Shimla: रोहित ठाकुर बोले- एनएसएनआईएस प्रशिक्षण से हिमाचल की खेल शिक्षा को मिलेगी नई दिशा
सशक्त बनाने के लिए शारीरिक शिक्षा शिक्षकों को एशिया के अग्रणी संस्थान नेताजी सुभाष नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स (एनएसएनआईएस) पटियाला में विशेष प्रशिक्षण के लिए भेजने की शुरुआत की है।
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हिमाचल सरकार ने स्कूलों में खेल संस्कृति को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए शारीरिक शिक्षा शिक्षकों को एशिया के अग्रणी संस्थान नेताजी सुभाष नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स (एनएसएनआईएस) पटियाला में विशेष प्रशिक्षण के लिए भेजने की शुरुआत की है। इसी कड़ी में गुरुवार को शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने शिमला के होटल पीटरहॉफ से 135 शिक्षकों के पहले बैच को रवाना किया। इस अवसर पर समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा, स्कूली शिक्षा निदेशक आशीष कोहली भी उपस्थित रहे।
राज्य सरकार द्वारा समग्र शिक्षा के तहत कुल 650 शारीरिक शिक्षा शिक्षकों को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण दिया जाएगा। पहले चरण में भेजे गए 135 शिक्षकों में 51 महिला शिक्षक शामिल हैं, जिनमें 75 पीईटी, 40 डीपीई, 12 प्रवक्ता (शारीरिक शिक्षा) और कोच सम्मिलित हैं। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि एनएसएनआईएस जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में शिक्षकों को प्रशिक्षण के लिए भेजना प्रदेश में खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में एक नई शुरुआत है। इससे हिमाचल की खेल शिक्षा को नई दिशा मिलेगी। बीते साढ़े तीन वर्षों में राज्य सरकार ने शिक्षा सुधार के साथ-साथ खेलों में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। लगभग 12 वर्षों के बाद हिमाचल में राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंटों का सफल आयोजन किया गया है।
उन्होंने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए शारीरिक शिक्षा अत्यंत आवश्यक है और पहाड़ी क्षेत्रों में कबड्डी व वॉलीबॉल जैसे खेलों में बेहतर प्रदर्शन की व्यापक संभावनाएं हैं, जिन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश में खेल छात्रावासों की संख्या बढ़ाई जा रही है। खेल छात्रावासों में चयन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाएगा और मेरिट के आधार पर चयन सुनिश्चित किया जाएगा। इस अवसर पर समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने कहा कि खेल और शारीरिक शिक्षा युवाओं के समग्र विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, इसलिए राज्य में इन पर विशेष फोकस किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर की नीतियों में खेलों और शारीरिक शिक्षा को स्कूली शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है।