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113 साल बाद हिमाचल आया 'हूपर स्वॉन' हंस
धर्मशाला/ब्यूरो
Updated Fri, 01 Feb 2013 04:49 PM IST
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प्रवासी पक्षियों की पसंदीदा सैरगाह बन चुकी अंतरराष्ट्रीय रामसर साइट पौंग झील के स्वर्णिम इतिहास में एक और सुनहरा पंख जुड़ गया है। यहां यूरेशियन हेमिस्फेयर प्रजाति के हंस हूपर स्वॉन ने ठीक 113 साल बाद दस्तक दी है।
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दिलचस्प है कि हूबहू हंस की तरह दिखने वाले हूपर स्वॉन को भारत में पहली बार 1900 में तत्कालीन जनरल ऑस बॉर्न ने रिकार्ड किया था। उस वक्त हूपर स्वॉन की भारत में कोई तस्वीर नहीं थी। यह पहला मौका है, जब हिमाचल प्रदेश के वाइल्ड लाइफ डिवीजन ने हूपर स्वॉन को अपने कैमरे में कैद किया है। साथ ही इस पक्षी के आगमन ने पौंग झील के इतिहास में एक नया रिकार्ड दर्ज कर लिया है।
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वन्य प्राणी विभाग (पौंग डैम) के रेंज अफसर डीएस डढवाल ने बताया कि पहली बार यह पक्षी भारत में 1900 में देखा गया था। तब यहां अंग्रेज शासक जनरल ऑस बॉर्न ने पहली बार सरकारी दस्तावेज में इस पक्षी की उपस्थिति दर्ज की थी। यह पक्षी पौंग झील में अब विशेष मेहमान बन चुका है।
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झील में हूपर स्वॉन की एक झलक के लिए पक्षी प्रेमी उमड़ रहे हैं। यूरोप और एशिया के बीच पाया जाने वाला हूपर स्वॉन यहां की आबोहवा में घुलमिल चुका है। विभाग अब इस प्रजाति के पक्षियों की तादाद जुटाने में कसरत कर रहा है।
हूपर स्वॉन तैरने के लिए विशाल जलाशयों को पसंद करता है। हजारों किलोमीटर की उड़ान की क्षमता रखने वाले इस पक्षी की विशेषता यह है कि टांगें कमजोर होने के कारण यह ज्यादा देर तक जमीन पर नहीं टहल सकता। आमतौर पर यह प्रजनन के लिए वेटलैंड को ही चुनता है।