शिमला: राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के छात्र ने वीडियो जारी कर हॉस्टल में किया आत्महत्या का प्रयास
राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के छात्र ने आत्महत्या का प्रयास किया है। तृतीय वर्ष के छात्र ने अपने हॉस्टल में मंगलवार रात को यह कदम उठाया।
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हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के छात्र ने आत्महत्या का प्रयास किया है। तृतीय वर्ष के छात्र ने अपने हॉस्टल में मंगलवार रात को यह कदम उठाया। मामले की सूचना मिलते ही उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया जहां उसका उपचार चल रहा है। छात्र ने विश्वविद्यालय प्रबंधन पर प्रताड़ना के आरोप लगाते हुए एक वीडियो भी बनाया। पुलिस ने इस संबंध में बयान दर्ज करने के साथ ही आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार एचपीएनएलयू के बीए एलएलबी तृतीय वर्ष के छात्र निखिल ने मंगलवार रात को करीब 9:00 बजे अपने हॉस्टल में कमरे में बेडशीट से फंदा लगाने के साथ ही हाथ की नस काटी। गनीमत रही कि बेडशीट से बनाया फंदा खुल गया जिससे वह जमीन पर गिर गया।
एएसपी शिमला गौरवजीत सिंह ने ये कहा
मामले की सूचना मिलते ही विश्वविद्यालय प्रबंधन और अन्य छात्रों की मदद से उन्हें उपचार के पहले धामी सामुदायिक अस्पताल ले जाया गया। यहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें आईजीएमसी रेफर कर दिया गया। इसके बाद विश्वविद्यालय की वीसी डाॅ. प्रीति सक्सेना, वार्डन समेत अन्य अधिकारी भी पहुंचे। मामले की सूचना मिलते ही बालूगंज थाने से पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंची। बुधवार दोपहर तक छात्र पुलिस को बयान देने की स्थिति में नहीं था। वहीं निखिल के पिता वेदप्रकाश ने बताया कि उनके बेटे को झूठे आरोप लगाकर प्रताड़ित किया जा रहा है। यही वजह है कि उनके बेटे ने इस तरह का कदम उठाया है। वहीं एएसपी शिमला गौरवजीत सिंह ने बताया कि पुलिस मामले में कानूनी कार्रवाई अमल में ला रही है। आत्महत्या के लिए उकसाने की धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।
विश्वविद्यालय प्रबंधन ने यह कहा
वहीं हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय शिमला ने भी इसको लेकर अपना पक्ष दिया है। विश्वविद्यालय की वीसी डाॅ. प्रीति सक्सेना ने बताया कि उनके ध्यान में आया कि यूनिवर्सिटी के एक छात्र ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया गया है, जिसमें रैगिंग की कथित घटना के बारे में आरोप लगाए गए हैं। इस संबंध में स्पष्ट किया जाता है कि यूनिवर्सिटी को निखिल प्रकाश और अन्य विद्यार्थियों की ओर से रैगिंग किए जाने का आरोप लगाने वाली एक शिकायत मिली है। यह मामला अभी यूनिवर्सिटी के एंटी रैगिंग नियमों और लागू कानूनों के प्रावधानों के अनुसार सक्षम अधिकारियों के विचाराधीन है। जांच की प्रक्रिया अभी चल रही है और यूनिवर्सिटी ने अभी तक कोई अंतिम निष्कर्ष या निर्णय नहीं लिया है। यह भी बताया कि शिकायतकर्ता ने स्वतंत्र रूप से अर्की पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई है। यूनिवर्सिटी ने भी एंटी रैगिंग नियमों के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन करते हुए इस मामले की जानकारी धामी पुलिस चौकी को दी थी। चूंकि जांच अभी चल रही है, इसलिए आरोपों को सार्वजनिक रूप से स्थापित तथ्यों के रूप में पेश करने की कोई भी कोशिश जल्दबाजी होगी और इससे चल रही कार्यवाही पर बुरा असर पड़ सकता है। इस मामले से जुड़े वीडियो, बयान और सोशल मीडिया सामग्री को फैलाना यूनिवर्सिटी अधिकारियों पर अनावश्यक दबाव बनाने की कोशिश लगती है। इससे निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के संचालन पर बुरा असर पड़ सकता है।