुंची। यह जातर शनिवार को शाया से चली थी। इससे पूर्व तीसरी नामक स्थान पर नौहराधार नौतबीन के सैकड़ों लोगों ने गाजे-बाजे के साथ शाया देवता का भव्य स्वागत किया।
श्रद्घालुओं ने अपनी प्राचीन परंपरा को भी बखूबी निभाया। इसके बाद ही देवता ने चूड़धार के लिए प्रस्थान किया। चूड़धार पहुंचने पर देवता का शाही स्नान हुआ। देवता ने लोगों को सुख समृद्धि का आशीर्वाद दिया। गौरतलब हो कि हर तीसरे वर्ष शिरगुल देवता जातर सहित चूड़धार के लिए आते हैं। इस महापर्व पर राजगढ़, पच्छाद और रेणुका क्षेत्र के नौतबीन के हजारों लोग भी देवता के साथ रवाना होते हैं। यह अपने आपमें एक अद्भुत दृश्य होता है। इसे आपसी भाईचारे का भी प्रतीक माना जाता है।
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जातर ने दिया पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता का संदेश
चूड़धार पहुंचे नौहराधार के लोग जातर में शामिल रहे। इसमें बुजुर्ग और नौजवान सभी शामिल रहे। इस दौरान उन्होंने चूड़धार से नौहराधार तक करीब 18 किमी तक पूरे रास्ते की सफाई की। उन्होंने पर्यटकों व श्रद्धालुओं द्वारा फेंकी गई प्लास्टिक बोतलें, पॉलिथीन बैग, रैपर्स आदि को बोरियों में इक्टठा किया और पंचायत में लाकर जमा करवाया।
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