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Rampur Bushahar News: माता दुर्गा के आगमन के साथ शवाल का बिशु मेला शुरू

Sat, 09 May 2026 11:03 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 09 May 2026 11:03 PM IST
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With the arrival of Goddess Durga, the Bishu fair of Shawal begins
शवाल के एतिहासिक बिशु मेला के आरंभ पर शोभा यात्रा में नाटी डालते लोग। संवाद
पारंपरिक वाद्ययंत्रों की ध्वनियों पर देवलुओं ने किया नृत्य
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बड़ी संख्या में लोगों ने माता दुर्गा के दर्शन किए



संवाद न्यूज एजेंसी



कोटखाई (रोहड़ू)। कोटखाई में शवाल का बिशु मेला शनिवार को माता दुर्गा के आगमन के साथ शुरू हो गया। दुर्गा माता नंदराडी पालकी पर सवार होकर देवलुओं के साथ मेला मैदान में पहुंचीं। यहां कोटखाई पंचायत, पांदली पंचायत, बाग डुमैहर पंचायत, दरकोटी पंचायत, गरावग पंचायत और थरोला पंचायत के लोगों ने माता का स्वागत किया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने माता दुर्गा के दर्शन किए। मेले के पहले दिन माता की पालकी पूर्वाह्न 11 बजे मंदिर से चली और दोपहर करीब 2:00 बजे मेले में पहुंची। इस दौरान पारंपरिक वाद्ययंत्रों की ध्वनियों पर देवलू नृत्य करते रहे। शाम के समय माता की पालकी को वापस पुजैली स्थित मंदिर में लाया गया। रविवार 10 मई को मेले के अंतिम दिन माता की पालकी को फिर से मेले में ले जाया जाएगा।

वर्ष 1945 से नियमित रूप से मनाया जा रहा है मेला
माता के भंडारी मोहन चौहान, गोविंद सावंत और राजेंद्र चौहान ने बताया कि मेले का आयोजन सदियों से पटाखर, शकीली, ठारु (घांसी) और शवाल में होता था, लेकिन शकीली गांव में स्थानीय लोगों में धूर (मेले में सबसे आगे नाचने की प्रथा) के कारण झगड़ा हो गया। इस कारण वर्ष 1944 में ब्रिटिश सरकार ने मेलों पर रोक लगा दी थी। ठारु और शवाल से वर्ष 1945 में मेले पर से रोक हट गई थी, लेकिन पटाखर और शकीली गांव में आज तक मेले पर रोक लगी है। शवाल में मेला हर वर्ष हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि माता दुर्गा मेले के पहले दिन अपने देवलुओं के साथ शवाल पहुंचती है। इस दौरान माता स्थानीय लोगों के साथ पारंपरिक वाद्ययंत्रों की ध्वनियों पर जमकर नृत्य करती हैं। माता और लोगों का नृत्य मेले का मुख्य आकर्षण रहता है। दो दिवसीय मेले का आयोजन पुजारली दुर्गा माता मंदिर कमेटी के तत्वावधान में किया जा रहा है।
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