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हरियाणवी रागनी गायक नीतू तोमर के गीतों पर खूब थिरके दर्शक
Updated Wed, 21 Nov 2018 10:15 PM IST
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अमर उजाला
- फोटो : amarujala
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ददाहू (सिरमौर)। अंतरराष्ट्रीय रेणुका मेले की तीसरी सांस्कृतिक संध्या में हरियाणवी रागनी की मशहूर कलाकार नीतू तोमर ने अपनी सुरीली आवाज का खूब जादू बिखेरा। उन्होंने एक से बढ़कर एक शानदार गीत गाकर दर्शकों को झूमने पर विवश कर दिया।
हालांकि, रागनी को सुनने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ जुटी, लेकिन नीतू तोमर को मंच पर मात्र आधा घंटा की प्रस्तुति का मौका मिल सका।
नीतू तोमर ने सरस्वती वंदना तुझसे लागी लगन.. से अपने कार्यक्रम की शुुरुआत की। इसके बाद उन्होंने अपने साथी कलाकार हितेश शर्मा के साथ देशभक्ति पर आधारित मेरी मां का नाम आजादी, उसका बेटा आजाद हूं मैं.. प्रस्तुत कर माहौल को देशभक्ति के रंग में रंग दिया। उन्होंने मां, भाभी, साली से कभी रूठ जाना अच्छा नहीं.., बचपन तूं जा जवानी ले आ.., कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है.., अगर राधा पुकारेगी तो फिर घनश्याम आएंगे.. आदि अनेकों हरियाणवी नगमे सुनाकर दर्शकों को झूमने पर विवश कर दिया। इससे पूर्व कलाकार नरेंद्र नीटू ने मुंदरी जुगे ना तेरे कानो व यार नी मिलता दिलदार नहीं मिलता.. आदि अनेक फिल्मी व पहाड़ी नगमे सुनाए। चौपाल के कलाकार हेमंत शर्मा ने पहाड़ी लोक गीतों पर समा बांधा। इसके अतिरिक्त सोहन सिंह सोनू, नारकंडा की रमेश करोच, अजय चौहान, चमन चौहान, किशन शर्मा ठियोग, आरुषि कला मंच राजगढ़, कमल मोगटा, तारा कमल आदि कलाकारों ने लोक गीतों की झड़ी लगाकर दर्शकों को देर रात तक झुमाया। इस सांस्कृतिक संध्या के मुख्य अतिथि एसडीएम पांवाटा साहिब एलआर वर्मा व एसडीएम संगड़ाह राजेश धीमान रहे। इस मौके पर एसडीएम नाहन विवेक शर्मा, डीपीआरओ बाबूराम चौहान, डीएलओ अनिल हारटा, मंडल अध्यक्ष प्रताप तोमर व सीईओ दीपराम शर्मा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
रागनी कलाकार नीतू तोमर ने कहा कि रागनी का प्रचलन रामायण व महाभारत काल से ही प्रचलित है। माता सीता की विदाई के दौरान भी रागनी को गाया गया था। रागनी गायकी सबसे अलग व कठिन विधा है। इसमें प्राचीन संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। अमर उजाला से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि आज केवल रागनी ही है जो रिमिक्स से बची हुई है। रागनी में केवल सत्यता को प्रदर्शित किया जाता है। उन्होंने कहा कि कुछ कथित कलाकारों, डांसरों ने रागनी को भद्दा करने का प्रयास किया था। लेकिन, वह सफल नहीं हो सके। बड़े-बड़े मंचों व उत्सवों में रागनी को आज भी बड़ी शिद्दत से सुना जाता है। आकाशवाणी दिल्ली से आज भी रागनी का प्रसारण होता है। रागनी को गाना व प्रदर्शित करना कव्वाली गजल से भी कठिन है। उन्होंने स्कूल के समय से ही रागनी गाना आरंभ कर दिया था। इसके लिए उनके शिक्षक रणवीर ने उन्हें काफी प्रोत्साहित किया।
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हालांकि, रागनी को सुनने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ जुटी, लेकिन नीतू तोमर को मंच पर मात्र आधा घंटा की प्रस्तुति का मौका मिल सका।
नीतू तोमर ने सरस्वती वंदना तुझसे लागी लगन.. से अपने कार्यक्रम की शुुरुआत की। इसके बाद उन्होंने अपने साथी कलाकार हितेश शर्मा के साथ देशभक्ति पर आधारित मेरी मां का नाम आजादी, उसका बेटा आजाद हूं मैं.. प्रस्तुत कर माहौल को देशभक्ति के रंग में रंग दिया। उन्होंने मां, भाभी, साली से कभी रूठ जाना अच्छा नहीं.., बचपन तूं जा जवानी ले आ.., कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है.., अगर राधा पुकारेगी तो फिर घनश्याम आएंगे.. आदि अनेकों हरियाणवी नगमे सुनाकर दर्शकों को झूमने पर विवश कर दिया। इससे पूर्व कलाकार नरेंद्र नीटू ने मुंदरी जुगे ना तेरे कानो व यार नी मिलता दिलदार नहीं मिलता.. आदि अनेक फिल्मी व पहाड़ी नगमे सुनाए। चौपाल के कलाकार हेमंत शर्मा ने पहाड़ी लोक गीतों पर समा बांधा। इसके अतिरिक्त सोहन सिंह सोनू, नारकंडा की रमेश करोच, अजय चौहान, चमन चौहान, किशन शर्मा ठियोग, आरुषि कला मंच राजगढ़, कमल मोगटा, तारा कमल आदि कलाकारों ने लोक गीतों की झड़ी लगाकर दर्शकों को देर रात तक झुमाया। इस सांस्कृतिक संध्या के मुख्य अतिथि एसडीएम पांवाटा साहिब एलआर वर्मा व एसडीएम संगड़ाह राजेश धीमान रहे। इस मौके पर एसडीएम नाहन विवेक शर्मा, डीपीआरओ बाबूराम चौहान, डीएलओ अनिल हारटा, मंडल अध्यक्ष प्रताप तोमर व सीईओ दीपराम शर्मा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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रागनी कलाकार नीतू तोमर ने कहा कि रागनी का प्रचलन रामायण व महाभारत काल से ही प्रचलित है। माता सीता की विदाई के दौरान भी रागनी को गाया गया था। रागनी गायकी सबसे अलग व कठिन विधा है। इसमें प्राचीन संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। अमर उजाला से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि आज केवल रागनी ही है जो रिमिक्स से बची हुई है। रागनी में केवल सत्यता को प्रदर्शित किया जाता है। उन्होंने कहा कि कुछ कथित कलाकारों, डांसरों ने रागनी को भद्दा करने का प्रयास किया था। लेकिन, वह सफल नहीं हो सके। बड़े-बड़े मंचों व उत्सवों में रागनी को आज भी बड़ी शिद्दत से सुना जाता है। आकाशवाणी दिल्ली से आज भी रागनी का प्रसारण होता है। रागनी को गाना व प्रदर्शित करना कव्वाली गजल से भी कठिन है। उन्होंने स्कूल के समय से ही रागनी गाना आरंभ कर दिया था। इसके लिए उनके शिक्षक रणवीर ने उन्हें काफी प्रोत्साहित किया।
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