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गौसदन बनाने में फिसड्डी बनी पंचायतें
Updated Tue, 21 Nov 2017 10:28 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
नौहराधार (सिरमौर)।
विकास खंड संगड़ाह में बढ़ते लावारिस पशुओं से आम जनता परेशान हैं। ये पशु किसानों के खेतों में फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। किसान पहले ही बंदरों के आतंक से परेशान है। उस पर अब लावारिस पशुओं ने किसानों की नींद हराम कर रखी है। दूसरी ओर गौसदन खाली पड़े हुए हैं। गौसदनों में पशु नहीं रखे जा रहे।
ग्राम पंचायतें भी गौसदन बनाने में फिसड्डी साबित हो रही हैं। अकेले संगड़ाह विकास खंड को ही लें तो यहां पर अभी तक महज दो दर्जन पंचायतों ने ही गौसदन बना रखे हैं। इनमें भी पशुओं की संख्या न के बराबर है। जबकि डेढ़ दर्जन से अधिक पंचायतों में अभी गौसदन बनाने की प्रक्रिया तक आरंभ नहीं हुई।
हालांकि, कुछ पंचायतों में प्रस्ताव डालकर इस ओर कदम तो उठाए गए हैं। कुछ ने राजस्व विभाग से भूमि उपलब्ध करवाने की मांग की है। अनेक पंचायतें गौसदन बनाने में कोई रूची नहीं दिखा रही। जबकि सरकार और विभाग ने पंचायतों की जिम्मेदारी सुनिश्चित की है। कई पंचायतों में जमीन उपलब्ध नहीं होने की वजह से गौसदन बनाने में दिक्कतें आ रही हैं। नतीजतन, तमाम प्रक्रिया कागजों तक सिमट कर ही रह गई है। लावारिस पशु फसलों की तबाही का कारण बने हुए हैं। एक ओर जहां लावारिस पशु फसलों को नष्ट कर रहे हैं, वहीं ये पशु भी दर-दर भटकने को विवश हैं।
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उधर, विकास खंड संगड़ाह के अधिकारी रमेश कुमार शर्मा ने बताया कि विकास खंड संगड़ाह में 41 पंचायतें हैं। इनमें से लगभग दो दर्जन से अधिक पंचायतों में गौसदन बना दिए हैं। जो पंचायतें शेष रही हैं उनमें भी जल्द गौसदन बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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नौहराधार (सिरमौर)।
विकास खंड संगड़ाह में बढ़ते लावारिस पशुओं से आम जनता परेशान हैं। ये पशु किसानों के खेतों में फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। किसान पहले ही बंदरों के आतंक से परेशान है। उस पर अब लावारिस पशुओं ने किसानों की नींद हराम कर रखी है। दूसरी ओर गौसदन खाली पड़े हुए हैं। गौसदनों में पशु नहीं रखे जा रहे।
ग्राम पंचायतें भी गौसदन बनाने में फिसड्डी साबित हो रही हैं। अकेले संगड़ाह विकास खंड को ही लें तो यहां पर अभी तक महज दो दर्जन पंचायतों ने ही गौसदन बना रखे हैं। इनमें भी पशुओं की संख्या न के बराबर है। जबकि डेढ़ दर्जन से अधिक पंचायतों में अभी गौसदन बनाने की प्रक्रिया तक आरंभ नहीं हुई।
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हालांकि, कुछ पंचायतों में प्रस्ताव डालकर इस ओर कदम तो उठाए गए हैं। कुछ ने राजस्व विभाग से भूमि उपलब्ध करवाने की मांग की है। अनेक पंचायतें गौसदन बनाने में कोई रूची नहीं दिखा रही। जबकि सरकार और विभाग ने पंचायतों की जिम्मेदारी सुनिश्चित की है। कई पंचायतों में जमीन उपलब्ध नहीं होने की वजह से गौसदन बनाने में दिक्कतें आ रही हैं। नतीजतन, तमाम प्रक्रिया कागजों तक सिमट कर ही रह गई है। लावारिस पशु फसलों की तबाही का कारण बने हुए हैं। एक ओर जहां लावारिस पशु फसलों को नष्ट कर रहे हैं, वहीं ये पशु भी दर-दर भटकने को विवश हैं।
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उधर, विकास खंड संगड़ाह के अधिकारी रमेश कुमार शर्मा ने बताया कि विकास खंड संगड़ाह में 41 पंचायतें हैं। इनमें से लगभग दो दर्जन से अधिक पंचायतों में गौसदन बना दिए हैं। जो पंचायतें शेष रही हैं उनमें भी जल्द गौसदन बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।