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ंधे पर गंगाजल लेकर कांवड़ यात्रा पर निकले शिव भक्त
Updated Tue, 07 Aug 2018 10:04 PM IST
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कंधे पर गंगाजल लेकर कांवड़ यात्रा पर निकले शिव भक्त
भक्ति रस में डूबी गुरु की नगरी पांवटा
बम-बम भोले के जयघोष से गूंजी नगरी
अमर उजाला ब्यूरो
पांवटा साहिब (सिरमौर)। भगवा रंगों में सज-धज कर कंधे पर गंगाजल लेकर भगवान शिव के भक्तों की टोलियां कांवड़ यात्रा पर ठाठ से निकल पड़ी हैं। प्रभु भक्ति के रस में डूबे भक्तों के सावन की फुहारें भी कदम नहीं रोक पाए। गुरु की नगरी पांवटा बम-बम भोले के जयकारों से गूंज रही है। दो दिन में कांवड़ यात्रियों की संख्या में खासा इजाफा हुआ है। पांवटा में ‘बम बोले बम भोले’ का नारा और ‘भोले बाबा एक तेरा ही सहारा’ के खूब जयघोष लग रहे हैं।
क्षेत्र के पंडितों नरेश शर्मा, रामकिशन शर्मा, ब्रह्मानंद शर्मा, पंकज शर्मा और वरुण शर्मा का कहना है कि ज्योतिर्लिंगों पर गंगाजल चढ़ाने की परंपरा रही है। सावन के माह में कांवड़ यात्रा निकलती है। कांवड़ लेकर जाने वाले भक्तों की सेवा को शिव सेवा से जोड़ा जाता है। शिव को प्रसन्न करने का सहज मार्गों में से एक है। मंगलवार को हरियाणा और हिमाचल के शिवालयों में गंगाजल लाने निकले कांवड़ियों की टोलियां निकलीं। लायक राम शास्त्री, रमेश शास्त्री, ज्ञान प्रकाश शर्मा तथा कांवड़ सेवा केंद्र संचालकों अजय संसरवाल और राजीव वर्मा का कहना है कि शास्त्रों के मुताबिक सावन का माह भगवान शिव आराधना को समर्पित है। इस दौरान कांवड़ स्टैंड पर रखी जाती है। पांवटा बांगरन बाईपास, यमुना बैरियर और माजरा में 3-4 जगहों पर कांवड़ियों की सेवा को पंडाल लगे हैं। इन शिविरों में कांवड़ रखने को स्थल बने हैं।
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भक्ति रस में डूबी गुरु की नगरी पांवटा
बम-बम भोले के जयघोष से गूंजी नगरी
अमर उजाला ब्यूरो
पांवटा साहिब (सिरमौर)। भगवा रंगों में सज-धज कर कंधे पर गंगाजल लेकर भगवान शिव के भक्तों की टोलियां कांवड़ यात्रा पर ठाठ से निकल पड़ी हैं। प्रभु भक्ति के रस में डूबे भक्तों के सावन की फुहारें भी कदम नहीं रोक पाए। गुरु की नगरी पांवटा बम-बम भोले के जयकारों से गूंज रही है। दो दिन में कांवड़ यात्रियों की संख्या में खासा इजाफा हुआ है। पांवटा में ‘बम बोले बम भोले’ का नारा और ‘भोले बाबा एक तेरा ही सहारा’ के खूब जयघोष लग रहे हैं।
क्षेत्र के पंडितों नरेश शर्मा, रामकिशन शर्मा, ब्रह्मानंद शर्मा, पंकज शर्मा और वरुण शर्मा का कहना है कि ज्योतिर्लिंगों पर गंगाजल चढ़ाने की परंपरा रही है। सावन के माह में कांवड़ यात्रा निकलती है। कांवड़ लेकर जाने वाले भक्तों की सेवा को शिव सेवा से जोड़ा जाता है। शिव को प्रसन्न करने का सहज मार्गों में से एक है। मंगलवार को हरियाणा और हिमाचल के शिवालयों में गंगाजल लाने निकले कांवड़ियों की टोलियां निकलीं। लायक राम शास्त्री, रमेश शास्त्री, ज्ञान प्रकाश शर्मा तथा कांवड़ सेवा केंद्र संचालकों अजय संसरवाल और राजीव वर्मा का कहना है कि शास्त्रों के मुताबिक सावन का माह भगवान शिव आराधना को समर्पित है। इस दौरान कांवड़ स्टैंड पर रखी जाती है। पांवटा बांगरन बाईपास, यमुना बैरियर और माजरा में 3-4 जगहों पर कांवड़ियों की सेवा को पंडाल लगे हैं। इन शिविरों में कांवड़ रखने को स्थल बने हैं।
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