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मौसम की मार : इस साल सेब उत्पादन आधे से कम होने का अनुमान

Sat, 18 Jul 2026 11:12 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 18 Jul 2026 11:12 PM IST
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Weather's Toll: Apple production projected to drop by more than half this year.
रामपुर उपमंडल की शलाटी घोड़ी में सेब बगीचों में फसल कम। संवाद 
रामपुर और ननखड़ी खंड में 18 लाख पेटियां उत्पादन का अनुमान
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बीते वर्ष 40 लाख सेब पेटियों का किया था तुड़ान

मौसम की बेरुखी से आर्थिकी को लगा बड़ा झटका

तिलक राज कायथ
रामपुर बुशहर। प्रदेश के करीब 5,000 करोड़ रुपये के सेब कारोबार पर इस वर्ष मौसम की मार भारी पड़ती दिख रही है। रामपुर उपमंडल और ननखड़ी विकास खंड में सेब उत्पादन में बड़ी गिरावट दर्ज होने का अनुमान है। बीते वर्ष की तुलना में इस साल उत्पादन आधे से भी कम रहने की संभावना है, जिससे बागवानों की आर्थिकी के साथ-साथ करोड़ों रुपये के कारोबार पर भी असर पड़ेगा।
उद्यान विभाग के अनुसार, इस वर्ष रामपुर उपमंडल में करीब 11.50 लाख और ननखड़ी विकास खंड में लगभग 6.50 लाख सेब पेटियों का उत्पादन होने का अनुमान है। यानी दोनों क्षेत्रों में कुल मिलाकर करीब 18 लाख पेटियां ही तैयार होंगी। इसके विपरीत, पिछले वर्ष इन दोनों क्षेत्रों से लगभग 40 लाख सेब पेटियों का उत्पादन हुआ था, जिन्हें देशभर की विभिन्न मंडियों में भेजा गया था।
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बागवानों का कहना है कि इस वर्ष प्रतिकूल मौसम के कारण कई बगीचों में उत्पादन इतना कम हुआ है कि सैकड़ों बागवानों का 'मार्का' ही बंद हो गया है। यानी उनके पास मंडियों में भेजने लायक सेब की फसल ही नहीं हुई। इससे उनकी आय पर गंभीर असर पड़ा है।
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बागवान प्रेम राज, विजय राज, विनोद चौहान, मुकेश मेहता, फकीर चंद, संदेश चौहान और देवेंद्र चौहान ने बताया कि सर्दियों में पर्याप्त बर्फबारी नहीं होने से सेब के पेड़ों को आवश्यक चिलिंग आवर्स नहीं मिल सके। इसके अलावा फूल आने के समय मौसम में अचानक बदलाव, बेमौसम बारिश और परागण प्रभावित होने से उत्पादन घटा। वहीं, फल बनने के शुरुआती दौर में कई क्षेत्रों में हुई ओलावृष्टि ने फसल को और नुकसान पहुंचाया।
बागवानों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और लगातार बदलते मौसम के कारण निचले और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इस बार सेब की फसल पिछले वर्ष की तुलना में केवल 10 से 40 प्रतिशत तक ही रह गई है। हालांकि, ऊंचाई वाले कुछ क्षेत्रों में उत्पादन अपेक्षाकृत बेहतर है। उनका कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण हर वर्ष बागवानी पर संकट गहराता जा रहा है और बागवानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
पिछले वर्ष की तुलना में इस बार रामपुर और ननखड़ी में सेब उत्पादन कम रहने का अनुमान है। सेब सीजन के दौरान बागवानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

हर्ष अमरेंद्र सिंह, एसडीएम
शलाटी घोड़ी में 20 हजार से घटकर 1,500 पेटियों होने का अनुमान
भड़ावली पंचायत के शलाटी घोड़ी क्षेत्र में, जहां सामान्य वर्षों में 18 से 20 हजार सेब पेटियों का उत्पादन होता था, इस बार केवल 1,000 से 1,500 पेटियां होने का अनुमान है। यह स्थिति दर्शाती है कि निचले क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं और प्रतिकूल मौसम का बागवानी पर कितना गंभीर प्रभाव पड़ा है। बागवानों का कहना है कि लगातार घटती पैदावार उनकी आजीविका के लिए बड़ा संकट बनती जा रही है।
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